कोरोना के बढ़ते संक्रमण ने प्रवासी मजदूरों को एक साल पहले वाले हालात में लाकर खड़ा कर दिया है। पिछले वर्ष लॉकडाउन खत्म होने के बाद हालात ठीक हुए तो किसी तरह गांव में कर्ज लेकर बहुत सारे लोग मुंबई गए और अभी हालात सुधरे भी नहीं थे कि अब लॉकडाउन वाली स्थिति हो गई। जान बचाने की खातिर गांवों की ओर रुख कर रहे, बहुत सारे लोग परिवार संग लौटने में फिर कर्जदार बन गए। उनके सामने अब दो जून की रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
मजूदरों का दर्द: कर्ज लेकर गए थे मुंबई कमाने, अब लौटने पर फिर बने कर्जदार
गोरखपुर और आसपास जिलों में सबसे ज्यादा मुंबई से लोग आ रहे हैं। इनमें प्रवासी मजदूरों की संख्या ज्यादा है। मुंबई से इस समय 15 स्पेशल ट्रेनें आ रही हैं और सारी ट्रेनों में ठसाठस भीड़ है। दोगुनी कीमत देकर लोग टिकट खरीदने को मजबूर हैं। बहुत सारे लोग टिकट नहीं मिलने पर जुर्माना देकर सफर कर रहे हैं।
सफर में कोरोना होने का डर
एलटीटी स्पेशल से गोरखपुर आए रमेश कुमार और सुरेश का कहना है कि अभी लोग कोरोना से बचे हुए हैं। लेकिन, ट्रेन में जिस तरह की भीड़ थी, लोग सटकर बैठे थे, उसे देखकर अब कोरोना संक्रमण का डर सताने लगा है। उन्होंने बताया कि थर्मल स्क्रीनिंग हो रही है, तापमान कम करने के लिए तमाम लोग पैरासिटामाल खा ले रहे हैं।
कर्ज लेकर टिकट बनवाया
महराजगंज जिले के निवासी आकाश ने बताया कि दो महीने पहले उधार लेकर मुंबई गया था। वहां पेंट-पालिश का काम मिल गया। बहुत खुश था कि अब कोरोना के चलते बिगड़े हालात ठीक हो जाएंगे। कमाई में जो बचाया था उसे घर भेज दिया। अब काम मिलना बंद हो गया तो मुंबई में रहकर क्या करता। कर्ज लेकर ट्रेन का टिकट बनवाया है, किसी तरह घर लौटा हूं।
जिंदगी फिर पटरी से उतर गई
भटहट निवासी विपिन ने बताया कि लॉकडाउन खत्म होने के बाद हैदराबाद गया था। वहां एक फैक्ट्री में काम मिल गया। जिंदगी पटरी पर आई ही थी कि कोरोना ने फिर सब कुछ बिगाड़ दिया। जो कर्ज पिछले साल लिया था, बमुश्किल उसे चुकता कर पाया कि अब फिर कर्जदार बन गया। समझ में नहीं आ रही है कि अब आगे क्या होगा। मैंने तो ठान लिया है कि अब बाहर नहीं जाऊंगा।