कहावत है कि इंसान का साया उसका साथ कभी नहीं छोड़ता है। मगर रविवार को ऐसा ही कुछ होगा कि आपको ये कहावत झूठी लगेगी। दरअसल, 21 जून को सूर्य ग्रहण के साथ साथ दिन इतना लंबा होता है कि समय जल्दी नहीं कटता। इस दिन को ग्रीष्म संक्रात (समर सोलिस्टिस) कहा जाता है। इस दिन कुछ समय के लिए आपकी परछाई भी आपका साथ छोड़ देती है। यानी शहरवासियों को दो खगोलीय घटनाओं का गवाह बनने का मौका मिलेगा।
Solar eclipse 2020: साल के सबसे लंबे दिन लगेगा बड़ा 'सूर्यग्रहण', परछाई भी छोड़ देगी साथ
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क्षेत्रीय वैज्ञानिक अधिकारी महादेव पांडेय ने बताया कि बाकि दिनों में पृथ्वी की प्रक्रिया सामान्य होती है। धरती सूर्य का चक्कर लगाने के लिए अपने अक्ष पर भी घूमती है। वह अपने अक्ष पर 23.44 डिग्री झुकी हुई है। इसकी वजह से सूरज की रोशनी धरती पर हमेशा एक जैसी नहीं पड़ती और दिन-रात की अवधि में अंतर आता है। 21 जून को सूर्य उत्तरी गोलार्ध से चलकर कर्क रेखा में आ जाता है। इसी कारण सूर्य की किरणें ज्यादा समय तक धरती पर पड़ती हैं। दोपहर को सूर्य काफी ऊंचाई पर आ जाता है इसलिए 21 जून का दिन लंबा होता है। उन्होंने बताया कि नक्षत्रशाला में टेलीस्कोप की मदद से सूर्य ग्रहण की घटना का अनुसंधान किया जाएगा। इसके लिए वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला में उच्चीकृत टेलीस्कोप लगाए जाएंगे।
परछाईं भी हो जाती है गायब
जब सूर्य कर्क रेखा के ऊपर होता है तो दोपहर में एक पल ऐसा भी आता है कि जब परछाईं भी साथ छोड़ देती है। इस दिन सूर्य की किरणें करीब 15 से 16 घंटे धरती पर पड़ती हैं। इसी दिन दक्षिणी गोलार्ध में ठीक उल्टा होता है। जहां, उत्तरी गोलार्ध में रह रहे लोगों के लिए 21 जून को गर्मी की शुरुआत कहा जाता है, वहीं, दक्षिणी गोलार्ध के लोगों के लिए सर्दी की शुरुआत मानी जाती है।
1975 में 22 जून साल का सबसे बड़ा दिन था
कभी-कभी 22 जून भी बड़ा दिन होता है। 1975 में 22 जून साल का सबसे बड़ा दिन था। अब ये मौका 2203 में आएगा। पृथ्वी सूर्य के चारों तरफ चक्कर लगाती है। इसलिए मार्च और सितंबर के बीच उत्तरी गोलार्ध सूर्य के संपर्क में ज्यादा रहता है। उत्तरी गोलार्ध पर आमतौर पर 20,21 और 22 जून को सबसे ज्यादा सूर्य की रोशनी पड़ती है। इसी तरह दक्षिण गोलार्ध पर 21, 22 और 23 दिसंबर को सबसे ज्यादा सूर्य की रोशनी पड़ती है।
भूल कर भी नंगी आंखों से सूर्यग्रहण को देखने की न करें कोशिश
वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला के खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि भूलकर भी इस सूर्य ग्रहण को नंगी आंखों से देखने का प्रयास न करें। नहीं तो आंखों की रोशनी हमेशा के लिए चले जाने का खतरा बना रहता है। पूर्ण सूर्य ग्रहण के ज्यादा आंशिक और वलयाकार सूर्य ग्रहण आंखों के लिए खतरनाक होता है। उन्होंने बताया कि सूर्य ग्रहण को देखने के लिए सोलर चश्मा, टेलीस्कोप, पिन होल कैमरा, सूर्यग्रहण प्रोजेक्टेर, सोलर दूरबीन की मदद से देख सकते हैं।