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यूपी: राजा डोम के यहां भोजन कर महंत अवेद्यनाथ ने पेश की थी मिशाल, राजनीति में बनाया था ये खास रिकॉर्ड

Thu, 23 Sep 2021 03:01 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Thu, 23 Sep 2021 03:01 PM IST
सार

महराजगंज के चौक बाजार स्थित महाविद्यालय में शुक्रवार को होगा महंत अवेद्यनाथ की भव्य प्रतिमा का अनावरण।

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Mahant Avadyanath presented an example by having food at Raja Dom
महंत अवेद्यनाथ की फाइल फोटो। - फोटो : अमर उजाला।

ब्रह्मलीन गोरक्षपीठाधीश्वर महंत अवेद्यनाथ का जीवन में दो ही सपना था। पहला ऊंच-नीच, जाति-पाति और छुआछूत एवं अस्पृश्यता की कुरीति को खत्म कर  सामाजिक समरसता की स्थापना करना। दूसरा सपना था अयोध्या में प्रभु श्रीराम की जन्मभूमि पर भव्य मंदिर का निर्माण। इन दोनों सपनों को पूरा करने के लिए वह ताउम्र मिशनरी भाव से जुड़े रहे। ब्रह्मलीन गोरक्षपीठाधीश्वर महंत अवेद्यनाथ की पुण्य स्मृति कार्यक्रम में केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह शुक्रवार को महराजगंज जिले में मौजूद रहेंगे। इनके साथ मुख्यमंत्री एवं गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ भी रहेंगे। दोनों लोग गोरक्षपीठाधीश्वर महंत अवेद्यनाथ महाविद्यालय चौक बाजार, महराजगंज में ब्रह्मलीन महंत की दिव्य प्रतिमा का अनावरण करेंगे।



 

Mahant Avadyanath presented an example by having food at Raja Dom
कल्याण सिंह और महंत अवेद्यनाथ। (फाइल फोटो) - फोटो : amar ujala
बता दें कि नाथपंथ की लोक कल्याण की परंपरा को धर्म के साथ राजनीति से भी संबद्ध कर महंत अवेद्यनाथ ने पांच बार मानीराम विधानसभा और चार बार गोरखपुर लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व भी किया। श्रीराम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण के लिए हुए आंदोलन को निर्णायक पड़ाव देने के लिए इस राष्ट्रसंत को निश्चित ही युगों युगों तक याद किया जाएगा।

 
Mahant Avadyanath presented an example by having food at Raja Dom
महंत अवेद्यनाथ की फाइल फोटो। - फोटो : अमर उजाला।

18 मई 1919 को गढ़वाल (उत्तराखंड) के ग्राम कांडी में जन्में महंत अवेद्यनाथ का बचपन से ही धर्म, अध्यात्म के प्रति गहरा झुकाव था। उनके इस जुड़ाव को विस्तृत आयाम नाथपंथ के विश्वविख्यात गोरक्षपीठ में महंत दिग्विजयनाथ के सानिध्य में मिला। गोरक्षपीठ में उनकी विधिवत दीक्षा 8 फरवरी 1942 को हुई और वर्ष 1969 में महंत दिग्विजयनाथ की चिर समाधि के बाद 29 सितंबर 1969 को वह गोरखनाथ मंदिर के महंत व पीठाधीश्वर बने। योग व दर्शन के मर्मज्ञ पीठाधीश्वर के रूप में उन्होंने अपने गुरुदेव के लोक कल्याणकारी व सामाजिक समरसता के आदर्शों का फलक और विस्तारित किया। यह सिलसिला 2014 में आश्विन कृष्ण चतुर्थी को उनके चिर समाधिस्थ होने तक अनवरत जारी रहा।
 

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योगी आदित्यनाथ के साथ महंत अवेद्यनाथ। (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला।

अयोध्या में प्रभु श्रीराम की जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण के लिए गोरक्षपीठ की तीन पीढ़ियों का योगदान स्वर्णाक्षरों में अंकित है। महंत दिग्विजयनाथ ने अपने जीवनकाल में मंदिर आंदोलन में क्रांतिकारी नवसंचार किया तो उनके बाद इसकी कमान संभाली महंत अवेद्यनाथ ने। नब्बे के दशक में उनके ही नेतृत्व में श्रीराम मंदिर आंदोलन को समग्र, व्यापक और निर्णायक मोड़ मिला। आंदोलन की ज्वाला गांव-गांव तक प्रज्वलित हुई। महंत अवेद्यनाथ ने श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति यज्ञ समिति और श्रीराम जन्मभूमि निर्माण उच्चाधिकार समिति के अध्यक्ष के रूप में आंदोलन में संतो, राजनीतिज्ञों और आमजन को एकसूत्र में पिरोया। यह भी संयोग है कि पांच सदी के इंतजार के बाद अयोध्या में श्रीराम मंदिर के निर्माण का मार्ग उनके शिष्य योगी आदित्यनाथ की देखरेख में प्रशस्त हुआ है।
 

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गोरक्ष पीठाधीश्वर ब्रह्मलीन महंत दिग्विजय नाथ, महंत अवैद्यनाथ, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (फाइल फोटो)। - फोटो : अमर उजाला।
महंत अवेद्यनाथ वास्तविक अर्थों में धर्माचार्य थे। धर्म के मूल मर्म सामाजिक समरसता को उन्होंने अपने जीवनपथ का उद्देश्य बनाया। आजीवन उन्होंने हिंदू समाज से छुआछूत और ऊंच-नीच के भेदभाव को समाप्त करने के लिए वृहद अभियान चलाया। अखिल भारतवर्षीय अवधूत भेष बरहपंथ योगी महासभा के अध्यक्ष के रूप में महंत ने देशभर के संतों को भी अपने इसी अभियान से जोड़ा। अपने स्पष्ट विचारों के चलते पूरे देश के संत समाज में अति सम्माननीय रहे महंत अवेद्यनाथ दक्षिण भारत के मीनाक्षीपुरम में दलित समाज के सामूहिक धर्मांतरण की घटना से बहुत दुखी हुए।
 
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