जम्मू रेलवे ने श्रीनगर एक्सप्रेस से देश की सबसे तेज वंदेभारत एक्सप्रेस तक का सफर पूरा किया है। 47 वर्ष पहले आज ही के दिन 2 दिसंबर 1972 को जम्मू में पहली यात्री ट्रेन पहुंची थी। एक दिसंबर को नई दिल्ली से चली श्रीनगर एक्सप्रेस वर्तमान में (झेलम एक्सप्रेस) दो दिसंबर को जम्मू रेलवे स्टेशन पहुंची थी। स्वतंत्र भारत में यह पहला मौका था जब जम्मू में कोई ट्रेन यात्रियों को लेकर पहुंची थी। इसमें केंद्र और राज्य सरकार के मंत्री सवार होकर इस ऐतिहासिक पल के गवाह बने थे। इससे पहले पठानकोट तक ही यात्री ट्रेन आती थी।
2 दिसंबर 1972: जब जम्मू पहुंची स्वतंत्र भारत की पहली ट्रेन, बेहद यादगार और दिलचस्प लम्हे
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1974 से 20 वर्ष तक जम्मू रेलवे स्टेशन में मैकेनिकल विभाग में सुपरवाइजर पद से सेवानिवृत्त राजेंद्र शर्मा कहते हैं कि जम्मू में यात्री ट्रेन से पहले माल गाड़ियां आती थीं। दो दिसंबर 1972 पहली बार यात्री ट्रेन जम्मू पहुंची थी। उस समय जम्मू में एक ही प्लेटफॉर्म होता था, वह भी कच्चा था। उन्होंने बताया कि एक हजार के करीब रेल कर्मी काम करते थे। जम्मू में ट्रेन पहुंचने से पहले उनकी ड्यूटी पठानकोट में थी। पहले सड़क से घर आते थे, लेकिन ट्रेन चलने के बाद आने जाने का सुविधाजनक विकल्प मिल गया।
जम्मू रेलवे स्टेशन उस समय एक वाशिंग लाइन होती थी, जिसमें ट्रेन की धुलाई और तकनीकी जांच की जाती थी। रेलवे क्वार्टर की सुविधा सीमित होने की वजह से यहां रामलीला क्लब भी होता था। पहली ट्रेन चलने के बाद तीन अन्य ट्रेनें शुरू की गईं जिसमें कश्मीर ट्रेन वर्तमान में जम्मू मेल, सियालदह एक्सप्रेस और जम्मू-पठानकोट डीएमयू चलाई गई। इसके बाद यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए रेलवे ने जम्मू से राजधानी ट्रेन का परिचालन शुरू किया।
1972 से पहले माता वैष्णो देवी कटड़ा आने वाले श्रद्धालुओं को पठानकोट उतरना पड़ता था। वहीं जम्मू से हरिद्वार जाने वाले यात्री पठानकोट से ट्रेन पकड़ते थे। जम्मू तक ट्रेन पहुंचने के बाद लोगों का सफर सुगम हो गया है। जम्मू रेलवे स्टेशन धार्मिक पर्यटन के हिसाब से बड़ा रेलवे स्टेशन है। पहली ट्रेन चलने के बाद से जम्मू के लिए देश के विभिन्न राज्यों से सीधी ट्रेन सेवा शुरू कर दी गई।
वर्ष 1969 में पहली बार रेलवे लाइन को जम्मू तक पहुंचाने की जमीनी स्तर पर पहल हुई थी। 1969 में कठुआ-जम्मू तक रेल लाइन बिछाने का काम शुरू हुआ जो तीन साल के समय में पूरा किया गया। वहीं भारत पाकिस्तान के युद्ध के दौरान भी इस रेल प्रोजेक्ट का काम नहीं रुका था।