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मुक्तेश्वरनाथ मंदिर : 400 साल पुराना है इतिहास, यहां उमड़ता है भक्तों का सैलाब

Mon, 08 Mar 2021 01:53 AM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Mon, 08 Mar 2021 01:53 AM IST
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Mukteshwar Nath temple special story in gorakhpur
मुक्तेश्वरनाथ मंदिर। - फोटो : अमर उजाला

गोरखपुर शहर में राप्ती नदी के तट पर स्थित मुक्तेश्वरनाथ मंदिर शिव भक्तों की आस्था का केंद्र है। मंदिर का इतिहास चार सौ साल पुराना है। इस मंदिर का मुक्तेश्वर नाम इसके बगल में मुक्तिधाम होने के कारण पड़ा। शिवरात्रि में यहां शिव भक्तों का जन सैलाब उमड़ता है। शिवरात्रि पर भक्तों की भीड़ को देखते हुए मंदिर प्रबंधन तैयारियों में जुटा है।





 

Mukteshwar Nath temple special story in gorakhpur
मुक्तेश्वरनाथ मंदिर में बंद ताला। - फोटो : अमर उजाला।

ऐसी मान्यता है कि चार सौ वर्ष पूर्व यहां घना जंगल हुआ करता था। एक बार बांसी स्टेट के राजा यहां शिकार करने आए और जंगल में शेरों ने उन्हें घेर लिया। जान संकट में फंसी देखकर राजा ने अपने इष्टदेव भगवान शिवशंकर को याद किया। चमत्कार हुआ और शेर वापस लौट गए। इसी स्थान पर राजा ने भगवान का मंदिर बनवाने का संकल्प लिया। उनके आदेश पर महाराष्ट्र निवासी बाबा काशीनाथ ने यहां मंदिर की स्थापना कराई। काशीनाथ ने नौसड़ के बगल में स्थित पेवनपुर निवासी यदुनाथ उपाध्याय को मंदिर का कार्यभार सौंप तीर्थाटन पर चले गए। तब से उन्हीं के परिवार के लोग मंदिर की देखरेख कर रहे हैं।

 

Mukteshwar Nath temple special story in gorakhpur
बाबा मुक्तेश्वरनाथ मंदिर में शिवलिंग पर जल चढ़ाते श्रद्धालु। - फोटो : Shivharsh Dwivedi

शिवरात्रि के दिन होता है रात्रि जागरण
आम दिनों में मंदिर में प्रतिदिन सुबह सात बजे और शाम को आठ बजे आरती होती है। शिवरात्रि के दिन यहां रात्रि जागरण होता है। रात में नौ बजे, 12 बजे, भोर में तीन बजे और सुबह छह बजे आरती होती है। लोग बाबा के पूजन अर्चन और जलाभिषेक के बाद यहां लगे मेले का लुत्फ उठाते हैं।
 

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Mukteshwar Nath temple special story in gorakhpur
मंदिर के बाहर बैठकर जाप करते पंडित। - फोटो : अमर उजाला।
मंदिर में होते हैं विभिन्न अनुष्ठान
संतान प्राप्ति एवं आरोग्यता के लिए साधक यहां आकर अनुष्ठान आदि कराते हैं। पहले केवल भगवान शिव का मंदिर था, बाद में हुए नवनिर्माण के बाद यहां शिव परिवार, मां दुर्गा, हनुमान जी की भी प्रतिमाएं स्थापित की गईं। आज भी यहां प्राचीन कुआं और पीपल वृक्ष शिवभक्तों के श्रद्धा का केंद्र है।

 
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पुजारी रमानाथ उपाध्याय - फोटो : अमर उजाला
मुक्तेश्वरनाथ मंदिर के मुख्य पुजारी रमानाथ ने कहा कि कोरोना के कारण सावन में मंदिर को पूरी तरह से श्रद्धालुओं के लिए बंद रखा गया था, लेकिन अब जब कोरोना का संकट कम होने लगा है तो सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए शिवरात्रि पर श्रद्धालुओं को बाबा के दर्शन व जलाभिषेक कराए जाएंगे, मंदिर आने वाले प्रत्येक श्रद्धालुओं को मास्क लगाना अनिवार्य होगा।
 
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