जम्मू-कश्मीर के नगरोटा में शुक्रवार को मारे गए तीनों आतंकियों को पाकिस्तान में बैठे जैश-ए-मोहम्मद के कमांडर अबू बकर ने प्रशिक्षित किया था। इन आतंकियों को पाकिस्तान से कश्मीर भेजने के पीछे बकर का हाथ है और वही इस पूरे ग्रुप का हैंडलर भी था। आतंकियों को कश्मीर ले जाने वाले समीर डार को भी बकर ही आदेश दे रहा था।
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नगरोटा मुठभेड़
- फोटो : अमर उजाला
यहीं नहीं, यह लोग वीपीएन एप के जरिए सोशल मीडिया साइट व्हाट्सएप के जरिए बात कर रहे थे। आतंकियों ने नगरोटा टीसीपी के पास पुल के नीचे आईईडी लगाकर इसकी तस्वीरें भी पाकिस्तान भेज दी थीं। इसकी जानकारी पकड़े गए आतंकियों के मददगारों ने पूछताछ में दी। आतंकियों के मददगारों को पुलिस ने पूछताछ के लिए सात दिन की पुलिस रिमांड पर ले लिया है।
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नगरोटा मुठभेड़
- फोटो : अमर उजाला
सूत्रों का कहना है कि अबू बकर को मारे गए आतंकियों को पुलवामा और वहां से एक अन्य ग्रुप को बिना हथियारों के जम्मू भेजना था। इस ग्रुप ने नगरोटा के टीसीपी के पास बने पुल के नीचे लगी आईईडी को एक्टिवेट कर पुलवामा जैसे हमले को अंजाम देना था। बकर ने इन आतंकियों को इंटरनेशनल बॉर्डर तक खुद छोड़ा था।
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नगरोटा मुठभेड़
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वहां से बॉर्डर की लगी हुई फेंसिंग को काटा और वहां से भेज दिया। बकर और अन्य आतंकियों को पता था कि जम्मू कश्मीर में सोशल साइट्स नहीं चल रही हैं। इसलिए इन लोगों ने वीपीएन एप को डाउनलोड किया और इसके जरिए अपना व्हाट्सएप एक्टिव कर लिया। जैसे ही यह आतंकी घुसे तो इनको समीर डार ने ट्रक में दियालाचक से बैठा लिया। इसके बाद से लगातार वीपीएन के जरिए बातचीत हुई।
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नगरोटा आतंकी हमला
- फोटो : अमर उजाला
समीर डार ने दिसंबर, 2019 को भी जैश के तीन आतंकियों को पुलवामा में पहुंचाया है। सूत्रों का कहना है कि हीरानगर के दियालाचक इलाके से ही आतंकियों ने घुसपैठ की। दियालचक में ही एक ट्रक में समीर ने इनके लिए हाइडआउट तैयार किया। फिर सांबा के धार रोड से इनको कश्मीर पहुंचाया। समीर डार ने पूछताछ में बताया है कि उसका काम सिर्फ आतंकियों को कश्मीर छोड़ना होता था। इसके बाद उसे कुछ नहीं पता कि आतंकी कहां जाते हैं और कहां हमला करते हैं।