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तस्वीरें: मगरमच्छों के घर के नाम से प्रसिद्ध है ये ताल, देश-विदेश से घूमने आते हैं लोग

Tue, 08 Jun 2021 05:51 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, महराजगंज।
अमर उजाला नेटवर्क, महराजगंज। Published by: vivek shukla Updated Tue, 08 Jun 2021 05:51 PM IST
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Darjiniya Taal special story Crocodile house in indo nepal border
दर्जिनिया ताल। (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला।

नेपाल राष्ट्र के हिमालय पर्वत की चोटियों से निकली नारायणी नदी के तट एवं सोहगीबरवा वन्य जीव प्रभाग अंतर्गत निचलौल रेंज के मनोरम वादियों के बीच स्थित दर्जिनिया ताल तेजी से विकसित हो रहा है। मनोरम वादियों के बीच बने दर्जिनिया ताल में मगरमच्छों को देखने के लिए नेपाल राष्ट्र व बिहार राज्य सहित दूर दराज के अन्य जिले से पर्यटक आते हैं। हालांकि अभी कोरोना काल में यहां पर्यटकों की संख्या ना के बराबर है। दर्जिनिया के निकट नारायणी नदी का तट भी है। जहां पर पर्यटक घड़ियालों का भी नजारा लेकर लुफ्त उठाते हैं। इसके अलावा वन विभाग की तरफ से दर्जिनिया पर मगरमच्छों को निकट से देखने के लिए एक वाच टॉवर व दूरबीन की व्यवस्था की है। यहां पर फूल पत्तियों व फलों के दर्जनों पौधे लगाए गए हैं।



महराजगंज जिला मुख्यालय से करीब 45 किलोमीटर दूर इंडो नेपाल बॉर्डर से सटे नारायणी नदी के किनारे मुसहर बस्ती गेड़हवा के पास स्थित दर्जिनिया ताल के मगरमच्छ तथा नारायणी नदी के घड़ियाल पर्यटकों के आर्कषण का केंद्र बना है। ताल में निर्मित टीलों पर अपने बच्चों के साथ खेलते व झुंडों में दहाड़ मारते मगरमच्छ लुभावने लगते है। जब मगरमच्छ अपने शिकार के लिए टीलों से पानी मे छलांग लगाते है, तो नजारा देखते ही बनता है। आगे की स्लाइड्स में देखें तस्वीरें...




 

Darjiniya Taal special story Crocodile house in indo nepal border
दर्जिनिया ताल। (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला।

वही निकट में नारायणी नदी है। जिसमें वन विभाग ने घड़ियालों के संरक्षण के लिए बीते वर्ष लखनऊ कुकरैल प्रजनन केंद्र से 42 मादा, 13 नर सहित 55 घड़ियालों को लाकर छोड़ा है। यहां की अनुकूल पर्यावरण और प्रवास क्षेत्र के कारण घड़ियालों को नारायणी में छोड़ा गया है। जो नदी के तट पर दिखाई देते है।

 

Darjiniya Taal special story Crocodile house in indo nepal border
दर्जिनिया ताल। (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला।

डीएफओ पुष्प कुमार कंधला ने बताया कि दर्जिनिया ताल करीब पांच हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैला हुआ है। मनोरम वादियों के कारण यहां मगरमच्छों के लिए अनुकूल आबोहवा है। प्रत्येक वर्ष इनकी संख्या बढ़ती जा रही है। पिछले वर्ष हुई गणना में इनकी संख्या साढ़े तीन सौ थी। जो कि इस वर्ष इनकी संख्या बढ़कर करीब साढ़े चार सौ के पास पहुंच गई है। बीते एक वर्ष में करीब 70 हजार पर्यटकों ने मनोरम वादियों के बीच स्थित दर्जिनिया ताल पर पहुंचकर मगरमच्छों को देखकर लुप्त लिया है। कोरोना के बढ़ते प्रभाव के कारण लोगों का आना-जाना कम हो गया है।


 

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दर्जिनिया ताल। (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला।
दर्जिनिया में पूर्वांचल का बनेगा पहला बटरफ्लाई
पर्यटकों की संख्या को देख शासन द्वारा दर्जिनिया में 80 लाख की लागत से करीब 50 डिसमिल जमीन पर पूर्वांचल का पहला बटरफ्लाई पार्क बनेगा। जिसके किनारे तकरीबन 70 मीटर इंटरलॉकिंग सड़क होगी। जहां पर्यटक आराम से टहल कर सैकड़ों प्रजाति के रंग बिरंगी तितलियों को भी देख कर लुप्त उठा सकेंगे। वहीं पार्क में एंट्री गेट, ओक ट्री सहित अनेक प्रजाति के प्लांट लगाए जाएंगे।

 
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दर्जिनिया ताल। (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला।

दर्जनिया ताल घूमने और मगरमच्छों को आसानी से घंटों तक देखने के लिए नवंबर से मार्च का महीना सबसे बेहतर माना जाता है। ठंड के दौरान मगरमच्छ ज्यादातर समय रेस्टिंग आइलैंड पर बिताते हैं। मगरमच्छों  की अठखेलियां करते हुए देखा जा सकता है।

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