जम्मू-कश्मीर: घने जंगल में प्राकृतिक गुफाएं बन रहीं ऑपरेशन में अड़चन, ग्राउंड जीरो पर हैं चुनौतीपूर्ण हालात
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चट्टानें भी इतनी बड़ी हैं कि इनके पीछे छिपे आतंकी अपनी लोकेशन बदल भी लें तो वे किसी को दिखाई नहीं देते। भौगोलिक चुनौतियों को देखते हुए सेना का ऑपरेशन पूरी एहतियात के साथ आगे बढ़ रहा है।
प्राकृतिक गुफाओं में हो सकते हैं कई ठिकाने
घने जंगल के बीच प्राकृतिक गुफाओं में आतंकियों के कई ठिकाने हो सकते हैं। जमीनी परिस्थितियां देखकर आशंका जताई जा सकती है कि आतंकियाें ने अपने ठिपने के ठिकाने पहले से तय कर रखे हैं। दरअसल आतंकी इस घने जंगल में कई महीनों से हैं। इसकी पुष्टि राजोरी-पुंछ रेंज के डीआईजी विवेक गुप्ता भी कर चुके हैं।
सेना की इतने बड़े पैमाने पर घेराबंदी के बावजूद आतंकियों का पता नहीं चल पाना दर्शा रहा है कि आतंकियों ने पहले से छिपने के इंतजाम कर रखे हैं। सूत्रों के अनुसार घने जंगल का यह इलाका कई किलोमीटर तक फैला है। पहाड़ों की ढलान भी तीखी है, जिससे इसे खंगालना इतना आसान नहीं है।
इस इलाके में ग्रामीणों की आवाजाही भी नहीं है। ऐसे में आतंकियों का चमरेड़, पंगेई और भाटादूड़ियां तक आसानी से पहुंच जाना उनके कई ठिकानों की ओर इशारा करता है।
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