पहलवान और ओलंपिक पदक विजेता बजरंग पूनिया ने राजनीति में कदम रखते हुए कांग्रेस पार्टी का दामन थाम लिया है। शुक्रवार को उन्होंने कांग्रेस मुख्यालय में पार्टी नेताओं की मौजूदगी में कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की। इस घटनाक्रम ने हरियाणा की राजनीति में एक नई हलचल पैदा कर दी है।
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बजरंग पूनिया
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बजरंग पूनिया का खेल सफर
बजरंग पूनिया का नाम भारतीय कुश्ती में बेहद सम्मान से लिया जाता है। वे भारत के शीर्ष पहलवानों में से एक हैं, जिन्होंने ओलंपिक, विश्व कुश्ती चैंपियनशिप, एशियाई खेलों और कॉमनवेल्थ गेम्स में देश को कई पदक दिलाए हैं। बजरंग पूनिया ने 2020 के टोक्यो ओलंपिक में कांस्य पदक जीता था, जिसके बाद उनकी लोकप्रियता और बढ़ गई थी। उनकी खेल उपलब्धियों के लिए उन्हें राजीव गांधी खेल रत्न और पद्म श्री जैसे प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है।
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पहलवान बजरंग पूनिया
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राजनीति में आने के कारण
बजरंग पूनिया ने कांग्रेस में शामिल होने के बाद कहा कि वे देश के युवाओं, किसानों और खिलाड़ियों के मुद्दों को राजनीति के माध्यम से उठाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि खेल ने उन्हें बहुत कुछ दिया है और अब वे देश और समाज की सेवा राजनीति के जरिए करना चाहते हैं। कांग्रेस के नेतृत्व और विचारधारा से प्रभावित होकर उन्होंने इस पार्टी को चुना है।
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बजरंग पूनिया
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बजरंग पूनिया लंबे समय से सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर मुखर रहे हैं। हाल ही में पहलवानों द्वारा भारतीय कुश्ती महासंघ के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोपों को लेकर जो आंदोलन चला, उसमें बजरंग पूनिया ने अहम भूमिका निभाई थी। वे आंदोलन के दौरान किसानों और आम जनता के मुद्दों को भी जोर-शोर से उठाते रहे हैं, जिससे उनकी राजनीतिक सक्रियता बढ़ी है।
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विनेश फोगाट के साथ दीपेंद्र हुड्डा और बजरंग पूनिया मौजूद
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हरियाणा की राजनीति पर असर
बजरंग पूनिया का कांग्रेस में शामिल होना हरियाणा की राजनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वे हरियाणा के झज्जर जिले से ताल्लुक रखते हैं, जो कुश्ती के क्षेत्र में काफी प्रसिद्ध है। हरियाणा में खेल और राजनीति का गहरा संबंध रहा है, जहां खिलाड़ियों को हमेशा से राजनीतिक क्षेत्र में स्वागत मिला है। उनका प्रभाव न केवल हरियाणा बल्कि पूरे देश के खेल प्रेमियों और युवाओं के बीच है। कांग्रेस के लिए यह कदम भाजपा के सामने एक चुनौती साबित हो सकता है, खासकर हरियाणा में, जहां भाजपा और कांग्रेस के बीच मुकाबला कड़ा है।