कोरोना काल के एक साल में आम जनमानस का मन-मस्तिष्क भी प्रभावित हुआ है। संक्रमण और पाबंदियों से लोगों की दिनचर्या बुरी तरह से प्रभावित हुई, जिससे तनाव, चिंता और अवसाद की शिकायतें बढ़ गईं। दोबारा इस संक्रमण के बढ़ने से लोग पोस्ट डिप्रेशन का शिकार हो रहे हैं। इसमें बच्चे भी पीड़ित हुए हैं। खासतौर पर ऑनलाइन पढ़ाई को लेकर उनका संतुलन बिगड़ा है। मनोचिकित्सकों के अनुसार कई बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाई समझ नहीं आई और उन्हें लग रहा है कि वे दूसरों से पीछे रह गए हैं। इसी तरह सामाजिक स्तर पर निकट रिश्तों के साथ संवाद कम हुआ है। इससे सामाजिक समर्थन खत्म हुआ है। बुुजुर्ग वर्ग को लग रहा है कि वह कोरोना से पीड़ित होने की श्रेणी में सबसे ऊपर हैं। मधुमेह, ब्लड प्रेशर, हृदय रोग आदि से पीड़ित लोगों में अधिक घबराहट है।
कोरोना काल में चिंता और तनाव हावी: पोस्ट कोविड डिप्रेशन का शिकार हो रहे लोग
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केस1 - अखनूर निवासी प्रमोद गुप्ता हाल ही में विदेश से यात्रा से लौटे हैं। वह कोविड संक्रमित भी थे, लेकिन अब उनकी सेहत पूरी तरह से दुरुस्त है। मगर दिल में एक अंजान सा डर बैठ गया है कि कहीं कोरोना की दूसरी स्ट्रेन का वह शिकार न हो जाएं। इस डर के कारण अधिकतर समय घर पर ही बिता रहे हैं। सामाजिक गतिविधियों से दूर रह रहे हैं। एक निजी सायकाइटरी क्लीनिक में काउंसलिंग के दौरान उनमे एंग्जाइटी की शिकायत पाई गई है।
केस 2- शास्त्रीनगर निवासी भुवनेश्वर शर्मा कुछ दिन पहले पूरी तरह से स्वस्थ थे, लेकिन पिछले एक हफ्ते से अचानक घबराहट के साथ सांस फूल रही है। किसी अंजान डर से शरीर में कमजोरी महसूस हो रही है। हालत बिगड़ने पर मनोचिकित्सक के पास पहुंचे तो उसमें डिप्रेशन की शिकायत बताई गई। शर्मा भी कोरोना वायरस को लेकर अपनी सेहत को लेकर चिंतित हैं।
समाज के एक बड़े हिस्से में कोविड की दूसरी लहर को लेकर अंजान डर बैठ गया है। हर दूसरे या तीसरे व्यक्ति को लग रहा है कि वे दोबारा कोरोना वायरस की चपेट में आ सकते हैं। सायकाइटरी अस्पताल में एंग्जाइटी और डिप्रेशन से जुड़े कई मामले रिपोर्ट हो रहे हैं। अस्पताल में सामान्य 200 मरीजों की ओपीडी में 40 फीसदी एंग्जाइटी और डिप्रेशन से जुडे़ मामले हैं। आर्थिक संकट ने भी तनाव को बढ़ाने का काम किया है। - डॉ. कीर्ति शर्मा, अधीक्षक साइकाइट्री अस्पताल जम्मू
- सामान्य से कम नींद आना
- भूख नहीं लगना, बेवजह का डर
- दिल की धड़कन तेज होना
- अचानक गुस्सा या उदासी बढ़ जाना
वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. जगदीश थापा का कहना है कि सरकार की ओर से जारी कोविड एडवाइजरी का हर वर्ग को गंभीरता और सख्ती से पालन करना चाहिए। इसमें सामाजिक दूरी, मास्क पहनना अनिवार्य करना, भीड़भीड़ वाले जगहों पर जाने से परहेज करें, पर्याप्त सैनिटाइजिंग आदि का पालन करें।