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यहां आठ महीने में बदल गए इलाज के तौर-तरीके, विशेषज्ञों ने कहा- 'कोरोना ने सब बदल दिया'

Thu, 10 Dec 2020 03:18 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Thu, 10 Dec 2020 03:18 PM IST
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Treatment modalities changed in eight months due to corona
कोरोना वायरस। - फोटो : रवि बत्रा

गोरखपुर में पिछले आठ महीने में अस्पतालों में बढ़े संसाधन और इलाज की तकनीक में हुए बदलाव की वजह से कोरोना काबू में आ चुका है। यही वजह है कि ज्यादा मरीज ठीक होकर अस्पताल से घर लौट चुके हैं। बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉक्टर गणेश कुमार और सीएमओ डॉ. श्रीकांत तिवारी ने इस संबंध में अहम जानकारियां दीं।


 

Treatment modalities changed in eight months due to corona
कोरोना वायरस। - फोटो : पेक्सेल्स

बताया कि इलाज में हुए बदलाव की वजह से वायरस को मात देने में काफी हद तक कामयाबी मिली है। यह बदलाव एक नई सीख दे गया है। महामारी में लोग पहले डरे हुए थे, लेकिन अब यह डर लोगों के बीच से समाप्त हो रहा है। वैक्सीन आने के बाद और भी सकारात्मक बदलाव होंगे।

 

Treatment modalities changed in eight months due to corona
कोरोना वायरस। - फोटो : अमर उजाला।

ऑक्सीजन देने का तरीका भी बदल गया   
कोरोना संक्रमण की चपेट में आने पर मरीजों की सांस फूलने पर ऑक्सीजन देने की स्थिति स्पष्ट होने से पूर्व हालत बिगड़ जाती थी। लेकिन, अब बिना वेंटिलेटर के भी ऑक्सीजन देने की सुविधा मिल गई है। हाईफ्लो ऑक्सीजन फेफड़ों को राहत दे रही है। चिकित्सकों की अलग-अलग टीमें इस पर काम रही हैं। इन्हें ऑक्सीजन देने की मात्रा और तरीके के बारे में भी जानकारी दी जा रही है।

 

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Treatment modalities changed in eight months due to corona
कोरोना वायरस। - फोटो : अमर उजाला।

हाई फ्लो ऑक्सीजन मशीन बीआरडी मेडिकल कॉलेज के कोविड वार्ड से लेकर 100 बेड के टीबी अस्पताल, रेलवे अस्पताल सहित कोविड मरीजों का इलाज करने वाले निजी अस्पतालों में भी लगाई गईं हैं। इतना ही नहीं बीआरडी में वेंटिलेटर भी बढ़ गए हैं। इसके अलावा पुराने प्रोन वेंटिलेशन (पेट के बल लिटाकर ऑक्सीजन देना) के जरिए भी मरीजों को फिर से ऑक्सीजन देने की शुरुआत की गई है।

 

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Treatment modalities changed in eight months due to corona
कोरोना वायरस। (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : PTI

दवा पुरानी, इस्तेमाल पर मिले परिणाम बेहतर
जिले में कोरोना का पहला मरीज 26 अप्रैल को मिला था, लेकिन तब डॉक्टरों के हाथ दवा से खाली थे।जैसे-जैसे मरीज बढ़ते गए, वैसे-वैसे नई तकनीक का इस्तेमाल कर कुछ पुरानी दवाओं पर शोध करके मरीजों को दिया गया। जिसका परिणाम बेहतर मिला। इन दवाओं में बीसीजी का टीका, रेमडेसिविर इंजेक्शन, आइवरमेक्टिन, प्लाज्मा थेरेपी, टॉसलीजुमैब शामिल रहा। यह दवाएं पुरानी थीं, लेकिन इनमें कुछ बदलाव करके बाकायदा डोज तय किए गए। इसके रिस्पांस भी बेहतर मिले हैं। मौजूदा समय में प्लाज्मा थेरेपी मरीजों को दी भी जा रही है।

 

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