पंजाब की सियासत के मजबूत स्तंभ रहे पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल का हरियाणा की राजनीति में भी पूरा दख्रल रहा है। इनेलो अकाली गठबंधन के चलते हरियाणा में अकाली दल की पूरा दखल रहता रहा है। कई सूबे की कई सीटों पर इनेलो ने अकालियों के साथ मिलकर चुनाव लड़ा और सरकार बनाई है।
पूर्व उप प्रधानमंत्री देवीलाल के समय से शुरू हुआ यह रिश्ता ओम प्रकाश चौटाला ने बखूबी चलाया। हरियाणा में होने वाली इनेलो की सभी रैलियों में प्रकाश सिंह बादल मंच पर नजर आते थे। यही नहीं मंच से एक बार तो इनेलो ने यह भी ऐलान किया कि उनकी पार्टी के संदर्भ मेंं प्रकाश सिंह बादल फैसला लेंगे।
पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला के जेल जाने के बाद बादल साहब ने चौटाला परिवार का पूरा ध्यान रखा और बड़े बुजुर्ग की तरह परिवार के सभी सदस्यों ने उन्हें मान सम्मान दिया। यह बात अलग है कि एसवाईएल के मुददे पर इनेलो और अकाली दल का गठबंधन हरियाणा विधानसभा में टूट गया है। गठबंधन तोडऩा इनेलो की यह एक राजनीतिक मजबूरी थी, क्योंकि एसवाईएल का मुददा हरियाणा के हितों से जुड़ा हुआ था। अन्यथा कोई राजनतिक मुददा आज तक दोनों परिवारों को अलग नहीं कर सका।
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प्रकाश बादल
- फोटो : अमर उजाला
संकट की घड़ी में सहारे की तरह खड़े नजर आए बादल
जिस समय जेबीटी भर्ती में पूर्व सीएम ओम प्रकाश चौटाला और डा. अजय चौटाला को सजा हुई। उस समय बादल परिवार इनेलो के साथ खड़ा नजर आया। प्रकाश सिंह बादल ने परिवार के मुखिया के तौर पर चौटाला परिवार का साथ दिया। यहां तक कि कुरुक्षेत्र रैली में उस समय इनेलो महासचिव अभय सिंह चौटाला ने यहां तक कहा कि बादल साहब हमारे परिवार के मुखिया है जो निर्णय वे लेंगे हमे मंजूर होगा।
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Parkash singh badal & Sukhbir singh badal
- फोटो : File Photo
चौटाला परिवार टूटने से बचाने का किया था प्रयास
जिस समय इनेलो से अलग होकर जजपा बनी। हरियाणा में देवीलाल परिवार के लिए यह संकट का समय था, लेकिन संकट के इस समय में प्रकाश सिंह बादल ने परिवार को एक रखने का भरसक प्रयत्न किया। उन्होंने अभय चौटाला और दुष्यंत चौटाला दोनों को समझाया कि परिवार में मन मुटाव होते रहते हैं, लेकिन परिवार का एक रहना जरूरी है। परिवार अलग हो गया वह बात अलग है लेकिन बादल ने अपने प्रयास में कोई कमी नहीं छोड़ी।
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प्रकाश सिंह बादल और दुष्यंत चौटाला।
- फोटो : @Dushyant Chautala
मुझे आज भी याद हैं उनके किस्से दुष्यंत
बादल साहब को जितना करीब से देखा है वह सब कुछ मुझे याद है। मुझे याद है कि वे बड़े चौधरी साहब के समय में प्रत्येक दीपावली से एक दिन पहले फार्म हाउस पर अपनी पत्नी के साथ वे आते थे और परिवार के हाल-चाल जानते थे। मैं जब सांसद का चुनाव लड़ा तो मेरी पहली रैली में उन्होंने आर्शीवाद दिया। मेरे शपथ ग्रहण समारोह में पहुंचे।