करीब ढाई दशक पहले देश से लेकर विश्व तक में गोरखपुर की पहचान भले ही नकारात्मक रही हो मगर पिछले तीन-चार सालों से यह शहर विकास के लिए जाना जाने लगा है। साल 2014 में केंद्र में भाजपा की सरकार बनने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने दो साल बाद 2016 में ढाई दशक से बंद खाद कारखाना के जरिए विकास की नींव डाली, जिसे 2017 से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार रफ्तार देने का काम कर रही है।
पीएम मोदी ने गोरखपुर में चार साल पहले रखी थी विकास की नींव, जानिए कैसे बदल रही है शहर की तस्वीर
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सड़कों से लेकर शिक्षा, पर्यटन, स्वास्थ्य और हवाई सेवाओं समेत कई क्षेत्रों में बड़ा बदलाव साफ दिख रहा है। इस साल के अंत तक प्राणि उद्यान शुरू हो जाएगा। जून 2021 तक खाद कारखाने से उत्पादन होने लगेगा। एम्स भी अपनी पूरी क्षमता से शुरू हो जाएगा। एयर कनेक्टिविटी काफी सुधरी है। एयरपोर्ट पर नया टर्मिनल बन जाने से विमान सेवाओं की संख्या में भी वृद्धि होगी। रामगढ़ताल किनारे नया सवेरा (फूड सेंटर-पाथवे) के विस्तार से पर्यटन को नया मुकाम मिलेगा। फोरेंसिक लैब की शुरूआत हो जाएगी, जिससे अपराधों को सुलझाने में फोरेंसिक विशेषज्ञों की मदद से कई अनसुलझे सवालों के जवाब आसानी से मिल जाएंगे।
एयरपोर्ट: हवाई सेवाओं को लग रहे पंख
चार साल पहले गोरखपुर से दिल्ली के लिए महज एक विमान सेवा थी जो अब बढ़कर तीन हो गई है। मुंबई के लिए भी तीन विमान उड़ान भर रहे हैं। हैदराबाद, कोलकाता, प्रयागराज भी हवाई सेवा से जुड़ गए हैं। अगले साल तीन फ्लोर का नया टर्मिनल बनकर तैयार हो जाएगा। करीब 22 करोड़ की लागत से बन रहे 350 यात्रियों की क्षमता वाले इस टर्मिनल के लिए टेंडर आदि की प्रक्रिया आखिरी चरण में हैं। इसके बन जाने से विभिन्न शहरों के लिए फ्लाइट सेवा में भी विस्तार हो जाएगा।
प्राणि उद्यान: इसी साल मिल जाएगी सौगात
इस साल गोरखपुर वासियों को शहीद अशफाक उल्ला खां प्राणि उद्यान की सौगात मिल जाएगी। जून 2011 में इसकी नींव पड़ी थी मगर बसपा और सपा सरकार में काम की प्रगति बहुत धीमी रही। प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी के नेतृत्व वाली सरकार आने के बाद इसमें तेजी आई। 234.36 करोड़ की लागत वाली इस परियोजना पर अब तक 223.14 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। 93 फीसदी काम पूरा हो चुका है। दिसंबर तक इसके पूरा होने की उम्मीद है। प्राणि उद्यान (चिड़ियाघर) देश का सबसे बेहतरीन होगा।
फॉरेंसिक लैब: जांच के लिए बनेंगे आत्मनिर्भर
इस वर्ष गोरखपुर में ही क्षेत्रीय विधि विज्ञान प्रयोगशाला (फॉरेंसिक लैब) की शुरुआत हो जाएगी। ऐसे में मुकदमों में साक्ष्यों के तौर पर इस्तेमाल होने वाले बाल, नाखून या अन्य नमूने की जांच के लिए कई साल इंतजार नहीं करना होगा और आरोपी को सजा दिलाने में आसानी होगी। अभी जांच के लिए नमूने लखनऊ भेजे जाते हैं। 66 करोड़ की लागत से मार्च 2016 में शुरू हुई लैब के पहले चरण का काम तकरीबन पूरा हो चुका है। दूसरे चरण का काम अगले साल तक पूरा हो जाएगा।