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इस मंदिर की अनोखी है कहानी, कुल्हाड़ी के वार से पत्थर से बहने लगी थी खून की धारा

Wed, 19 Feb 2020 01:08 PM IST
vivek shukla डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर।
डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Wed, 19 Feb 2020 01:08 PM IST
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Maha Shivratri special story of Mahadev Jharkhandi shiv temple story in Gorakhpur
इस मंदिर में शिवरात्रि के दिन लगता है मेला। - फोटो : अमर उजाला।

शहर में स्थित महादेव झारखंडी शिव भक्तों की आस्था का प्रमुख केंद्र है। शिवरात्रि पर पूर्वांचल के अलग-अलग जिलों से लगभग दो लाख शिव भक्त बाबा का जलाभिषेक करने पहुंचते हैं। इस दिन यहां मेला भी लगता है। बाबा के पूजन-अर्चन के बाद श्रद्धालु मेले का भी लुत्फ उठाते हैं। इस मंदिर की कहानी बहुत हैरान करने वाली है।

Maha Shivratri special story of Mahadev Jharkhandi shiv temple story in Gorakhpur
शिवरात्रि पर लगभग दो लाख शिवभक्त करते हैं बाबा का जलाभिषेक। - फोटो : अमर उजाला।

झारखंडी महादेव मंदिर के मुख्य पुजारी शंभु गिरी गोस्वामी ने बताया कि पहले यहां पर चारों तरफ जंगल था। लकड़हारे यहां से लकड़ी काटकर ले जाते थे और अपना जीवकोपार्जन करते थे। पुराने लोग बताते हैं कि 1928 में एक दिन एक लकड़हारा यहां पर पेड़ काट रहा था, तभी उसकी कुल्हाड़ी एक पत्थर से टकराई जिससे खून की धारा बहने लगी। इसके बाद वह लकड़हारा जितनी बार उस शिवलिंग को ऊपर लाने की कोशिश करता वो उतना ही नीचे धंसता जाता।

Maha Shivratri special story of Mahadev Jharkhandi shiv temple story in Gorakhpur
मंदिर में शिव भक्तों के लिए लगता है मेला। - फोटो : अमर उजाला।

लकड़हारे ने भाग कर यह घटना अन्य लोगों को बताई। इसी बीच वहां के जमींदार गब्बू दास को रात में भगवान भोले का सपना आया कि झारखंडी में भोले प्रकट हुए हैं। इसके बाद जमींदार और स्थानीय लोगों ने वहां पहुंचकर शिवलिंग को जमीन से ऊपर करने की कोशिश करने लगे, लेकिन वह इसमें सफल नहीं हुए तब शिवलिंग पर दूध का अभिषेक किया जाने लगा और वहां पर पूजा पाठ शुरू हुआ। जो निरंतर जारी है। इस शिवलिंग पर आज भी कुल्हाड़ी के निशान मौजूद है।  मुख्य पुजारी के मुताबिक जंगल होने के कारण ये स्वयंभू (भगवान शिव किसी कारणवश स्वयं शिवलिंग के रूप में प्रकट होते हैं) शिवलिंग हमेशा पत्तों से ढका रहता था। इसीलिए मंदिर का नाम महादेव झारखंडी पड़ा। 

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Maha Shivratri special story of Mahadev Jharkhandi shiv temple story in Gorakhpur
पीपल का पेड़ शेषनाथ की आकृति के रूप में उकेरी हुई है। - फोटो : अमर उजाला।
पीपल के पेड़ पर है शेषनाग की आकृति
मंदिर समिति के कोषाध्यक्ष शिवपूजन तिवारी ने बताया कि शिवलिंग के बगल में ही एक विशालकाय पीपल का पेड़ है। ये पेड़ पांच पौधों को मिलाकर एक बना है। इस पीपल की जड़ के पास शेषनाग की आकृति बन गई है। ये आकृति भी लोगों की आस्था का केंद्र है।

हर बार असफल रहा शिवलिंग के ऊपर छत डालने का प्रयास
कोषाध्यक्ष अशोक एवं सचिव राजनाथ यादव ने बताया कि झारखंडी महादेव मंदिर में शिव लिंग खुले आसमान में है। कई बार शिवलिंग के ऊपर छत डालने की कोशिश की गई, लेकिन किसी न किसी कारण से वह पूरी नहीं हुई। उसके बाद शिवलिंग को खुले में ही छोड़ दिया गया है और उसके ऊपर पीपल के पेड़ की छांव ही रहती है।
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Maha Shivratri special story of Mahadev Jharkhandi shiv temple story in Gorakhpur
महाशिवरात्रि।

कल निकलेगी शिव बरात
शिवरात्रि के अवसर पर यहां रहने वाले शिवभक्त गौरव कुमार उर्फ जॉनी एवं अविनाश जायसवाल की ओर से शिव बरात का आयोजन किया जा रहा है। बृहस्पतिवार को गुरुंग चौराहे से बरात उठकर महादेव मंदिर पहुंचकर समाप्त होगी। बरात में शामिल झांकियां लोगों को आकर्षित करेंगी।

शिवरात्रि की तैयारियां पूरी
महादेव झारखंडी मंदिर समिति के अध्यक्ष अयोध्या मिश्रा ने बताया कि शिवरात्रि को लेकर मंदिर समिति की ओर से तैयारियां अंतिम चरण में है। मंदिर की रंगाई हो चुकी है। मंदिर के बाहर सफाई कार्य चल रहा है। 20 को रात्रि नौ से 12 बजे के बीच रुद्राभिषेक का कार्यक्रम होगा। इसके बाद मंदिर के कपाल भक्तों के लिए खोल दिए जाएंगे।

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