गोरखपुर में त्रिस्तरीय पंचायत उपचुनाव में सरदारनगर विकास खंड के ग्राम पंचायत बरईपार से निर्विरोध प्रधान चुनी गई 21 साल की कंचन यादव को पंचायत का बहुत अनुभव नहीं है। मगर उनका जज्बा बड़ा है। अपनी पंचायत को मॉडल गांव बनाकर मां के सपने को पूरा करने की चाह रखने वाली कंचन कहती हैं कि वह पढ़ाई के साथ ही पंचायत की कार्यप्रणाली भी सीखेंगी। साथ ही अपने पिता व गांव के बुजुर्गों- युवाओं के सलाह के बूते गांव को विकास की राह पर आगे ले जाएंगी।
तस्वीरें: शपथ से पहले प्रधान मां की हो गई मौत, अब 21 साल की बेटी चलाएगी गांव की सरकार
दो मई 2021 को हुई मतगणना में वह विजयी घोषित हुई। घर-परिवार और नजदीकी खुशी मना रहे थे। प्रधान बनने के बाद कौन-कौन से काम से गांव के विकास का सिलसिला शुरू करना है इस पर मंथन चल रहा था। मगर होनी को कुछ और ही मंजूर था। अचानक गीता की तबियत खराब हुई और इलाज के दौरान गत सात मई को ही उनकी मौत हो गई।
कंचन की दो बहनों की शादी हो चुकी है लिहाजा अब बड़ी बेटी होने की वजह से पिता अछैवर ने उसे चुनाव लड़ाने का मन बनाया जिसे गांव वालों का भी समर्थन मिला।
गीता के निधन के बाद गांव में सहानुभूति की ऐसी लहर दौड़ी कि कंचन के आगे किसी ने पर्चा दाखिल कर प्रतिद्वंदी कहलाना उचित नहीं समझा। नतीजतन गीता निर्विरोध प्रधान चुनी गईं।
ये है कंचन की प्राथमिकता
कंचन का कहना है कि गांव की मुख्य समस्या अधूरा पड़ा आंगनबाड़ी केंद्र, शौचालय, पानी की टंकी और शुद्ध पानी की सप्लाई है। वह इसे दुरुस्त कराने के साथ ही सभी इंडिया मार्का हैंडपंप का पहले रिबोर कराएंगी। साथ ही पोखरे का सुंदरीकरण भी उनकी प्राथमिकता में है। इसके बाद गांव की सभी सड़कों-नालियों की मरम्मत और निर्माण के साथ गांव के विकास का सिलसिला आगे बढ़ाएंगी।