कहते हैं कि पूत के पांव पालने में ही दिख जाते हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि पहचानने वाले की नजर पारखी होनी चाहिए। भारतीय महिला हॉकी टीम की कप्तान गोलकीपर सविता पूनिया आज किसी पहचान की मोहताज नहीं है। प्राइमरी शिक्षा के दौरान शिक्षक ने छठी कक्षा में ही सविता पूनिया की प्रतिभा को पहचान लिया। केवल इस हीरे को तराशने की जरूरत थी। हुआ भी ऐसा ही। मेहनत करवाई तो इसका सकारात्मक परिणाम आज सभी के सामने हैं। हरियाण के सिरसा जिले के गांव जोधकां की मूल निवासी भारतीय हॉकी टीम की खिलाड़ी सविता पूनिया को वर्ष 2018 में अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित किया जा चुका है। इतना ही नहीं अभी पिछले महीने सविता पूनिया को भीम अवॉर्ड के लिए चुना गया है। हालांकि सरकार की ओर से कार्यक्रम आयोजित कर भीम अवॉर्ड प्रदान किया जाना बाकी है।
संघर्ष: गांव में नहीं थी सुविधा तो सविता ने खेतों की मेढ़ पर दौड़कर बनाई फिटनेस, आज देश की हॉकी टीम की कप्तान
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा (हरियाणा)
Published by: भूपेंद्र सिंह
Updated Sun, 07 Aug 2022 06:31 PM IST
सार
सविता ने भारतीय महिला हॉकी टीम में गोलकीपर के तौर पर ओलंपिक में अपने प्रदर्शन से पूरे देश की शान बढ़ाई। अपने खेल से उसने कप्तान तक का सफर तय किया और सफर अभी जारी है, जानिए इनके संघर्ष की कहानी...
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