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Mother's Day 2020: कोरोना योद्धा माताओं को ताकत दे रहा है बच्चों का प्यार, जानिए कैसे लड़ रही हैं जंग

Sun, 10 May 2020 03:09 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Sun, 10 May 2020 03:09 PM IST
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Mother's Day 2020 special story from gorakhpur
gorakhpur news - फोटो : अमर उजाला।

कोरोना वायरस से जंग में खाकी वर्दी वाली महिला माताएं बच्चों को अधिक समय नहीं दे पा रही हैं। उन्होंने अपनी ममता को ही लॉकडाउन कर दिया है। कोई अपने दुधमुंहे बच्चे से दूर है तो कोई अपने बच्चों के सवालों का जवाब नहीं दे पा रहीं। वहीं बच्चों को उनसे कम समय तक मिल पाने का दुख है, लेकिन उतना ही गर्व भी। बच्चों की प्यार की खुराक मां को इस लड़ाई में कमजोर नहीं पड़ने दे रही। आगे की स्लाइड में पढ़िए माताओं की कहानी...

Mother's Day 2020 special story from gorakhpur
महिला थाने की प्रभारी इंस्पेक्टर अर्चना सिंह। - फोटो : अमर उजाला।

हमें मां पर गर्व हैं
महिला थाने की प्रभारी इंस्पेक्टर अर्चना सिंह के दो बच्चे आठ साल का अभिराज सिंह और पांच साल की बिटिया आन्या सिंह हैं। दोनों घर पर सोए होते हैं, तभी वे निकल जाती हैं। सुबह से ही लॉकडाउन का पालन कराना, फिर जरूरतमंदों के बीच भोजन पहुंचाने की जिम्मेदारी के बीच बच्चों की याद आती है, लेकिन फर्ज के आगे सब कुछ भूल जाता है। ऐसे में बच्चों का कहना है कि हमें गर्व है कि इस संकट में मेरी मां ईमानदारी से जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रही हैं।

Mother's Day 2020 special story from gorakhpur
रंजू मिश्रा। - फोटो : अमर उजाला।
खुद के बच्चे से दूर हूं क्योंकि बहुत से बच्चे बाहर खोजते हैं
महिला प्रकोष्ठ में तैनात रंजू मिश्रा की तीन साल की बच्ची प्रान्वी है। पहले तो सुबह उठते ही उसकी जिम्मेदारी थी, जो अब घरवालों के हवाले है। उसके उठने से पहले ही ड्यूटी पर चली जाती हूं। वह कहती हैं कि थोड़ा दर्द जरूर होता है, मगर ड्यूटी पर पहुंचने के बाद सब भूल जाती हूं।
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Mother's Day 2020 special story from gorakhpur
उमा देवी। - फोटो : अमर उजाला।
जुड़वां बच्चे एक साथ ही पास आना चाहते हैं
महिला थाने में तैनात उमा देवी के पांच साल के जुड़वां बच्चे हैं। अनमोल और अभिमान। दोनों एक साथ ही बात करना चाहते हैं। पास भी आना चाहते हैं, लेकिन चाहकर भी उनके करीब नहीं जा पाती हैं। वह कहती हैं कि आज जैसे ही ड्यूटी पर आई, पति का फोन आ गया।

वह बोले की बच्चे बात करना चाहते हैं। दोनों बोल पड़े कि आज मदर्स डे है और हमें अभी मिलना है जहां हो बता दो, पापा के साथ आ जाएंगे। यह सुनते ही आंख नम हो गई। मां की ममता भी जागी, लेकिन फर्ज निभाने की मजबूरी सामने खड़ी थी। बच्चों को किसी तरह से समझाया।
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Mother's Day 2020 special story from gorakhpur
रीना उपाध्याय। - फोटो : अमर उजाला।

मेरे लिए तड़पता है बच्चा
सिपाही रीना उपाध्याय की तीन साल की बेटी राधा और एक साल का दुधमुंहा बच्चा है। रीना चाहकर भी उसे गोद में नहीं लेती हैं। वह कहती हैं कि एक घर में बच्चों से अलग रहना बहुत कठिन होता है, लेकिन यह त्याग उनकी, परिवार की सुरक्षा के लिए है। कई बार बच्चा एकदम मेरे पास आने के लिए तड़प जाता है, लेकिन फर्ज के आगे उसका दर्द भूल जाती हूं। आज मदर्स डे के अवसर पर भी बच्चों को छोड़ अपना फर्ज निभा रही हूं।

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