राजस्थान के भरतपुर जिले के गांव घाटमीका के जुनैद और नासीर हत्याकांड में भिवानी के मोनू राणा और गोगी को राजस्थान पुलिस ने पकड़ लिया है। दोनों ही राजस्थान पुलिस के दस-दस हजार के ईनामी उद्घोषित आरोपी थे। पुलिस की प्रारंभिक पूछताछ में दोनों ने हत्याकांड की वारदात को कबूला है।
जुनैद-नासीर हत्याकांड: पकड़े गए हत्यारोपी, गाड़ी में जलाने से पहले कैसे की थी हत्या, पुलिस के सामने खोले राज
इसके अलावा गोगी के खिलाफ भी लड़ाई झगड़े से मामले जुड़े हैं। फिलहाल उसके खिलाफ किसी थाने में केस दर्ज की पुष्टि नहीं हुई है। मोनू राणा और गोगी दोनों ही भिवानी में गो रक्षा दल की टीम के साथ काफी अर्से से जुड़े थे, मगर वारदात से छह माह पहले ही वे यहां की टीम से दूरी बनाकर मानेसर और गुरुग्राम क्षेत्र में सक्रिय थे। दोनों ही गो रक्षक की भूमिका में आक्रामक गतिविधियों से जुड़े रहे हैं। यही वजह थी कि उन्हें यहां से टीम को छोडऩा पड़ा था।
भरतपुर जिले के घाटमीका गांव निवासी नासीर और जुनैद के अपहरण की शिकायत 15 फरवरी को गोपालगढ़ पुलिस थाना में परिजनों ने दी थी। जिसके बाद 16 फरवरी की सुबह लोहारू के गांव बारवास की बणी में जली हुई बुलेरो गाड़ी के अंदर पुलिस को दो कंकाल बरामद हुए थे।
गाड़ी के चेसिस नंबर से ही दोनों शवों की पहचान नासीर और जुनैद के रूप में हुई थी। जिसके बाद दोनों के अपहरण, मारपीट और शवों को जलाने में हत्याकांड का खुलासा हुआ और आठ नामजदों की भूमिका भी उजागर हुई थी। इसी में दो मुख्य आरोपी मोनू राणा और गोगी भिवानी जिले से हैं। जिन्हें अब राजस्थान की भरतपुर पुलिस 10 दिन के रिमांड पर लेकर पूछताछ में जुटी है।
हत्याकांड का सीन रिक्रियेट करने के लिए राजस्थान पुलिस ला सकती है भिवानी
राजस्थान पुलिस हत्याकांड में शामिल दोनों मुख्य आरोपियों को सीन रिक्रियेट करने के लिए गांव बारवास की बणी में लाकर वारदात स्थल का फिर से मुआयना कर सकती है। हालांकि अभी तक लोहारू पुलिस के पास इसकी कोई जानकारी नहीं है। मगर हत्या से जुड़े कई अनसुलझे सवालों को सुलझाने के लिए पुलिस ऐसा कर सकती है। क्योंकि नासीर की हत्या यहां लाने के बाद ही की गई थी। हालांकि हत्याकांड में अभी तक किसी हथियार इस्तेमाल की बात सामने नहीं आई है। क्योंकि दोनों की पिटाई लाठी और लोहे के सरियों से की गई थी।
वारदात के बाद से ही नहीं हुआ परिजनों व रिश्तेदारों से कोई संपर्क
वारदात के बाद से ही मोनू राणा और गोगी का भिवानी में अपने परिजनों व रिश्तेदारों से कोई संपर्क नहीं हुआ। हालांकि दो माह तक वे लगातार अपना ठिकाना बदलते रहे और पांच राज्यों में उनकी सक्रियता इस दौरान बनी रही। जिनमें दिल्ली एनसीआर, यूपी, बिहार, झारखंड, उड़ीसा तक राजस्थान की पुलिस आरोपियों की तलाश में पहुंची। दोनों को झारखंड के देहरादुन सुनसान पहाड़ी इलाके से काबू किया। इस दौरान इन दोनों ने किन-किन लोगों के यहां शरण ली और किन-किन से मदद मांगी उसकी भूमिका को भी राजस्थान पुलिस खंगालने में जुटी है।