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ईंट भट्ठे पर मजदूरी कर छोटे भाई को बनाया काबिल, टॉपर बोला- 'जो भी हूं भैया की बदौलत हूं'

Wed, 10 Feb 2021 02:36 PM IST
vivek shukla अविनाश श्रीवास्तव, गोरखपुर।
अविनाश श्रीवास्तव, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Wed, 10 Feb 2021 02:36 PM IST
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special success story of Electronic topper students in MMMUT Gorakhpur
शिवशंकर बना बीटेक इलेक्ट्रानिक का टॉपर - फोटो : अमर उजाला।

ईंट भट्ठे पर काम करने वाले मजदूर के हाथों ने भाई को इंजीनियर बना दिया। भाई ने भी अपनी मेहनत से गोल्ड मेडल हासिल करके न केवल गर्व करने का अवसर दिया बल्कि मान भी बढ़ा दिया। ये कहानी है अमेठी जिले के गांव गौरा पूरेकंडी के रहने वाले शिवशंकर की। शिवशंकर ने विपरीत परिस्थितियों में हिम्मत नहीं हारी और तमाम मुश्किलों का सामना करते हुए बचपन के सपने को इंजीनियर बनकर साकार किया है। 

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एमएमएमयूटी का पांचवा दीक्षांत समारोह। - फोटो : अमर उजाला।

मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के बीटेक इलेक्ट्रानिक के छात्र शिवशंकर को जब गोल्ड मेडल मिला तो उनकी आंखें भर आईं। ये खुशी के आंसू थे, जो जिंदगी की दुश्वारियों को पार करते हुए मेहनत से मिली सफलता के कारण निकले थे।

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टॉपर शिवशंकर - फोटो : अमर उजाला।

अमर उजाला से विशेष बातचीत में शिवशंकर ने बताया कि मुझे आज भी वह दिन याद है कि जब मैं कक्षा आठ में पढ़ रहा था तो मेरे पिता सत्यनारायण हम पांच भाई-बहनों को छोड़कर इस दुनिया से चले गए। वह ईंट भट्ठे पर मजदूरी करके परिवार पाल रहे थे। पिता के निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारी बड़े भाई श्यामलाल पर आ गई। इसके बाद बड़े भाई भी ईंट भट्ठे पर मजदूरी करने लगे। तमाम तरह की मुश्किलों को झेलते हुए उन्होंने घर को संभाला और मुझे पढ़ाया। आज जो भी हूं भैया की बदौलत हूं।

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एमएमएमयूटी के पांचवें दीक्षांत समारोह में शामिल लोग। - फोटो : अमर उजाला।

शिवशंकर ने बताया कि बड़े भाई की मदद से हाई स्कूल और इंटर की पढ़ाई अमेठी के सर्वोदय साइंस इंटर कॉलेज से की। इसके बाद संजय गांधी गवर्नमेंट पॉलिटेक्निक कॉलेज में प्रवेश लिया। इलेक्ट्रानिक से इंजीनियरिंग करने के बाद 2014 में कैंपस सेलेक्शन लखनऊ की एचसीएल कंपनी में हो गया। तीन साल तक 15 हजार रुपये मासिक वेतन पर काम करने के बाद आगे पढ़ने की इच्छा हुई, लेकिन आर्थिक समस्या सामने खड़ी थी। भाई को बताया तो उन्होंने आगे पढ़ने के लिए प्रेरित किया और आर्थिक मदद की। उन्हीं की प्रेरणा और मदद से नौकरी छोड़कर 2017 में मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में प्रवेश लिया। भाई के आशीर्वाद से मुझे आज गोल्ड मेडल प्राप्त हुआ है। यह बताते हुए शिवशंकर का गला रुंध गया था।

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टॉपर शिवशंकर। - फोटो : अमर उजाला।

सक्षम बन गया तो गरीब बच्चों की मदद करूंगा...
शिवशंकर ने बताया कि मैंने बहुत परेशानी देखी है। मैं नहीं चाहता कि मेरे जैसा कोई और विद्यार्थी इस तरह की परेशानी का सामना करे। अपने देश में रिसर्च का अभाव है। इलेक्ट्रानिक इंजीनियरिंग में विदेश जाकर देश के लिए रिसर्च करना चाहता हूं। जब मैं उस काबिल बन जाऊंगा कि किसी की मदद कर सकूं तो सबसे पहले गरीब बच्चों की पढ़ाई में मदद करूंगा।

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