बचपन में लड़कों के साथ क्रिकेट खेलकर लंबे शॉट लगाने का अभ्यास करने वाली शैफाली वर्मा किसी सेमीफाइनल में सीधे एंट्री मारकर भारत को विश्व चैंपियन बना देंगी, ऐसा किसी ने सोचा न था। लेकिन प्रतिका रावल के पांव में मोच आने के कारण जैसे ही शैफाली को मौका मिला तो न सिर्फ अपने दमखम को साबित किया बल्कि मां को भी दोहरा सरप्राइज दे दिया।
दरअसल, भारतीय क्रिकेट टीम में चयन न होने से शैफाली और उसका पूरा परिवार बेहद निराश था। किसी को राष्ट्रीय टीम में जल्द चयनित होने के आसार भी नहीं दिख रहे थे। लेकिन सीनियर टी-20 ट्रॉफी के लिए खेल रहीं शैफाली को अचानक फोन करके बताया गया कि उन्हें महिला विश्वकप के सेमीफाइनल में सीधे एंट्री दी जा रही है।
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शेफाली वर्मा
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शैफाली की छोटी बहन नैंसी बताती हैं कि टीम में चयन की सूचना मिलते ही दीदी ने सबसे पहले मम्मी (प्रवीण बाला) को फोन कर कहा कि मम्मी आपके लिए एक सरप्राइज है... अनुमान लगाओ। कुछ क्षण की चुप्पी के बाद मां बोलीं, टीम में नाम आ गया है क्या...। शैफाली के मुंह से ''हां'' सुनते ही मां भावुक हो गईं।
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शेफाली वर्मा
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शैफाली की झोली में भी कई रिकॉर्ड आए
इसके बाद इतिहास रच गया। शैफाली के बल्ले से न सिर्फ रन वर्षा हुई बल्कि महिला क्रिकेट और खुद शैफाली की झोली में भी कई रिकॉर्ड आ गए। वह दुनिया की सबसे कम उम्र की ऐसी पहली महिला क्रिकेटर बन गई हैं जिन्होंने वर्ल्ड कप में अर्धशतक या इससे ज्यादा रन बनाए हैं। इस मायने में वे वीरेंद्र सहवाग के रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ चुकी हैं।
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शेफाली वर्मा
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शतक लगाने से चूकने पर मां ने कहा कि बेटी के 87 रन ही हमारे लिए शतक के बराबर हैं। मुझे इसका कोई अफसोस नहीं कि वह विश्व कप में शतक बनाने से चूक गई। भारत की जीत से जो खुशी हासिल हुई है वह अनमोल है। उसने हमें चयन की सूचना के बाद जीत का भी दोहरा सरप्राइज दे दिया है।
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शेफाली प्लेयर ऑफ द फाइनल रहीं
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शैफाली की मौसी सुदेश बताती हैं कि शैफाली बचपन में लड़कों के साथ क्रिकेट खेला करती थी। इसमें भी वह बड़े शॉट लगाती। वह इसमें कभी नहीं हिचकिचाती थी। यही निडरता विश्व कप के फाइनल मुकाबले में भी दिखाई दी और बेधड़क बल्ला चलाते हुए शानदार गेंदबाजी भी की। वह बताती हैं कि विश्वकप जीतने के बाद परिवार ने शेफाली के साथ छोटी-सी वीडियो कॉल की थी। उस वक्त वह मैदान पर ही थी। खुशी से लबालब उसका चेहरा देखकर हम सब गद्गद् हो गए।