पेरिस ओलंपिक में महज 100 ग्राम अधिक वजन होने से पदक जीतने से वंचित रहीं फौलादी बिटिया विनेश फोगाट के शनिवार रात 12:30 बजे दादरी पहुंचने पर लोगों ने सिर आंखों पर बैठा लिया। उनके आने से एक-दो घंटे पहले ही लोग सड़कों पर जमा हो गए थे, जैसे काफिला पहुंचा, खुली गाड़ी में सवार विनेश को देख, जयकारे लगने लगे। सम्मान समारोह में दिनभर रही व्यस्त दिनचर्या के कारण रात करीब डेढ़ बजे विनेश समारोह में बेहोश भी हो गईं। इस कारण उन्हें मंच पर ही लिटा दिया गया। विनेश की तबीयत खराब होने के कारण सम्मान समारोह पाैने दो बजे जल्दी खत्म कर दिया गया। विनेश ने कहा है कि उन्हें खुशी होगी कि उनके गांव की कोई बेटी उसका रिकॉर्ड तोड़े।
'म्हारी छोरी खरा सोना सै': फौलादी बिटिया विनेश को सिर आंखों पर बैठाया, पैतृक गांव में स्वागत के लिए उमडी भीड़
समसपुर बाईपास पर विनेश का काफिला रुका और लोगों ने फूलमालाओं से लाद दिया। इस दौरान महिलाओं ने कहा कि विनेश बेटा पदक हाथ से जरूर फिसल गया, लेकिन म्हारी बेटी खरा सोना है। हमें अफसोस नहीं है पदक का, बेटी ने पूरी दुनिया में नाम कर दिया यह बड़ी बात है। आज गोल्ड मेडल जीतण आलों की उतणी चर्चा न्ही हैं, जितणी म्हारी बिटिया की हो रही है।
किसी ने पहनाई पगड़ी तो किसी ने भेंट की गदा
विनेश की गाड़ी में पहलवान बजरंग पूनिया भी सवार रहे। दादरी जिले में पहुंचने पर विनेश को किसी ने पगड़ी तो किसी ने फूल-मालाएं पहनाकर स्वागत किया। इतना ही नहीं कुछ लोगों ने विनेश को गदा भेंट की। वहीं, लोगों ने विनेश व बजरंग पूनिया के साथ अपने बच्चों की फोटो खिंचवाई।
हर जगह मान-सम्मान
विनेश के काफिले ने झज्जर जिले की सीमा से रात करीब साढ़े 8 बजे दादरी जिले की सीमा में प्रवेश किया। सबसे पहले विनेश का इमलोटा गांव में स्वागत किया गया। वहां सतगामा खाप समेत विभिन्न ग्राम पंचायतों ने बिटिया को सम्मानित किया और उनका मनोबल बढ़ाया। इसके बाद विनेश के काफिले को मोरवाला गांव में रुकवाया गया। वहां भी लोगों ने बेटी को फूल-मालाओं से लाद दिया। इसके बाद लोहरवाड़ा गांव में लोगों ने विनेश का काफिला रुकवाया और आशीर्वाद दिया।
समसपुर गांव में विनेश का अभिनंदन
लोहरवाड़ा के बाद समसपुर गांव में विनेश का अभिनंदन किया गया। यहां विनेश करीब 40 मिनट तक रुकीं। करीब 10 बजे विनेश समसपुर बाईपास पर पहुंचीं और यहां उनका काफिला करीब 20 मिनट रुका रहा। इसके बाद रावलधी बाईपास पर ढाई किलोमीटर की दूरी में तीन जगह विनेश का स्वागत किया गया। लोगों ने पुष्प वर्षा की। इसके बाद विनेश चंपापुरी में रुकीं। यहां से चलने के बाद परशुराम चौक और फिर सरदार झाड़ू सिंह चौक पर पहुंची। यहां उन्हें दूध पिलाया गया। लोहारू चौक, घसौला, मंदौली, मंदौला व आदमपुर डाढी में स्वागत के बाद देर रात अपने पैतृक गांव बलाली पहुंचीं।