जम्मू विश्वविद्यालय के जोरावर सिंह सभागार में सात दिवसीय बांस उत्पादन प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य छात्रों को स्वरोजगार के लिए आत्मनिर्भर बनाना है, ताकि वे बांस उत्पादन के संबंध में प्रशिक्षण लेकर इसकी खेती कर सकें और दूसरों को भी रोजगार के काबिल बना सकें। छात्रों को प्रशिक्षण देने के लिए त्रिपुरा से विशेषज्ञ कार्तिक और दिमान दास व सांबा से तरसेम लाल और सुरजीत सिंह को विशेष रूप से बुलाया गया है। प्रशिक्षण के लिए 20 छात्रों ने आवेदन किया है। विश्वविद्यालय के उद्यमी और कौशल विकास केंद्र, अध्ययन केंद्र म्यूजोलॉजी की निदेशक पूनम शर्मा और प्रोफेसर अलका शर्मा की अध्यक्षता में कार्यक्रम शुरू किया गया है।
मंदिरों के शहर के छात्र ले रहे बांस उत्पादन का प्रशिक्षण, त्रिपुरा से पहुंचे विशेषज्ञ
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इसका उद्घाटन विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार प्रोफेसर अरविंद जसरोटिया, प्रोफेसर नरेश पादा और क्लस्टर विश्वविद्यालय के प्रोफेसर सिंधु कपूर ने किया । डॉ. पूनम शर्मा ने कहा कि बांस प्रशिक्षण का मकसद छात्रों में कौशल विकास करना है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में परंपराएं खत्म हो रही हैं।
उन्हीं परंपराओं को बचाने के लिए बांस उत्पादन के प्रशिक्षण की यह पहल शुरू की गई है। इससे छात्र आधुनिक तरीके से काम करेंगे और प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को भी संजोएंगे। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण कार्यक्रम को सफल बनाने में त्रिपुरा सरकार ने भी सहयोग किया है।
त्रिपुरा के दोनों विशेषज्ञ राज्य और राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार के लिए चुने जा चुके हैं। डॉ. पूनम ने कहा, उनके पास कुछ छात्र जम्मू विश्वविद्यालय के, कुछ क्लस्टर विश्वविद्यालय के और कुछ सिविल सोसाइटी के हैं। मौके पर डॉ. माले डे और डॉ. मनु मलोत्रा ने कहा कि वह म्यूजोलॉजी अध्ययन केंद्र में जुलाई 2021 से डिप्लोमा कोर्स की कवायद तेजी से शुरू करेंगे।
म्यूजोलॉजी अध्ययन केंद्र छात्रों का कौशल विकास और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की पूरी कोशिश कर रहा है। इससे वह खुद ही नहीं बल्कि दूसरों को भी रोजगार के काबिल बनाएंगे।
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