आप मंदिर से माता के दर्शन कर लौट रहे हों और रास्ते में पैंथर दिख जाए, तो यहां एेसी घटनाओं को काफी शुभ माना जाता है। माता के दर्शन करने आए भक्तों को और कुछ मॉर्निंग वॉकर्स को पैंथर को इतने करीब से देखने का मौका मिला कि सभी ने इस घटना को अपने लिए शुभ बताया।
ये है सफारी का बफर एरिया
2 of 5
jhalana leopard safari
- फोटो : Amar Ujala
पैंथर को सबसे पहले बीपीओकर्मी अभिषेक शर्मा ने देखा जो जयपुर के झालाना वन क्षेत्र स्थित चामुंडा माता के दर्शन करने के लिए गए थे। शर्मा ने बताया कि वो नियमित रूप से यहां आते हैं, मगर कभी उन्होनें यहां इतने करीब से लैपर्ड नहीं देखा था। हालांकि यहां स्थित चामुंडा माता के मंदिर के आसपास कई बार पैंथर फैमिली को देखा जा चुका है। कभी पैंथर ने यहां दर्शनार्थियों पर हमला नहीं किया वो बस यहां पानी पीकर निकल जाते हैं। ये पैंथर नीचे अठखेलियां करते-करते पेड़ पर चढ़ गया, तो लोग और भी रोमांचित हो गए। उन्होंने पेड़ पर चढ़ते हुए पैंथर के फोटो भी लिए।
जब पैंथर पेड़ पर चढ़ा, तो हो गए और रोमांचित
3 of 5
jhalana forest area
- फोटो : Amar Ujala
शर्मा ने बताया कि उन्होनें मंदिर के रास्ते में पैंथर को पेड़ पर चढ़ते-उतरते और नीचे अठखेलियां करते देखा। जब लोग ज्यादा इकट्ठे हो गए तो पैंथर ने जोरदार अंगड़ाई ली और जंगल के भीतर चला गया। पैंथर को देखते ही कुछ युवकों ने सीटियां बजाई जिन्हें सुनकर वो कुछ देर के लिए वहां रुका भी मगर बाद में लोगों के शोर को उसने नजरअंदाज कर दिया।
यहां आ गया था सड़कों पर
पिछले साल जयपुर और उसके आसपास के इलाकों में पैंथर के आने की काफी घटनाएं हुईं। ये घटना अब भी लोगों को याद है कि एक मादा पैंथर अपने बच्चों के साथ रिहायशी इलाके की तरफ आती देखी गई थी, जिसके बाद से ही यहां लोगों में आज भी भय का महौल व्याप्त है। झालाना के जंगलों से पैंथरों के बाहर निकलने की घटनाओं के बाद से अब यहां ऊंची-ऊंची बाउंड्री वॉल का निर्माण कराया जा रहा है। इनको पर्याप्त मात्रा में शिकार मिल सके इसके लिए यहां हिरण, नीलगाय और जंगली सुआरों को भी दूसरे जंगलों से लाकर छोड़ा जाएगा।
2200 रुपए में होती है सफारी
जयपुर के झालाना में स्थित लैपर्ड सफारी में 2200 रुपए में पैंथर दिखाने के लिए सफारी कराई जाती है, जबकि इस बात की कोई गारंटी नहीं होती कि पर्यटकों को पैंथर दिख ही जाए। हालांकि झालाना के जंगलों में इस वक्त पैंथरों की काफी तादाद हो चुकी है। शिकार और पानी की तलाश में ये शहर की ओर चले आते हैं।