{"_id":"5e03496f8ebc3e87c20e587c","slug":"1980-poonch-district-jammu-kashmir-atal-bihari-vajpayee-said-will-snatch-pok-from-pakistan","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"अटल बिहारी वाजपेयी ने 1980 में पुंछ में लोगों को दिया था आश्वासन, हम पाक से पीओके को भी छीन लेंगे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अटल बिहारी वाजपेयी ने 1980 में पुंछ में लोगों को दिया था आश्वासन, हम पाक से पीओके को भी छीन लेंगे
Wed, 25 Dec 2019 05:05 PM IST
Pranjal Dixit
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: Pranjal Dixit
Updated Wed, 25 Dec 2019 05:05 PM IST
विज्ञापन
atal bihari
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का जम्मू-कश्मीर के लोगों से अगाध प्रेम था। 1980 में पुंछ दौरे के दौरान जब वह यहां पहुंचे तो रात के 12 बजे रहे थे परंतु उन्हें सुनने के लिए हजारों लोग उस समय भी मौजूद थे। वाजपेयी को अपने बीच पाकर लोगों ने उन्हें घेर लिया और अपनी आशंका प्रकट की क्या पुंछ का जो हिस्सा भारत में है उसे भी पाकिस्तान ले लेगा।
भारत रत्न स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी (फाइल फोटो)
- फोटो : PTI
इस पर वाजपेयी ने आश्वस्त किया था कि यह हिस्सा तो कहीं नहीं जाने वाला बल्कि हम उस हिस्से को भी छीन लेंगे जो पाकिस्तान के कब्जे में है। बाद में 22 फरवरी 1994 में संसद के दोनों सदनों ने एक प्रस्ताव पारित कर पीओके को भारत का अभिन्न अंग बताया। यह वाकया बयान करते-करते भारतीय जनता पार्टी के सबसे पुराने नेता और पेशे से वकील बख्शी द्वारकानाथ दत्ता की आंखे भर आईं।
अटल बिहारी वाजपेयी (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
उन्होंने अटल जी की जयंती पर बोलते हुए कहा कि उनका पुंछ प्रेम ही आगे चल कर नियंत्रण रेखा के आस-पार के बिछुड़े लोगों को मिलवाने के लिए पुंछ के चक्कां दा बाग की राह-ए-मिलन स्थापित करने का आधार बना।
विज्ञापन
विज्ञापन
अटल बिहारी वाजपेयी (फाइल)
10 हजार कार्यकर्ता रात 12 बजे तक कर रहे थे इंतजार
पुरानी यादें ताजा करते हुए दत्ता आगे कहते हैं जब अटल पुंछ आए तो उनको सुनने के लिए नगर में दस हजार के करीब लोग जुटे हुए थे। तब जम्मू से पुंछ के बीच छोटी गाड़ी से भी 10 घंटे का समय लगता था, ऐसे में उनको पुंछ पहुंचने में देरी हो गई। कलाई पुल के पास कुछ कार्यकर्ता रास्ता बताने के लिए खड़े किए गए थे, लेकिन अंधेरा होने के चलते उन्हें वाजपेयी जी की गाड़ी नहीं दिखी और वे जलास पहुंच गए। वहां से रास्ता पूछते हुए वे रात करीब 12 बजे पुंछ पहुंचे, तब भी लोग उन्हें सुनने के लिए डटे हुए थे। उनका भाषण सुनने के बाद ही लोग घरों को गए।
पुरानी यादें ताजा करते हुए दत्ता आगे कहते हैं जब अटल पुंछ आए तो उनको सुनने के लिए नगर में दस हजार के करीब लोग जुटे हुए थे। तब जम्मू से पुंछ के बीच छोटी गाड़ी से भी 10 घंटे का समय लगता था, ऐसे में उनको पुंछ पहुंचने में देरी हो गई। कलाई पुल के पास कुछ कार्यकर्ता रास्ता बताने के लिए खड़े किए गए थे, लेकिन अंधेरा होने के चलते उन्हें वाजपेयी जी की गाड़ी नहीं दिखी और वे जलास पहुंच गए। वहां से रास्ता पूछते हुए वे रात करीब 12 बजे पुंछ पहुंचे, तब भी लोग उन्हें सुनने के लिए डटे हुए थे। उनका भाषण सुनने के बाद ही लोग घरों को गए।
विज्ञापन
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी
कांग्रेसी नेता ने भाषण के लिए दिया था साउंड सिस्टम
द्वारकानाथ दत्ता ने बताया कि अटल की शख्सियत ऐसी थी कि हर कोई उनसे प्रेम करता था। जब वे पुंछ आए तो यहां पर तब माइक सिस्टम किराये पर नहीं मिलता था। उस समय यहां के कांग्रेसी नेता एवं पूर्व मंत्री गुलाम मोहम्मद मीर पुंछी ने अपना निजी साउंड सिस्टम दिया, जिसके बाद लोग अटल का भाषण सुन पाए। मीर ने माइक देते हुए कहा था कि अटल बिहारी वाजपेयी जी जैसे नेता के लिए माइक तो क्या अपनी जान भी दे सकता हूं।
द्वारकानाथ दत्ता ने बताया कि अटल की शख्सियत ऐसी थी कि हर कोई उनसे प्रेम करता था। जब वे पुंछ आए तो यहां पर तब माइक सिस्टम किराये पर नहीं मिलता था। उस समय यहां के कांग्रेसी नेता एवं पूर्व मंत्री गुलाम मोहम्मद मीर पुंछी ने अपना निजी साउंड सिस्टम दिया, जिसके बाद लोग अटल का भाषण सुन पाए। मीर ने माइक देते हुए कहा था कि अटल बिहारी वाजपेयी जी जैसे नेता के लिए माइक तो क्या अपनी जान भी दे सकता हूं।