आज देश सशस्त्र सेना झंडा दिवस मना रहा है। देश की रक्षा में जान न्योछावर करने वाले वीर सपूतों की याद में यह दिन मनाते हैं। आज जांबाज सैनिकों के शौर्य को पूरा देश नमन कर रहा है। देश के वीर सपूतों पर दुश्मन देश ने कई बार हमले किए हैं। इन्हीं हमलों में एक हमला था उरी हमला। इस हमले ने देश को झकझोर कर रख दिया था। लेकिन इसके बाद देश के वीर सपूतों ने दुश्मन देश को ऐसा सबक सिखाया जिसकी कल्पना शायद उसने कभी सपने में भी नहीं की थी।
18 जवानों की शहादत के बाद वो अमावस की रात, जब दुश्मन को बताया- घर में घुसकर मारने की कूवत रखते हैं
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ये ऑपरेशन इतना सीक्रेट था कि इसकी जानकारी सिर्फ सात लोगों को थी। पाक अधिकृत कश्मीर में सर्जिकल ऑपरेशन के लिए कमांडो को मात्र दो घंटे का समय दिया गया था। आसमान में करीब 35 हजार फीट की ऊंचाई से भारतीय वायु सेना के हेलीकॉप्टर इस ऑपरेशन की निगरानी कर थे।
125 कमांडो डोगरा और बिहार रेजिमेंट के थे। दोनों रेजिमेंट से तैयार विशेष संयुक्त पैरा कमांडो ने इस कार्रवाई को अंजाम दिया। कमांडो का चयन पंजाब, जम्मू, हिमाचल प्रदेश से हुआ और विशेष टीम का गठन किया गया। सुबह साढ़े चार बजे सभी कमांडो पैदल मार्ग से ही पीओके में घुसे और सफल होकर वापस आए।
28 सितंबर रात दो बजकर दस मिनट पर पुंछ से एलओसी पार कर कमांडो पाक अधिकृत कश्मीर के भिंबर, कैल क्षेत्र स्थित कैंप में पहुंचे। हमले से पहले आतंकियों के कैंप की पूरी जानकारी हासिल कर ली गई थी। आतंकी किस समय सोते हैं और कब खाना खाते हैं, इसकी जानकारी भी ली गई थी।