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Exclusive: रेंजर और डिप्टी रेंजर चला रहे हैं गोरखपुर चिड़ियाघर की पार्किंग, सोसाइटी की अनुमति के बिना सौंप दी गई जिम्मेदारी

Wed, 07 Jul 2021 10:33 AM IST
vivek shukla रोहित सिंह, गोरखपुर।
रोहित सिंह, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Wed, 07 Jul 2021 10:33 AM IST
सार

पार्किंग के लिए एक बार टेंडर निकाला गया, महंगा होने से किसी ने नहीं लगाई बोली। सोसाइटी की अनुमति के बिना रेंजर-डिप्टी रेंजर को सौंप दी गई पार्किंग की जिम्मेदारी। प्रतिदिन एक हजार से अधिक वाहन होते हैं पार्क, तीन श्रेणियों में लिया जा रहा शुल्क। वन मंत्री के निर्देश के बाद भी गोद लेने वालों के नाम नहीं लिखे गए।

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Ranger and Deputy Ranger running parking of Gorakhpur Zoo without permission of society
गोरखपुर चिड़ियाघर। - फोटो : अमर उजाला।
शहीद अशफाक उल्ला खान प्राणि उद्यान की पार्किंग को ठेके पर न देकर रेंजर और डिप्टी रेंजर चला रहे हैं। इनके नाम पर सोसाइटी की तरफ से अनुमति भी नहीं ली गई है। पार्किंग में गाड़ियों को खड़ा करने के बदले तीन श्रेणियों में शुल्क लिया जा रहा है। प्रतिदिन लगभग एक हजार गाड़ियां पार्क होती हैं। चिड़ियाघर का उद्घाटन 27 मार्च को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया था।


जानकारी के अनुसार, चिड़ियाघर की पार्किंग को ठेके पर देने के लिए पांच मार्च को टेंडर निकाला गया था। प्राणि उद्यान के प्रबंधन का कहना है कि टेंडर की दर महंगी होने की वजह से किसी ने आवेदन नहीं किया। चूंकि, चिड़ियाघर का उद्घाटन हो चुका था, इसलिए पार्किंग को शुरू ही करना था। ऐसे में सोसाइटी की बैठक में प्राणि उद्यान प्रबंधन को पार्किंग का जिम्मा सौंप दिया गया। हालांकि, प्रबंधन इसका जवाब नहीं दे पाया कि जब एक बार टेंडर महंगा होने की वजह से किसी ने बोली नहीं लगाई तो इसे सस्ता करके दोबारा से टेंडर क्यों नहीं निकाला गया?
Ranger and Deputy Ranger running parking of Gorakhpur Zoo without permission of society
गोरखपुर चिड़ियाघर। - फोटो : अमर उजाला।
प्राणि उद्यान के निदेशक एच राजामोहन ने बताया कि प्रतिदिन के हिसाब से पार्किंग की जिम्मेदारी दी गई है। यह पूछने पर कि उद्घाटन के बाद से ही एक ही रेंजर और डिप्टी रेंजर के जिम्मे पार्किंग का काम क्यों है? उन्होंने कहा कि हमारे पास दो रेंजर होने और काम अधिक होने की वजह से इसे बदला नहीं जा सका। वहीं, पार्किंग का जिम्मा संभालने वाले डिप्टी रेंजर अजय तिवारी ने बताया कि रेंजर सुनील राव के पास काम अधिक होने की वजह से इसकी जिम्मेदारी मैंने संभाली है। हालांकि, सूत्र बताते हैं कि उनके या रेंजर के नाम को सोसाइटी की किसी बैठक में सामने नहीं रखा गया था। सोसाइटी की बैठक में जिलाधिकारी से लेकर प्राणि उद्यान, वाइल्ड लाइफ के सभी बड़े अधिकारी होते हैं। 
Ranger and Deputy Ranger running parking of Gorakhpur Zoo without permission of society
गोरखपुर चिड़ियाघर। - फोटो : अमर उजाला।
सोसाइटी की बैठक में नहीं लिया गया फैसला
गोरखपुर चिड़ियाघर सोसाइटी की बैठक बीते सोमवार को भी हुई। इसमें निदेशक पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ पीके शर्मा, निदेशक पीयूष त्रिपाठी, सदस्य स्टेट जू अथॉरिटी नीरज कुमार, निदेशक प्राणि उद्यान एच राजामोहन के अलावा डीएफओ अविनाश कुमार शामिल थे। निदेशक से जब बैठक में टेंडर के बारे में हुई चर्चा के बारे में सवाल किया गया तो उन्होंने इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि पार्किंग के टेंडर के बारे में कोई चर्चा नहीं हुई।
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Ranger and Deputy Ranger running parking of Gorakhpur Zoo without permission of society
गोरखपुर चिड़ियाघर। - फोटो : अमर उजाला।
वनमंत्री के निर्देश के बाद भी गोद लेने वालों के नाम नहीं लिखे गए
चिड़ियाघर के वन्य जीवों को गोद लेने वालों के नाम बाड़ों के सामने लिखे जाने थे। वन मंत्री दारा सिंह चौहान ने नामों को डिजिटल करने का निर्देश भी दिया था। इसका फायदा यह होता कि अगर एक साल बाद कोई दूसरा उन्हीं वन्य जीवों को गोद लेता तो नए और पुराने वाले, दोनों के नाम डिजिटल स्क्रीन पर दिखते। लेकिन, डिजिटल तो क्या, वन्य जीवों को गोद लेने वालों के नाम लकड़ी की तख्ती पर भी नहीं लिखे गए हैं।
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वन मंत्री दारा सिंह चौहान। - फोटो : अमर उजाला।
वन मंत्री दारा सिंह चौहान ने बताया कि अगर टेंडर के दाम महंगे थे तो एक बार निकाल कर छोड़ने की क्या जरूरत थी? आवश्यकतानुसार इसे कई बार निकालते रहना चाहिए था। इसके बाद भी काम नहीं चलता तो सोसाइटी की बैठक में सामने रखकर दरों पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए था। तीन महीने से लोग प्राणि उद्यान को देख रहे हैं। निदेशक वाइल्ड लाइन पीसीसीएफ के पास इसका जिम्मा है। निदेशक प्राणि उद्यान से भी इस संदर्भ में पूछा जाएगा। मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट में किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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