गोरखपुर में एक महीने के बाद सोमवार को राप्ती नदी का जलस्तर खतरे के निशान से नीचे आया है। यह नदी खतरे के निशान से करीब 80 सेंटीमीटर ऊपर बह रही थी। जलस्तर कम होने से सिंचाई विभाग के साथ ही जिला प्रशासन ने भी राहत की सांस ली है।
एक महीने बाद खतरे के निशान से नीचे आई राप्ती नदी, फिर भी नहीं टला है बाढ़ का खतरा
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हालांकि बांधों पर पानी का दबाव बना हुआ है। बांधों के कटान का खतरा भी है। लिहाजा, प्रशासनिक अफसर अलर्ट हैं। 86 बाढ़ चौकियों की मदद से बांधों की निगरानी की जा रही है। गोरखपुर से होकर बहने वाली घाघरा, रोहिन, कुआनो और गोर्रा नदी का जलस्तर भी कम हुआ है।
हालांकि बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों की मुसीबतें कम नहीं हुई है। अब भी 121 गांवों में बाढ़ है। वहां की फसलें चौपट हो चुकी हैं। 76 हजार से ज्यादा की आबादी बाढ़ से प्रभावित है। 45 गांव ऐसे हैं, जो बाढ़ से पूरी तरह घिरे हैं। इन गांवों में सिर्फ नाव से लोग आ-जा रहे हैं। नाव से ही राहत सामग्री भी पहुंचाई जा रही है।
बाढ़ का खतरा टला नहीं
राप्ती नदी का जलस्तर भले ही नीचे आ गया हो लेकिन बाढ़ का खतरा टला नहीं है। बारिश बंद है पर अलग-अलग स्रोतों से नदियों में पानी छोड़ा जा रहा है। राप्ती नदी में भी पानी छोड़ा गया है। केंद्रीय जल आयोग के आंकड़ों के मुताबिक अगस्त के अंत तक राप्ती नदी का जलस्तर कुछ और बढ़ सकता है। घाघरा नदी का जलस्तर सितंबर में बढ़ने की उम्मीद जताई गई है।
- नदी खतरे का निशान जलस्तर शाम चार बजे
- घाघरा (अयोध्या) 92.730 92.540
- राप्ती (बर्डघाट) 74.980 74.830
- कुआनो (मुखलिसपुर) 78.750 77.750
- रोहिन (त्रिमुहानी) 82.440 80.570
- गोर्रा 70.500 70.500
बाढ़ खंड-2 के अधिशासी अभियंता रूपेश कुमार खरे ने बताया कि लखीमपुर खीरी के पास बैराज से पानी छोड़ा गया है। चार दिन में पानी गोरखपुर तक पहुंचेगा। तब नदियों का जलस्तर फिर बढ़ेगा। घाघरा खतरे के निशान को पार कर सकती है। सिंचाई विभाग के अफसर, कर्मचारियों को अलर्ट पर रखा गया है। अभी नदियां खतरे के निशान से नीचे आ गई हैं।