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Paris Olympics: रीतिका ने कभी खेल छोड़ने का बनाया था मन, अब पदक लाने की जिद, पढ़िए संघर्ष की कहानी

Thu, 25 Jul 2024 11:13 PM IST
भूपेंद्र सिंह श्वेता सिंह, अमर उजाला ब्यूरो, रोहतक (हरियाणा)
श्वेता सिंह, अमर उजाला ब्यूरो, रोहतक (हरियाणा) Published by: भूपेंद्र सिंह Updated Thu, 25 Jul 2024 11:13 PM IST
सार

रीतिका का ओलंपिक तक का सफर काफी रोचक व प्रेरणादायक रहा है। हरियाणा के रोहतक के गांव खरकड़ा की रीतिका ने खेल की शुरुआत हैंडबॉल से की थी

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Paris Olympics: Story of Wrestler Ritika Hooda of Rohtak Haryana
पहलवान रीतिका अपने परिवार के साथ। - फोटो : अमर उजाला

पहली बार हैवीवेट कैटेगरी (76 किलोग्राम) में ओलंपिक का कोटा दिलाने के बाद रोहतक के खरकड़ा गांव की बेटी रीतिका हुड्डा अब देश को पदक दिलाने की जिद लेकर दिन-रात मेहनत कर रही हैं। जहां अन्य खिलाड़ी कैंप में रहकर अभ्यास कर रहे हैं, वहीं रीतिका अभी रोहतक के छोटू राम स्टेडियम में अपने कोच मंदीप के पास ही अभ्यास कर रही हैं।



रीतिका का ओलंपिक तक का सफर काफी रोचक व प्रेरणादायक रहा है। हरियाणा के रोहतक के गांव खरकड़ा की रीतिका ने खेल की शुरुआत हैंडबॉल से की थी, लेकिन पिता जगबीर हुड्डा ने उनको एकल खेल में भाग लेने की सलाह दी और रीतिका ने पहलवानी को चुना। उन्होंने कुश्ती की शुरुआत 72 किलोग्राम भारवर्ग में की। उन्होंने दर्जनों मेडल इस वजन में जीते, लेकिन यह भारवर्ग ओलंपिक में न होने के कारण 76 किलोग्राम भारवर्ग में खेलना शुरू किया।
Paris Olympics: Story of Wrestler Ritika Hooda of Rohtak Haryana
पहलवान रीतिका - फोटो : संवाद
इसके बाद उन्होंने संघर्ष किया, कई प्रतियोगिताओं में उन्हें हार का सामना भी करना पड़ा। यहां से वह इस कदर निराश हो गई कि मैट को छोड़ने का ही मन बना लिया, लेकिन माता-पिता व कोच ने हौसला बढ़ाया तो रीतिका ने शानदार वापसी की और नए कीर्तिमान रचे। उन्होंने वर्ल्ड अंडर-23 चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीता। उसके बाद अब हैवीवेट कैटेगरी में क्वालीफाई करने वाली देश की पहली खिलाड़ी बन गई।
Paris Olympics: Story of Wrestler Ritika Hooda of Rohtak Haryana
रीतिका हुड्डा के घर पर लगा फोटो कॉलाज। - फोटो : अमर उजाला

रीतिका ने कहा कि उनकी ओलंपिक की तैयारी बहुत बढ़िया चल रही है, कोशिश रहेगी कि मैं अपना बेस्ट देकर मेडल के साथ ही आऊं। रीतिका ने ओलंपिक के लिए अपने प्रतिद्वंद्वी खिलाड़ियों के मैच देखे हैं। उन्होंने बताया कि जिन खिलाड़ियों का अटैक अच्छा है, उनके खिलाफ डिफेंस और जो खिलाड़ी डिफेंस करते हैं, उनके खिलाफ अटैकिंग को हथियार बनाया जाएगा। हर खिलाड़ी के हिसाब से गेम प्लान तैयार किया है। रीतिका हुड्डा ने बताया कि उनके लिए सीनियर खिलाड़ी प्रेरणादायक रहे हैं। उन्होंने कहा कि सुशील कुमार, योगेश्वर दत्त, साक्षी मलिक और अन्य वरिष्ठ खिलाड़ियों का खेल में संघर्ष उनको प्रेरणा देता है। रीतिका हुड्डा ने नए खिलाड़ियों के लिए संदेश दिया है कि कभी भी हार न मानें। हमेशा अभ्यास करते रहें और सफलता जरूर मिलेगी।

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रीतिका हुड्डा। - फोटो : अमर उजाला

शुरू में नहीं देखा था ओलंपिक में जाने का सपना
रीतिका हुड्डा ने कहा कि जब कुश्ती खेलनी शुरू की तो उन्होंने सोचा कि नेशनल और इंटरनेशनल मेडल आ जाएं। सभी कहते थे कि छोटे वजन में ही क्वालीफाई कर सकते हैं, लेकिन जैसे-जैसे टूर्नामेंट्स जीते तो फिर ओलंपिक में क्वालीफाई करने का सपना भी देखना शुरू किया और जब इस मुकाम को पाया तो यह सबसे यादगार पल रहा। उन्होंने कहा कि मैंने साबित कर दिखाया कि हैवीवेट कैटेगरी में भी क्वालीफाई किया जा सकता है और पदक भी लाया जा सकता है। अब इस वजन में पदक लाना चाहती हूं।

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रीतिका के घर की तस्वीरें। - फोटो : संवाद

मां हर प्रतियोगिता में गईं साथ, देखा उतार-चढ़ाव
रीतिका की मां नीलम हुड्डा ने बताया कि वह शुरुआत से ही उनके साथ खेलों में जा रही हैं। उन्होंने उनकी हार-जीत व हर उतार-चढ़ाव देखा है। शुरू में हारने पर हौसला टूटता था, लेकिन धीरे-धीरे समझ आ गया कि हार-जीत खेल का हिस्सा है। बस मेहनत पर ध्यान देना है।

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