अयोध्या में श्रीराम के मंदिर निर्माण का आयोजन कुशीनगर के लिए विशेष मायने रखता है। वजह यह है कि त्रेता कालीन सभ्यता से जुड़े इस जनपद के दो लोग भी इस खास आयोजन के गवाह होंगे।
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बाएं स्वामी जितेंद्रनन्द सरस्वती, दाएं प्रो. विनय प्रकाश पांडेय।
- फोटो : अमर उजाला।
जहां भूमि पूजन कराने वाले विद्वत परिषद में शामिल डॉ. विनय कुमार पांडेय पडरौना ब्लाक के कठकुइयां क्षेत्र के रहने वाले हैं तो वहीं विशिष्ट अतिथियों में शामिल स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती भी खड्डा तहसील के रामपुर गोनहा गांव निवासी हैं। विहिप की विशेषाधिकार प्राप्त समिति के सदस्य स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती को श्रीराम तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट समिति के महामंत्री चंपक राय की तरफ से आमंत्रित किया गया है।
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Kushinagar news
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कुशीनगर का प्राचीन नाम कुशावती है। इतिहासकार मानते हैं कि इसका नाम भगवान राम के पुत्र कुश के नाम पर ही रखा गया होगा और यह त्रेता युग में कुश की राजधानी होने के नाते ही कुशावती नाम से विख्यात थी।
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भगवान बुद्घ भी भगवान विष्णु के ही दसवें अवतार माने गए हैं। अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण के भूमि पूजन के लिए अन्य देव स्थलों के साथ ही कुशीनगर की पवित्र मिट्टी भी भेजी गई है।
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कुशीनगर के सांसद विजय कुमार दुबे व विधायक रजनीकांत मणि त्रिपाठी का कहना है कि प्राचीन कुशावती का अयोध्या से सीधा संबंध था। भगवान राम अपने विवाह के उपरांत जनकपुर से इसी रास्ते लौटकर अयोध्या गए थे। उनके पुत्र कुश की राजधानी होने के नाते भी कुशावती (अब कुशीनगर) के लोग अपने आराध्य का मंदिर बनने से अति प्रसन्न हैं।