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तस्वीरें: एक ही घर से सात लोगों की अर्थी निकली तो नम हो गईं सबकी आंखें, लोगों ने कहा- भगवान किसी को ना दिखाए ऐसा दिन
Thu, 19 Nov 2020 08:52 AM IST
vivek shukla
जयराम यादव, बर्डपुर (सिद्धार्थनगर)।
जयराम यादव, बर्डपुर (सिद्धार्थनगर)।
Published by: vivek shukla
Updated Thu, 19 Nov 2020 08:52 AM IST
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अंतिम संस्कार में मौजूद पुलिस व ग्रामीण।
- फोटो : अमर उजाला।
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उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले के रक्सेल गांव में जिस घर में दो दिन पहले चारों तरफ खुशियों का माहौल था, उसी घर से एक साथ सात लोगों की अर्थी निकली तो हर किसी का दिल दहल उठा। पत्नी, बेटे और पौत्र को कंधा देते वक्त राजेंद्र फफक पड़े तो वहां मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं। ग्रामीणों ने कहा कि भगवान ऐसा दिन किसी को ना दिखाए। आगे की स्लाइड्स में पढ़िए कैसे एक पल में मातम में बदल गईं खुशियां...
अंतिम संस्कार में मौजूद पुलिस व ग्रामीण।
- फोटो : अमर उजाला।
बता दें कि सोमवार को रक्सेल गांव निवासी राजेंद्र के मझले बेटे मनील के दो बच्चों का मुंडन संस्कार मैरवा धाम (बिहार) में होना था। मैरवा जाने के लिए सुबह चार बजे परिवार के दस लोग कार में सवार होकर निकले थे। घर से 15 किमी दूर बढ़या गांव के पास कार पुलिया से टकराकर पलट गई।
गांव में शव पहुंचते ही देखने के लिए ग्रामीणों की भीड़ जुट गई।
- फोटो : अमर उजाला।
टक्कर इतनी भीषण थी कि कार सवार दस लोगों में से छह की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि चार गंभीर रूप से घायल हो गए। बाद में एक बच्चे की गोरखपुर में इलाज के दौरान मौत हो गई। हादसे के बाद पूरे क्षेत्र में हाहाकार मच गया। वहीं देर शाम गांव में शव पहुंचे तो देखने के लिए ग्रामीणों की भारी भीड़ जुट गई। अंतिम संस्कार के लिए जब एक ही घर से सात लोगों की अर्थी निकली तो किसी की आखों के आंसू थम नहीं रहे थे।
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रोते- बिलखते परिजन।
- फोटो : अमर उजाला।
राजेंद्र बेटे उमेश और पत्नी सावित्री को मुखाग्नि देने के बाद पौत्र हिमांशु, शिवांशु और पौत्री शिवांगी के शव को पकड़कर दहाडे़ मारकर रोने लगे। पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाने के दौरान लोगों की आंखें नम हो गईं। उन्हें किस तरह सांत्वना दें लोगों को समझ में नहीं आ रहा था। नेपाल स्थित ससुराल को छोड़कर मायके रक्सेल में रह रही राजेंद्र की बेटी सरस्वती का अंतिम संस्कार उसके पति विशंभर ने किया।
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अंतिम संस्कार में शामिल लोग।
- फोटो : अमर उजाला।
बच्चों के सिर से उठा मां का साया
हादसे में राजेंद्र की दूसरी बेटी चिल्हिया थानाक्षेत्र के रमवापुर निवासी कलावती की भी मौत हो गई थी। ऐसे में बच्चों के सिर से मां का साया उठा गया। कलावती के तीन बेटे श्रीराम (27), वीरेंद्र (22), अंकित (13) और दो बेटियां बबिता (18), सविता (16) हैं। इसमें सिर्फ बड़े बेटे की ही शादी हुई है। बबिता और सविता का फफक कर रोना देखकर हर किसी की आंखें नम हो गईं। पिता उग्रिम बेटे, बेटियों को ढांढस बंधाते नजर आए, लेकिन बच्चों का रोना देखकर वो खुद को संभाल नहीं सके और दहाड़ मारकर रोने लगे। उग्रिम ने रोते हुए पत्नी का अंतिम संस्कार किया।
हादसे में राजेंद्र की दूसरी बेटी चिल्हिया थानाक्षेत्र के रमवापुर निवासी कलावती की भी मौत हो गई थी। ऐसे में बच्चों के सिर से मां का साया उठा गया। कलावती के तीन बेटे श्रीराम (27), वीरेंद्र (22), अंकित (13) और दो बेटियां बबिता (18), सविता (16) हैं। इसमें सिर्फ बड़े बेटे की ही शादी हुई है। बबिता और सविता का फफक कर रोना देखकर हर किसी की आंखें नम हो गईं। पिता उग्रिम बेटे, बेटियों को ढांढस बंधाते नजर आए, लेकिन बच्चों का रोना देखकर वो खुद को संभाल नहीं सके और दहाड़ मारकर रोने लगे। उग्रिम ने रोते हुए पत्नी का अंतिम संस्कार किया।