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विशेष बातचीत: पढ़िए ऑल टाइम टॉपर बिटिया की कहानी, बोली- 'आर्थिक स्थिति से पढ़ाई का लेना-देना नहीं'

Fri, 08 Oct 2021 03:41 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Fri, 08 Oct 2021 03:41 PM IST
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Success story of Ritika Dubey all time topper in Gorakhpur
ऑल टाइम टॉपर रितिका दुबे - फोटो : अमर उजाला।
गोरखपुर के सहजनवां के सामान्य किसान की बेटी रितिका दुबे ने सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजूकेशन (सीबीएसई) की अंक सुधार परीक्षा में 99.4 फीसदी अंक हासिल किए हैं। उनको जानने वाले कहते हैं कि इसमें कोई हैरत नहीं, वह ऑल टाइम टॉपर हैं। वह इंडियन एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस (आईएएस) और नेशनल डिफेंस एकेडमी (एनडीए) की प्रतियोगी परीक्षा में सफल होना चाहती हैं। इसकी तैयारी में अभी से वे जुटी हैं।


रितिका ने कक्षा छह से बारहवीं तक की पढ़ाई छात्रवृत्ति की मदद से पूरी की है। स्नातक में भी छात्रवृत्ति मिल गई है। यानी कक्षा छह से स्नातक तक की पढ़ाई पर रितिका के एक रुपये खर्च नहीं होंगे। रितिका ठसक से कहती हैं कि आर्थिक स्थिति अच्छी हो या खराब, इससे पढ़ाई का कोई लेना-देना नहीं होता है। मेहनत और लगन से किसी भी कठिन लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। इसकी जीता-जागता उदाहरण आपके सामने है। आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं थी, लेकिन छात्रवृत्ति ने सबकुछ आसान बना दिया। पेश है ऑल टाइम टॉपर रितिका से बातचीत के अंश...
Success story of Ritika Dubey all time topper in Gorakhpur
ऑल टाइम टॉपर रितिका दुबे - फोटो : अमर उजाला।
सवाल: पढ़ाई को घंटे में बांधना कहां तक ठीक है। क्या आप भी ऐसा करती हैं?
जवाब:
बिल्कुल नहीं। पढ़ाई को घंटे में बांधने से कोई फायदा नहीं होता है। जितना देर अच्छा महसूस करें, उतना ही पढ़ना चाहिए। कक्षा की पढ़ाई बहुत जरूरी होती है। घर पर रिवीजन करना चाहिए। हम तो घर पर रोज तीन घंटे ही पढ़ते हैं। दो घंटे खेलने के अलावा जिम भी करते हैं।

सवाल: हर विद्यार्थी दिल्ली यूनिवर्सिटी या उससे संबद्ध कॉलेजों से पढ़ना चाहता है, लेकिन आपने ऐसा नहीं किया, कोई खास वजह है?
जवाब:
देखिए, सबकी सोच अलग-अलग होती है। हैदराबाद की क्रिया यूनिवर्सिटी में दाखिला लिया है। बीए ऑनर्स की पढ़ाई करनी है। राजनीति विज्ञान, अर्थशास्त्र और अंग्रेजी विषय लिया है। तीन वर्ष तक लिबरल आर्ट्स की पढ़ाई होगी फिर एक वर्ष का डिप्लोमा करना है। हैदराबाद की इस यूनिवर्सिटी में ज्यादातर विद्यार्थी बिजनेस क्लास से आते हैं। दुबई, सिंगापुर के विद्यार्थी भी दाखिला लेते हैं। सालाना फीस 30 लाख रुपये है, लेकिन छात्रवृत्ति ने सब कुछ आसान बना दिया। पढ़ाई पर एक रुपये नहीं खर्च करना है। छात्रवृत्ति परीक्षा में लाखों विद्यार्थी शामिल होते हैं, लेकिन चयन कुछ का ही हो पाता है। इनमें से एक भाग्यशाली मैं भी हूं।
Success story of Ritika Dubey all time topper in Gorakhpur
ऑल टाइम टॉपर रितिका दुबे - फोटो : अमर उजाला।
सवाल : पिता सामान्य किसान हैं। पढ़ाई में किसी तरह की दिक्कत तो नहीं आई?
जवाब:
जी नहीं, पांचवीं तक की पढ़ाई गांव के प्राथमिक विद्यालय से हुई है। कक्षा छठवीं में दाखिले से पहले छात्रवृत्ति परीक्षा दी और सेलेक्शन हो गया। शिवनागर फाउंडेशन ने पढ़ाई का जिम्मा उठाया। कक्षा छह से दसवीं तक की पढ़ाई, रहने, खाने, कपड़े का इंतजाम किया। यहां तक कि घर आने-जाने का खर्च भी दिया। 11वीं-12वीं कक्षा की स्कॉलरशिप आरपीएम एकेडमी से मिली है। ग्रीन सिटी के पास किराए का कमरा लेकर रहते हैं। इसका भी भुगतान स्कूल प्रबंधन की तरफ से किया जाता है।

सवाल : अब तो मैथ्स और बायोलॉजी का जमाना है। आपने ह्युमिनिटीज (मानविकी के विषय) क्यों चुनीं?
जवाब:
यह सही है कि मैथ्स व बायोलॉजी की पढ़ाई स्टेटस सिंबल बन गई है और गोरखपुर में ह्युमिनिटीज की पढ़ाई करने वालों की संख्या बहुत ही कम है। जिसे देखिए वही इंजीनियरिंग, मेडिकल की तरफ भाग रहा है। हमारी भी मैथ्स बहुत अच्छी है। दसवीं में 100 से 96 मार्क्स मिले थे। मैथ्स पसंद है, लेकिन ह्युमिनिटीज की पढ़ाई का फैसला किया। अब यह पढ़ाई प्रशासनिक सेवा व सीडीएस की प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में मददगार साबित होगी।   
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ऑल टाइम टॉपर रितिका दुबे - फोटो : अमर उजाला।
सफलता का मंत्र
आपको जो पसंद है, वही करें। आगे क्या करना है, यह एकदम साफ होना चाहिए। माता-पिता या फिर दोस्तों के दबाव में भविष्य का चुनाव नहीं करना चाहिए। अगर ह्युमिनिटीज व कॉमर्स पसंद है, आप अच्छा कर सकते हैं तो उसे स्वीकार करके आगे बढ़ें।

अगला लक्ष्य
स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद रितिका आईएएस बनना चाहती हैं। इसकी तैयारी में अभी से जुटी हैं। उनका कहना है कि पढ़ाई जिंदगी बदल देती है। ग्रामीण और मलिन बस्तियों में बच्चों की शिक्षा पर अब भी काम करने की जरूरत महसूस की जा रही है। आईएएस बनने के बाद बच्चों की पढ़ाई पर खास ध्यान है।
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ऑल टाइम टॉपर रितिका दुबे की सफलता पर मिले अब तक के मेडल। - फोटो : अमर उजाला।
सोशल मीडिया से दूरी
पूरा ध्यान पढ़ाई पर लगाने वाली रितिका ने सोशल मीडिया से दूरी बनाई है। उनका कहना है कि हमेशा फोकस्ड (केंद्रित) रहना चाहिए। सोशल मीडिया से सूचना मिलती है, लेकिन ध्यान भी भटकता है। लिहाजा, दूरी बनाना ही उचित समझा है। ग्रेजुएशन में दाखिला ले लिया है। इंस्टाग्राम की मदद से कुछ कक्षाएं चलनी हैं। अब इंस्टाग्राम डाउनलोड करके अकाउंट बनाने की सोच रही हूं, लेकिन यह पढ़ाई तक ही सीमित रहेगा।
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