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Exclusive: यूपी में निषाद मतदाताओं के सहारे चुनावी वैतरणी पार करने की ताक में भाजपा, माना जा रहा मास्टर स्ट्रोक
Sat, 25 Sep 2021 04:18 PM IST
vivek shukla
संतोष सिंह, गोरखपुर।
संतोष सिंह, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Sat, 25 Sep 2021 04:18 PM IST
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संजय निषाद।
- फोटो : अमर उजाला।
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आगामी विधानसभा चुनाव से पहले निषाद पार्टी से समझौता करके भाजपा ने मास्टर स्ट्रोक खेला है। पार्टी नेताओं को पता है कि निषाद मतदाता गोरखपुर, बस्ती, आजमगढ़, वाराणसी, अयोध्या और प्रयागराज मंडल से जुड़े जिलों की 160 विधानसभा सीटों पर प्रभावी भूमिका में हैं। वे किसी भी दल के हार-जीत में अहम भूमिका निभाते हैं। भाजपा और निषाद पार्टी की दोस्ती पिछले (2019) लोकसभा चुनाव से हुई थी। अब इसे भाजपा यूपी के चुनाव प्रभारी व केंद्रीय शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आगे बढ़ाया है। लखनऊ में एलान किया है कि निषाद पार्टी के साथ मिलकर आगामी विधानसभा चुनाव लड़ेंगे। दरअसल, डॉ संजय निषाद की अपने समाज में अच्छी पैठ है। वह समाज के मुद्दों को लेकर लगातार संघर्ष कर रहे हैं। निषाद मतदाता तमाम सीटों पर जीत-हार का समीकरण बनाते हैं।
फाइल फोटो।
- फोटो : अमर उजाला।
निषाद पार्टी के प्रदेश प्रभारी सरवन निषाद ने बताया कि 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा का साथ दिया था। इसका बड़ा फायदा मिला था। आगामी विधानसभा चुनाव में भी दोनों दलों को लाभ मिलेगा।
नौ विधानसभा क्षेत्रों में करीब पांच लाख निषाद मतदाता
गोरखपुर में विधानसभा की नौ सीटें हैं। इसमें से आठ सीट भाजपा के पास है। चिल्लूपार विधानसभा क्षेत्र से बसपा के विनय शंकर तिवारी को जीत मिली थी। निषाद पार्टी के पास जो जानकारी उपलब्ध है, उसके मुताबिक गोरखपुर के नौ विधानसभा क्षेत्रों में ही करीब पांच लाख से ज्यादा निषाद मतदाता हैं। सबसे ज्यादा निषाद मतदाता गोरखपुर ग्रामीण, कैंपियरगंज और चौरीचौरा विधानसभा क्षेत्र से हैं। चिल्लूपार, गोरखपुर शहर, सहजनवां, खजनी और पिपराइच में भी अच्छी तादाद में निषाद मतदाता हैं।
नौ विधानसभा क्षेत्रों में करीब पांच लाख निषाद मतदाता
गोरखपुर में विधानसभा की नौ सीटें हैं। इसमें से आठ सीट भाजपा के पास है। चिल्लूपार विधानसभा क्षेत्र से बसपा के विनय शंकर तिवारी को जीत मिली थी। निषाद पार्टी के पास जो जानकारी उपलब्ध है, उसके मुताबिक गोरखपुर के नौ विधानसभा क्षेत्रों में ही करीब पांच लाख से ज्यादा निषाद मतदाता हैं। सबसे ज्यादा निषाद मतदाता गोरखपुर ग्रामीण, कैंपियरगंज और चौरीचौरा विधानसभा क्षेत्र से हैं। चिल्लूपार, गोरखपुर शहर, सहजनवां, खजनी और पिपराइच में भी अच्छी तादाद में निषाद मतदाता हैं।
प्रतीकात्मक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला।
रुद्रपुर विधानसभा क्षेत्र में हैं एक लाख मतदाता
देवरिया विधानसभा की सात सीटें हैं। रुद्रपुर विधानसभा सीट निषाद बहुल मानी जाती है। यहां करीब एक लाख निषाद मतदाता हैं। इसी का नतीजा है कि इस सीट से भाजपा के जय प्रकाश निषाद को प्रतिनिधित्व मिला है। वह योगी सरकार में राज्यमंत्री भी हैं। देवरिया सदर विधानसभा क्षेत्र में भी करीब 25 हजार मतदाता हैं।
देवरिया विधानसभा की सात सीटें हैं। रुद्रपुर विधानसभा सीट निषाद बहुल मानी जाती है। यहां करीब एक लाख निषाद मतदाता हैं। इसी का नतीजा है कि इस सीट से भाजपा के जय प्रकाश निषाद को प्रतिनिधित्व मिला है। वह योगी सरकार में राज्यमंत्री भी हैं। देवरिया सदर विधानसभा क्षेत्र में भी करीब 25 हजार मतदाता हैं।
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प्रतीकात्मक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला
हर जिले में निषाद मतदाताओं का प्रभाव
संतकबीरनगर में विधानसभा की तीन सीटें हैं। मेंहदावल विधानसभा क्षेत्र को निषाद बहुल माना जाता है। इस क्षेत्र में करीब 80 हजार निषाद मतदाता हैं। इसी तरह सिद्धार्थनगर विधानसभा की पांच सीटें हैं। बांसी विधानसभा क्षेत्र में निषाद मतदाता अधिक हैं। राजनीतिक दलों के मुताबिक इस क्षेत्र में 25 हजार मतदाता हैं। महराजगंज में पांच विधानसभा सीटें हैं। पनियरा विधानसभा क्षेत्र निषाद बहुल है। वहां करीब 60 हजार मतदाता हैं। कुशीनगर में सात विधानसभा सीटें हैं। खड्डा विधानसभा क्षेत्र में लगभग 28 हजार, तमकुहीराज में 27 हजार, फाजिलनगर विधानसभा क्षेत्र में 17 हजार, हाटा में 14 हजार और रामकोला विधानसभा क्षेत्र में 18 हजार निषाद मतदाता हैं। बस्ती में पांच विधानसभा सीटें हैं। महादेवा और कप्तानगंज विधानसभा क्षेत्रों में क्रमश: करीब 20-25 हजार निषाद मतदाता हैं।
संतकबीरनगर में विधानसभा की तीन सीटें हैं। मेंहदावल विधानसभा क्षेत्र को निषाद बहुल माना जाता है। इस क्षेत्र में करीब 80 हजार निषाद मतदाता हैं। इसी तरह सिद्धार्थनगर विधानसभा की पांच सीटें हैं। बांसी विधानसभा क्षेत्र में निषाद मतदाता अधिक हैं। राजनीतिक दलों के मुताबिक इस क्षेत्र में 25 हजार मतदाता हैं। महराजगंज में पांच विधानसभा सीटें हैं। पनियरा विधानसभा क्षेत्र निषाद बहुल है। वहां करीब 60 हजार मतदाता हैं। कुशीनगर में सात विधानसभा सीटें हैं। खड्डा विधानसभा क्षेत्र में लगभग 28 हजार, तमकुहीराज में 27 हजार, फाजिलनगर विधानसभा क्षेत्र में 17 हजार, हाटा में 14 हजार और रामकोला विधानसभा क्षेत्र में 18 हजार निषाद मतदाता हैं। बस्ती में पांच विधानसभा सीटें हैं। महादेवा और कप्तानगंज विधानसभा क्षेत्रों में क्रमश: करीब 20-25 हजार निषाद मतदाता हैं।
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प्रवीण निषाद।
- फोटो : अमर उजाला।
शहर लोकसभा क्षेत्र के उपचुनाव में लगा था भाजपा को झटका
2018 में गोरखपुर शहर लोकसभा क्षेत्र के उपचुनाव में भाजपा को तगड़ा झटका लगा था। जो सीट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने छोड़ी थी, वह सपा के खाते में चली गई थी। तब सपा ने निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संजय निषाद के बड़े बेटे प्रवीण निषाद ने चुनाव जीता था। हालांकि, 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले सपा और निषाद पार्टी के बीच मनमुटाव हो गया। लिहाजा, भाजपा ने निषाद पार्टी को सहयोगी दल बना लिया। उपचुनाव जीतने वाले प्रवीण निषाद को भाजपा ने संतकबीनगर से अपना उम्मीदवार बना दिया। प्रवीण चुनाव जीतकर संसद पहुंच गए।
2018 में गोरखपुर शहर लोकसभा क्षेत्र के उपचुनाव में भाजपा को तगड़ा झटका लगा था। जो सीट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने छोड़ी थी, वह सपा के खाते में चली गई थी। तब सपा ने निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संजय निषाद के बड़े बेटे प्रवीण निषाद ने चुनाव जीता था। हालांकि, 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले सपा और निषाद पार्टी के बीच मनमुटाव हो गया। लिहाजा, भाजपा ने निषाद पार्टी को सहयोगी दल बना लिया। उपचुनाव जीतने वाले प्रवीण निषाद को भाजपा ने संतकबीनगर से अपना उम्मीदवार बना दिया। प्रवीण चुनाव जीतकर संसद पहुंच गए।