कोरोना महामारी ने खेलों की दुनिया को रोक दिया है। अक्सर फील्ड में घंटों कभी फिजिकल तो कभी गेम में नजर आने वाले ये खिलाड़ी लॉकडाउन की वजह से अपने-अपने घरों या हॉस्टल में रहकर अकेले प्रैक्टिस कर रहे हैं। इनका मानना है कि स्पोर्ट्स का मतलब स्वस्थ मन और तन होता है। जो स्वस्थ होते हैं वहीं खेल पाते हैं। कोरोना के खिलाफ जीवन की वैश्विक लड़ाई में हमें टीम इंडिया के रूप में भारत को विजयी बनाना है।
कोरोना को धूल चटा, फिर जिंदगी की फील्ड पर उतरेगी टीम, अंतरराष्ट्रीय खेल दिवस पर खास संदेश दे रहे खिलाड़ी
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सामाजिक दूरी की लक्ष्मण रेखा को न करें पार
सीनियर हॉकी खिलाड़ी प्रीति दुबे कहती हैं- हमें सामाजिक दूरी की लक्ष्मण रेखा का पालन आवश्यक रूप से करना है। कोरोना की चेन को तोड़ने का यह एकमात्र विकल्प है। जिस तरह हॉकी के मैच में टीम वर्क होता है। वैसी है जिंदगी के मैच में भी टीम वर्क जरूरी है। घर पर रह कर ही प्रैक्टिस कर रही हूं। ये मेरा आत्मबल बढ़ाता है।
सीनियर हैंडबाल खिलाड़ी मंजूला पाठक का कहना है- एक घातक बीमारी से हमारा देश जूझ रहा है। हम लोग घरों में खुद को सुरक्षित रखकर अपना बचाव कर सकते हैं। मगर जरा उन डॉक्टर, पुलिस, जिला प्रशासन और मीडिया के साथियों के बारे में सोचिए जो विषम परिस्थितियों में भी आम जनता की भलाई के लिए काम कर रहे हैं। इनकी मदद करें और हौसला बढ़ाएं।
आम जनता भी व्यवस्था बनाए रखने में करे सहयोग
सीनियर हॉकी खिलाड़ी दिवाकर राम कहते हैं- लोगों की सुरक्षा के लिए ही उन्हें एकांत में रखा जा रहा है। सरकार दवा से लेकर रहने खाने की व्यवस्था कर रही है। ऐसे में आम जनता की भी ये जिम्मेदारी बनती है कि वो व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करे। अनजाने में आप अपने साथ, फिर परिवार और बाद में समाज के लिए खतरा बन जाएंगे। सही समय पर इलाज होने से कोरोना के दुष्प्रभाव को कम किया जा सकता है।
लॉकडाउन के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं
पहलवान वैष्णवी सिंह का कहना है कि- 130 करोड़ की आबादी वाले देश को कोरोना के खिलाफ लड़ाई के लिए लॉकडाउन के अलावा कोई विकल्प नहीं था। इसका एक सकारात्मक पहलू भी है। भागदौड़ की जिंदगी में परिवार के साथ समय बिताने का मौका नहीं मिलता था। पूरे परिवार के साथ इन पलों का आनंद ले रही हूं। घर की छत पर दो घंटे सुबह और शाम को कसरत करती हूं।