15 फरवरी 1994 को ही गोरक्षपीठ के महंत अवैद्यनाथ ने योगी आदित्यनाथ को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया था। शहर के गोलघर के पास बने छात्रावास में गोरखनाथ मंदिर की शिक्षा शाखा, महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद द्वारा संचालित विभिन्न विद्यालयों के करीब 250 छात्र रहते थे। 1976 में यह छात्रावास स्थापित हुआ था।
2 of 5
सीएम योगी आदित्यनाथ। (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
समस्या तब शुरू हुई जब छात्रावास के छात्र कपड़ा खरीदने गए और वहां दुकानदार से दाम को लेकर मोलभाव बहस में बदलने लगी। दुकान के मालिक प्रमोद टेकरीवाल, जो प्रमुख व्यवसायी होने के साथ ही अंशकालिक नेता भी थे, उन्होंने नाराज छात्रों को सबक सिखाने के लिए अपनी ताकत दिखाने का फैसला किया। वह दुकान से बाहर आए और हवा में दो गोलियां चला दीं। इससे हंगामा हो गया और वहां पुलिस पहुंच गई।
3 of 5
सीएम योगी आदित्यनाथ।(फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
उस समय प्रदेश में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी की गठबंधन सरकार थी। कांग्रेस भी अप्रत्यक्ष रूप से सरकार में शामिल थी। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस में ही पैठ होने के कारण टेकरीवाल की शहर में अच्छी-खासी धौंस थी। उन्होंने पुलिस पर त्वरित कार्रवाई का दबाव बनाया। यह गोरक्षपीठ की सत्ता को सीधे चुनौती थी। युवा योगी के दिमाग में कुछ और ही चल रहा था। मठ के आधिपत्य की इस प्रकार उपेक्षा नहीं की जा सकती थी। एक नजीर तय की जानी थी।
4 of 5
सीएम योगी आदित्यनाथ।(फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला।
योगी ने फोन उठाया और एसएसपी केके सक्सेना को फोन मिला दिया। उन्होंने एसएसपी को फोन कर मामले की सही तरीके से जांच करने का आदेश दिया। मंदिर के बाहर यह उनका पहला संवाद था। बताया जाता है कि योगी आदित्यनाथ जिस अंदाज में एसएसपी से बात की थी, उनके चेहरे का रंग उड़ गया था। इसी बीच युवा उत्तराधिकारी के द्वारा पुलिस प्रमुख को चेतावनी की खबर शहर में जंगल की आग की तरह फैल चुकी थी।
5 of 5
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (फाइल फोटो)
- फोटो : पीटीआई
गोरखपुर के युवाओं को, जिन्होंने वास्तविक नायक के अभाव में माफियाओं और बाहुबलियों को अपना आदर्श मानना शुरू कर दिया था उनको एक नया नायक मिल गया था। दूसरी ओर पुराने लोगों ने कहना शुरू कर दिया- 'महंत दिग्विजयनाथ ने दोबारा जन्म लिया है।'
साभार- यह कहानी योगी आदित्यनाथ की जीवन यात्रा पर लिखी किताब योद्धा योगी से लिया गया है, इसे प्रवीण कुमार ने लिखा है।