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यूपी के इस स्थान पर रखा है देश का सबसे पुराना भाप इंजन, देखने वालों की लगती है लाइन

Tue, 16 Feb 2021 04:55 PM IST
vivek shukla राजन राय, गोरखपुर।
राजन राय, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Tue, 16 Feb 2021 04:55 PM IST
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special story of steam engine in NER railway station gorakhpur
देश के सबसे पुराने 10 भाप में इंजनों में से एक इंजन। - फोटो : अमर उजाला।

भाप का इंजन लगाकर ट्रेन को आपने चलते देखा होगा लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इंजन में वाष्प तैयार करने के लिए पानी भरा जाता था। लंबी दूरी की ट्रेन में दो बार पानी भरना पड़ता था। आगे की स्लाइड्स में देखें तस्वीरें...



 

special story of steam engine in NER railway station gorakhpur
गोरखपुर रेलवे स्टेशन के बाहर धरोहर के तौर पर रखा गया भाप इंजन। - फोटो : अमर उजाला।

इसके लिए इंजन को यार्ड में ले जाकर एक पानी के पोस्ट से पानी भरते थे। फिर कोयला लोड किया जाता था। गोरखपुर में अंतिम बार भाप का इंजन लगाकर ट्रेन 1994 में चली थी। इस इंजन को फिर जंक्शन पर पुराने धरोहर के तौर पर रखा गया।

special story of steam engine in NER railway station gorakhpur
यार्ड के अंदर इंजन में पानी भरता फायरमैन। (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला।

देश के 10 पुराने इंजन में एक रखा है वाईएल 5001
जंक्शन पर इंस्टाल वाईएल सीरीज के शुरुआती 10 इंजन 1952 से 56 के बीच बनाए गए। वाईएल 5001 उन्हीं 10 स्टीम इंजन में से एक है। इस इंजन को इंग्लैंड के जॉर्ज स्टीफेंसन और हॉथोर्न ने बनाया था।

 

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पहली विद्युत इंजन से चलने वाली ट्रेन। - फोटो : अमर उजाला

उन्होंने बताया कि एनई रेलवे का पूरा एरिया मीटर गेज लाइन का था जिसकी वजह से यहां स्टीम इंजन का ही प्रयोग होता था। इन इंजन का प्रयोग कम क्षमता की पैसेंजर ट्रेन को चलाने और शूटिंग के लिए किया जाता था। इन लोको की आफ्टर केयर रेलवे के चारबाग लोको शेड में होती थी।

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गोरखपुर रेलवे स्टेशन। (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
सन् 1994 से यह गोरखपुर रेलवे वर्कशॉप में धूल फांक रहा था, जिसके बाद तत्कालीन जीएम राजीव मिश्र की पहल पर इसे हेरिटेज के तौर पर इंस्टाल किया गया है।
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