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#KabTakNirbhaya: अपराजिताएं बोलीं- फिर कोई दरिंदगी करने का दुष्साहस न कर सके...ऐसी सजा मिले

Mon, 02 Dec 2019 10:34 AM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: प्रशांत कुमार Updated Mon, 02 Dec 2019 10:34 AM IST
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Aparajita 100 million smiles jammu kashmir: debate on Hyderabad case and women security
अपराजिता - फोटो : अमर उजाला

हैदराबाद में महिला डॉक्टर का अपहरण, दुष्कर्म और जलाकर हत्या करने के मामले ने जम्मू के लोगों को भी झकझोर कर रख दिया है। समाज को शर्मसार कर देने वाली इस दरिंदगी के खिलाफ बेहद आक्रोश है। इस घटना के बीच महिला सुरक्षा पर रविवार को आयोजित अमर उजाला संवाद में जम्मू की प्रबुद्ध महिलाओं ने व्यवस्था पर भी कई सवाल उठाए।



उनका कहना है कि कैंडल मार्च निकालने और घटना पर रोष जताने से कुछ नहीं होने वाला है। ऐसे दरिंदों को तय समय अवधि में ऐसी सजा मिलनी चाहिए, जिससे दूसरा कोई ऐसी दरिंदगी करने का दुष्साहस न कर सके। संवाद में शामिल महिलाओं ने कहा कि  बेटियों को लेकर समाज की मानसिकता बदलने की जरूरत है। और इसकी शुरूआत घर से ही होनी चाहिए। केवल तमाशबीन बने रहने से कुछ नहीं होगा।

न्याय के लिए सामाजिक, पुलिस तथा न्यायिक व्यवस्था में सुधार करने की आवश्यकता है। पुलिस और न्यायिक व्यवस्था में लोगों का विश्वास बढ़े, इसके लिए कदम उठाए जाने चाहिए। स्कूली शिक्षा में नैतिक शिक्षा के साथ सेल्फ डिफेंस को बढ़ावा दिया जाए। ऐसी तकनीकी विकसित करनी चाहिए, जिससे इमरजेंसी में बेटियों को तत्काल मदद मिले।

Aparajita 100 million smiles jammu kashmir: debate on Hyderabad case and women security
अपराजिता - फोटो : अमर उजाला

विश्वविद्यालयों में महिला अपराध से जुड़े मामलों पर शोध कर इसके कारणों और समाधान का प्रयास किया जाना चाहिए। ड्रग्स, शराब सेवन पर प्रतिबंध लगे। पोर्न साइट्स पर निगरानी बढ़ाई जानी चाहिए। इस प्रकार की घटनाएं केवल कानून भर बनाने से नहीं रुकेंगी। कानून का शत प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित होना चाहिए। ऐसी घटनाओं को धर्म एवं राजनीति से जोड़ने के बजाय मानवीय दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए।

किसने, क्या कहा

इस घटना ने मुझे अंदर तक हिला कर रख दिया। इन सभी घटनाओं की वजह है समाज में जागरूकता का अभाव। हमें घर से ही इस बारे में जागरूकता लाने का काम करना चाहिए। दोषियों को नपुंसक बनाकर सभी सोशल मीडिया और अखबारों की सुर्खियों में लाया जाना चाहिए ताकि कोई भी ऐसी हरकत करने के बारे में सोचे भी नहीं।- डॉ अमिता मेहता, साहित्यकार

सिर्फ किसी एक को बदलने से कुछ नहीं होगा, जरूरत है समाज की सोच को बदलने की। इन सभी घटनाओं को तभी रोका जा सकता है जब हम हर क्षेत्र में बदलाव लाने की कोशिश करें। स्कूलों में सेल्फ डिफेंस सिखाया जाना चाहिए। टेक्नॉलाजी भी इसमें काफी अच्छी भूमिका निभा सकती है। सरकार को चाहिए कि जिन आईआईटी पर वह इतना पैसा लगाते हैं उन्हें यह काम सौंपा जाए कि वह ऐसे डिवाइस तैयार करें जिससे महिलाएं कहीं भी 5 से 10 मिनट के अंदर किसी को मदद मिल सके। - डॉ श्वेता कोहली, असिस्टेंट प्रोफेसर, केंद्रीय विश्वविद्यालय, जम्मू

 

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अपराजिता - फोटो : अमर उजाला

ऐसी हर घटना के बाद कड़ा कानून बनाने की बात होती है। समय के साथ कई नए कानून भी आए पर बदला कुछ नहीं। आज भी महिलाओं के साथ गलत हो रहा है। हमारे समाज में शक्ति को पूजा जाता है पर यह सब केवल नाममात्र है। जब भी ऐसी कोई घटना सामने आती है तो उसे धर्म-जाति और राजनीति का मुद्दा बना दिया जाता है। इसे बंद किया जाना चाहिए। जरूरत है पुलिस के काम में सुधार लाने की। लोग पुलिस के पास जाने से डरते हैं। इसके बारे में भी लोगों में जागरूकता लाने की आवश्यकता है। - मोनिका कोहली, वकील, जम्मू हाईकोर्ट

हम बात करते हैं कि नैतिक कर्तव्यों के  बारे में बच्चों को शिक्षित करना चाहिए। दुष्कर्म के कई मामलों में यह दलील दी जाती है कि वह नाबालिग है। जब वह दुष्कर्म जैसा घिनौना काम कर सकता है तो नाबालिग कैसे हुआ। जब तक हम दोषियों को सजा नहीं देंगे तब तक समाज में सुधार नहीं आ सकता। इन घटनाओं में इंटरनेट का भी योगदान है। इसके प्रयोग पर ध्यान देने की जरूरत है। - देविंद्र कौर मदान, सामाजिक कार्यकर्ता
 

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अपराजिता - फोटो : अमर उजाला

हाई कोर्ट की तरफ से रोजाना कोई न कोई ऑर्डर जारी होता है। लेकिन धरातल पर उसे लागू नहीं किया जाता। आठ हजार से ऊपर ऐसे केस हैं जिनके अहम फैसले अभी तक लागू नहीं हो सके हैं। हम पुलिस वाले भी कहीं न कहीं दोषी हैं। 10 से 12 विभिन्न विभागों के कर्मचारियों के टेस्ट केस लेने चाहिए। दावा है कि उनमें से 3-4 लोग भ्रष्ट निकलेंगे। उन्हें कड़ी से कड़ी सजा दी जानी चाहिए ताकि लोगों में सजा का डर बन सके और इस तरह कोई हरकत करने से पहले जरूर सोचें। - शशि ठाकुर, डीएसपी, जेएंडके पुलिस

हम स्कूलों में सिर्फ लड़कियों को ही गुड-टच और बैड-टच के बारे में क्यों बताते हैं। हमें लड़कों को भी इसके बारे में बताना चाहिए। पुलिस में सुधार लाने से पहले हमें समाज में सुधार की आवश्यकता है। सबसे ज्यादा दुष्कर्म मामले आज के दौर में टेक्नालाजी की वजह से हो रहे हैं। एक मां ही है जो अपने बच्चों को अच्छे से समझती है। इस वजह से बच्चे को जागरूक करने में उसकी अहम भूमिका हो सकती है। बेटों को बदलने की जरूरत है बेटियों को नहीं। - सुषमा गुप्ता, पूर्व अध्यक्ष रोटरी क्लब

 

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अपराजिता - फोटो : अमर उजाला

इस तरह की घटना को रोकने के लिए बहुत जरूरी है कि दोषी को कड़ी से कड़ी सजा दी जाए। लोगों में इस बात का डर ही नहीं है कि दुष्कर्म करने पर उन्हें सजा मिल सकती है। इसकी बहुत आवश्यकता है। लोगों में डर कायम किया जाए कि इस तरह की कोई भी हरकत करने पर उन्हें कड़ी सजा मिलेगी। हमें अपनी बेटियों को हिम्मत देनी चाहिए ताकि वह खुद के लिए हर एक स्थिति में खड़ी रह सकें।- रीतू गुप्ता, सामाजिक कार्यकर्ता

महिला सशक्त हो चुकी हैं। अब जरूरत है हमारे समाज के पुरुषों को और उनकी सोच को बदलने की। बच्चों को नैतिक मूल्यों के बारे में बताना बहुत ही जरूरी है। इसकी शुरुआत घर से हो सकती है। अभिभावकों को अपने बच्चोें के साथ ज्यादा से ज्यादा समय व्यतीत करना चाहिए। बच्चों में ध्यान लगाने और योगा करने की आदत को विकसित किया जाए। इससे कहीं न कहीं उनकी सोच में भी सकारात्मकता आती है।- हेमलता, टीचर ऑफ आर्ट एंड लिविंग  

यह भी (साहित्यकार डा. अमिता मेहता की जुबानी)
जाओ प्रिय हमारा देश बहुत व्यस्त है इन दिनों
हमारे पास वक्त नहीं तुम्हारी दर्दनाक मौत पर रोने का
हमें नहीं सुनाई देती तुम्हारी यह खौफनाक चीखें
तुम तड़पकर मरी या लड़-लड़ कर, इससे हमें कोई फर्क नहीं पड़ता
तुम्हारी अधजली देह, इस मुल्क में अखबार की सुर्खी के सिवाए कुछ भी नहीं.........

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