गोरखपुर जिले के सहजनवां तहसील क्षेत्र के भगवानपुर निवासी जय प्रकाश सिंह के छोटे बेटे व जम्मू कश्मीर में शहीद नवीन कुमार सिंह (23) को गुरुवार को अंतिम विदाई दी गई। सेवा के जवान गोरखपुर के लाल का पार्थिव शरीर लेकर आए, फिर गांव से ही अंतिम यात्रा निकाली गई। नम आंखों के साथ तमाम लोग अंतिम यात्रा में शामिल हुए और भारत माता का जयघोष होता रहा। देशभक्ति के गीत गाए गए। कालेसर स्थित मोक्षधाम पर नवनीत का राजकीय सम्मान साथ अंतिम संस्कार किया गया।
शहीद नवीन की हुई अंतिम विदाई: पिता ने बहादुर बेटे को नम आंखों से दी मुखाग्नि, बोले- 'मुझे मेरे लाल पर गर्व है'
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पार्थिव शरीर जब मोक्ष धाम पहुंचा तो पूरे राजकीय सम्मान के साथ पिता ने देश के वीर सपूत को मुखाग्नि दी। सेना के जवानों ने अपने जाबांज सिपाही को पुष्प अर्पित कर श्रंद्धाजलि दी। मोक्षधाम पर भी लोगों की भीड़ लगी रही। भारत माता के जयकारे लगाए गए। इस मौके पर पूर्व विधायक यशपाल रावत राम प्रकाश शुक्ला दिलीप यादव प्रभाकर दुबे, सरवन पांडे छोटेलाल मौर्य गिरीश यादव व विभ्राट चंद कौशिक मौजूद रहे।
फरवरी में घर आए थे नवीन
शहीद नवीन फरवरी में घर आए थे। साथ ही अपने सहपाठियों के साथ बैठकर ड्यूटी के दौरान सेना के प्रशिक्षण के बारे में खूब बातें की थीं। कहा था कि देश के लिए कुछ कर गुजरना रहता है। बस यही एक उद्देश्य रहता है। कम उम्र में ही सेना में शामिल होने और कमांडो जैसे पद पर तैनात होने पर जहां नवीन को खुशी थी, वहीं परिवार के लोगों को गर्व था। नवीन के पिता भी सेना से रिटायर हैं।
गर्व है मुझे, मेरा लाल देश के लिए लड़कर शहीद हुआ
सेना से रिटायर जयप्रकाश सिंह के चार बच्चे हैं। इसमें दो बेटे व दो बेटियां शामिल हैं। सबसे छोटे नवीन ही थे। ग्रामीण कहते हैं कि नवीन खुश मिजाज थे। वह जब गांव में निकलते थे तो बड़े, बुजुर्गों से आशीर्वाद लेते थे। बातचीत में कहते थे कि जरूरत पड़ी तो देश के लिए यह जीवन भी समर्पित कर दूंगा शायद उसे आभास था कि उसके साथ ऐसा ही कुछ होने वाला है जबकि पिता जो खुद फौजी थे वह काफी अपने को गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं। उन्होंने कहा मुझे गर्व है। मेरा लाल इस देश के लिए लड़कर शहीद हुआ है।
भाई को कार दिलाने व जून में छुट्टी पर आने का दिलाया था भरोसा
जम्मू कश्मीर में शहीद नवीन सिंह ने बड़े भाई विकास को नई कार दिलाने का भरोसा दिलाया था। कहा था कि इस बार आएंगे तो चलकर कार लेंगे। विकास की नवीन से अंतिम बार 24 मई को सुबह 10 बजकर 5 मिनट पर मोबाइल फोन पर बात हुई थी। 20 मिनट की बात में नवीन ने सात जून को छुट्टी पर घर आने का भरोसा दिलाया था। अब वह कभी नहीं आ सकेगा। यह कहकर विकास शहीद के पार्थिक शरीर से लिपटकर रोने लगे। यह देख सबका कलेजा फट गया और आंखें नम हो गईं।