वशिष्ठ मुनि की तपोभूमि के मुख्यालय से पांच किमी की दूरी पर कुआनो नदी के किनारे पौराणिक भदेश्वरनाथ मंदिर स्थित है। शिव पुराण में भद्र नाम से इसे उल्लेखित किया गया है। किवदंती है कि रावण ने यहां शिवलिंग की स्थापना करने के पश्चात वंदना की थी।
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Basti shiv temple
- फोटो : अमर उजाला।
इसका उल्लेख शिवपुराण में मिलता है। इसके बाद कई वर्षों तक यह स्थल जंगलों के बीच छिपा रहा। कहते हैं कि लोग यहां आते-जाते जरूर थे, मगर इस मंदिर के संबंध में किसी को कोई जानकारी नहीं थी।
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Basti shiv temple
- फोटो : अमर उजाला।
मंदिर के पुजारी शिवकुमार गिरी ने बताया कि लगभग दो सौ साल पूर्व बस्ती राजा शिकार खेलने जब यहां आए तो उनकी नजर इस शिवलिंग पर पड़ी। यहां भोलेनाथ को इस हालत में देख वे आहत हुए और फिर उस शिवलिंग की पूजा अर्चना कर यहां मंदिर स्थापित करा दिया।
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shiv temple
- फोटो : shiv temple
भदेश्वरनाथ ग्राम निवासी रविन्द्र गिरी ने बताया कि मंदिर के निर्माण के कुछ वर्ष बाद यहां कुछ चोरों ने शिवलिंग को चुराने की कोशिश की थी। शिवलिंग को 50 फिट तक खोदा किन्तु तब भी इस शिवलिंग का अंतिम सिरा नहीं पा सके।
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Basti shiv temple
- फोटो : अमर उजाला।
कहते हैं कि इस बीच बादल छा गए और बिजली कड़कने लगी। इसके बाद यहां चोरी कर रहे लोगों पर बिजली गिर गई, जिससे उनकी मौत हो गई। जिस बैलगाड़ी से वे चोरी कर शिवलिंग ले जाना चाहते थे वह भी पत्थर का हो गया, जो आज भी मंदिर की दायी और स्थित है।