सूबेदार सत्यवान सिंह की मौत से परिवार अभी उबर भी नहीं पाया था कि सड़क हादसे ने दो और अपनों को छीन लिया। पति के पार्थिव शरीर के पीछे दूसरी गाड़ी से आ रहीं सरोजनी को जब एंबुलेंस हादसे में बेटे गौरव और देवर रामसमुझ की मौत की खबर मिली तो वह सदमे से बेहोश हो गईं। हालत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल ले जाना पड़ा।
गहिला गांव में हादसे की खबर पहुंचते ही चीख-पुकार मच गई। पति को खो चुकी सरोजनी पर बेटे की मौत की खबर ने दुखों का पहाड़ तोड़ दिया। वहीं पिता के निधन के बाद से रो रही बेटी दीक्षा को जब भाई गौरव की मौत का पता चला तो वह बदहवास हो गई।
रामसमुझ के घर का दर्द भी कम नहीं था। पत्नी शीला पति की मौत की खबर सुनकर बेसुध हो गईं। बेटे विवेक, विक्की और विकास की चीख-पुकार से घर का माहौल गमगीन हो गया।
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मृतक सूबेदार की शव यात्रा और मृतकों की फाइल फोटो
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
कुछ घंटे पहले तक परिवार सूबेदार सत्यवान सिंह की अंतिम विदाई की तैयारी में जुटा था। किसी को अंदाजा नहीं था कि उसी दिन दो और अर्थियां उठेंगी। एक साथ तीन अपनों को खोने से पूरा परिवार टूट गया। गांव में मातम पसरा है। परिजन को ढांढ़स बंधाने पहुंचे लोगों की आंखें भी अपनों का विलाप देखकर नम हो गईं।
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सूबेदार के घर के बाहर जुटी ग्रामीणों की भीड़
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
तिरंगे में लिपटा था अपना, रास्ते में मौत ने छीन लिए दो और
चंडीगढ़ से देवरिया तक का सफर परिवार के लिए पहले ही आंसुओं से भरा था। एंबुलेंस में तिरंगे में लिपटा सूबेदार सत्यवान सिंह का पार्थिव शरीर था। परिजन को उम्मीद थी कि गांव पहुंचकर उन्हें पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई देंगे मगर पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर हुए हादसे में चाचा और भतीजे की मौत ने इस सफर को परिवार की जिंदगी का सबसे दर्दनाक सफर बना दिया।
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सूबेदार के घर पहुंचे डीएम व एसपी
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
सूबेदार की अंतिम विदाई की तैयारी गांव में चल रही थी। इसी बीच हादसे की खबर पहुंची तो माहौल मातम में बदल गया। कुछ देर पहले तक जिस परिवार में एक अपने की अंतिम विदाई की तैयारी हो रही थी, वहां अचानक दो और मौतों का गम आ गया।
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मृतक सूबेदार के घर के बाहर जुटी भीड़
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
हादसे की जानकारी मिलते ही गहिला गांव के कई लोग और रिश्तेदार हादसा स्थल की ओर रवाना हो गए। गांव में हर चेहरा स्तब्ध था। किसी को यकीन नहीं हो रहा था कि जिस परिवार के लिए लोग सूबेदार सत्यवान की अंतिम यात्रा में शामिल होने की तैयारी कर रहे थे, उसी परिवार को कुछ ही देर में दो और अपनों की मौत का दुख झेलना पड़ेगा।