जम्मू कश्मीर में तालाबों और झीलों सहित शिनाख्त किए गए लगभग 3800 जल निकायों के संरक्षण और उनके कायाकल्प के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। जल निकायों के भू टैगिंग, पारिस्थितिक संतुलन की बहाली, ऐसे क्षेत्रों में पानी की गुणवत्ता का परीक्षण करने, निगरानी मानकों पर जल निकायों की ग्रेडिंग आदि के लिए वन विभाग की भूमिका बढ़ाने पर जोर दिया गया है।
जम्मू-कश्मीर में 3800 जल निकाय होंगे संरक्षित, होगा पानी की गुणवत्ता का परीक्षण
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इसमें जिला स्तरीय शिकायत निवारण तंत्र स्थापित किया जाएगा। जल ही जीवन है, इस सूत्र वाक्य को शायद अब लोग भूल गए हैं। दिनोंदिन बारिश की होती जा रही कमी के बाद भी लोग जल संरक्षण के प्रति उदासीन बने हुए हैं। अधिकतर पुराने जलस्त्रोतों का अस्तित्व मिटा दिया गया, जिस कारण जल संकट गहराता जा रहा है।
वहीं बुधवार को मुख्य सचिव बीवी सुब्रहामण्यम ने विभागीय अधिकारियों के साथ बैठक कर जल निकायों के संरक्षण के लिए उपायों की समीक्षा की। मुख्य सचिव ने एक अन्य बैठक में राष्ट्रीय हरित अधिकरण के मार्गदर्शन में तैयार जिला पर्यावरण योजनाओं की स्थिति की भी समीक्षा की।
उन्होंने कहा कि हर वर्ष होने वाले वर्षा के मौसम में नदी, नाले, तालाब, झील आदि पानी से लबालब भर जाते हैं। यदि हम इनमें एकत्र जल को संजोकर रख सकें, तो यह आने वाले जल-संकट से मुक्ति दिला सकता है और पानी की परेशानियों के कम किया जा सकता है।
उन्होंने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को प्रस्ताव प्रस्तुत करने से पहले जिला पर्यावरण योजना समितियों को संबंधित योजनाओं की समीक्षा करने को कहा और संशोधन को 20 मार्च तक किया जाएगा। उन्होंने लोगों की जानकारी के लिए आधिकारिक वेब पोर्टल पर संबंधित योजनाओं की एक प्रति अपलोड करने के निर्देश दिए।
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