ब्रह्मलीन गोरक्षपीठाधीश्वर महंत अवेद्यनाथ का जीवन में दो ही सपना था। पहला ऊंच-नीच, जाति-पाति और छुआछूत एवं अस्पृश्यता की कुरीति को खत्म कर सामाजिक समरसता की स्थापना करना। दूसरा सपना था अयोध्या में प्रभु श्रीराम की जन्मभूमि पर भव्य मंदिर का निर्माण। इन दोनों सपनों को पूरा करने के लिए वह ताउम्र मिशनरी भाव से जुड़े रहे। ब्रह्मलीन गोरक्षपीठाधीश्वर महंत अवेद्यनाथ की पुण्य स्मृति कार्यक्रम में केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह शुक्रवार को महराजगंज जिले में मौजूद रहेंगे। इनके साथ मुख्यमंत्री एवं गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ भी रहेंगे। दोनों लोग गोरक्षपीठाधीश्वर महंत अवेद्यनाथ महाविद्यालय चौक बाजार, महराजगंज में ब्रह्मलीन महंत की दिव्य प्रतिमा का अनावरण करेंगे।
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महराजगंज के चौक बाजार स्थित महाविद्यालय में शुक्रवार को होगा महंत अवेद्यनाथ की भव्य प्रतिमा का अनावरण।
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18 मई 1919 को गढ़वाल (उत्तराखंड) के ग्राम कांडी में जन्में महंत अवेद्यनाथ का बचपन से ही धर्म, अध्यात्म के प्रति गहरा झुकाव था। उनके इस जुड़ाव को विस्तृत आयाम नाथपंथ के विश्वविख्यात गोरक्षपीठ में महंत दिग्विजयनाथ के सानिध्य में मिला। गोरक्षपीठ में उनकी विधिवत दीक्षा 8 फरवरी 1942 को हुई और वर्ष 1969 में महंत दिग्विजयनाथ की चिर समाधि के बाद 29 सितंबर 1969 को वह गोरखनाथ मंदिर के महंत व पीठाधीश्वर बने। योग व दर्शन के मर्मज्ञ पीठाधीश्वर के रूप में उन्होंने अपने गुरुदेव के लोक कल्याणकारी व सामाजिक समरसता के आदर्शों का फलक और विस्तारित किया। यह सिलसिला 2014 में आश्विन कृष्ण चतुर्थी को उनके चिर समाधिस्थ होने तक अनवरत जारी रहा।
अयोध्या में प्रभु श्रीराम की जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण के लिए गोरक्षपीठ की तीन पीढ़ियों का योगदान स्वर्णाक्षरों में अंकित है। महंत दिग्विजयनाथ ने अपने जीवनकाल में मंदिर आंदोलन में क्रांतिकारी नवसंचार किया तो उनके बाद इसकी कमान संभाली महंत अवेद्यनाथ ने। नब्बे के दशक में उनके ही नेतृत्व में श्रीराम मंदिर आंदोलन को समग्र, व्यापक और निर्णायक मोड़ मिला। आंदोलन की ज्वाला गांव-गांव तक प्रज्वलित हुई। महंत अवेद्यनाथ ने श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति यज्ञ समिति और श्रीराम जन्मभूमि निर्माण उच्चाधिकार समिति के अध्यक्ष के रूप में आंदोलन में संतो, राजनीतिज्ञों और आमजन को एकसूत्र में पिरोया। यह भी संयोग है कि पांच सदी के इंतजार के बाद अयोध्या में श्रीराम मंदिर के निर्माण का मार्ग उनके शिष्य योगी आदित्यनाथ की देखरेख में प्रशस्त हुआ है।