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Harish Rana Dead: 'परमपिता अब और नहीं, मुझसे देखा नहीं जा रहा'; हरीश की मौत के बाद पिता के शब्द
Wed, 25 Mar 2026 03:29 PM IST
Sharukh Khan
अमर उजाला नेटवर्क, गाजियाबाद
अमर उजाला नेटवर्क, गाजियाबाद
Published by: Sharukh Khan
Updated Wed, 25 Mar 2026 03:29 PM IST
सार
गाजियाबाद निवासी हरीश राणा के पिता अशोक राणा ने कहा कि परमपिता अब और नहीं। मुझसे देखा नहीं जा रहा और उससे सहा नहीं जा रहा।
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Harish Rana
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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पैसिव यूथेनेशिया (निष्क्रिय इच्छामृत्यु) की अनुमति पाने वाले भारत के पहले व्यक्ति हरीश राणा का अंतिम संस्कार दिल्ली के ग्रीन पार्क स्थित शवदाह गृह में सुबह 9 बजे संपन्न हुआ। इस दुखद घड़ी में हरीश के परिजन और उनकी सोसायटी के निवासी बड़ी संख्या में मौजूद रहे। हरीश के निधन की खबर मिलते ही उनकी सोसायटी में मातम पसर गया, और हर कोई हरीश राणा व उनके परिवार की हिम्मत की सराहना करता दिखा। अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए सोसायटी से कई लोग दिल्ली पहुंचे, जिन्होंने पूरे सम्मान के साथ हरीश को विदाई दी।
हरीश राणा माता-पिता के साथ(फाइल)।
- फोटो : संवाद
पैसिव यूथेनेशिया की अनुमति और हरीश का संघर्ष
असहनीय दर्द और शारीरिक अक्षमता से जूझ रहे हरीश के मामले में, उनके माता-पिता ने दिल्ली उच्च न्यायालय में इच्छामृत्यु की अपील की थी, जिसे 8 जुलाई 2025 को खारिज कर दिया गया था। इसके बाद, परिवार ने सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया, और 11 मार्च 2026 को सर्वोच्च न्यायालय ने हरीश को पैसिव यूथेनेशिया की अनुमति देकर एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया। यह फैसला भारत में इच्छामृत्यु से जुड़े कानूनी और नैतिक बहसों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ।
असहनीय दर्द और शारीरिक अक्षमता से जूझ रहे हरीश के मामले में, उनके माता-पिता ने दिल्ली उच्च न्यायालय में इच्छामृत्यु की अपील की थी, जिसे 8 जुलाई 2025 को खारिज कर दिया गया था। इसके बाद, परिवार ने सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया, और 11 मार्च 2026 को सर्वोच्च न्यायालय ने हरीश को पैसिव यूथेनेशिया की अनुमति देकर एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया। यह फैसला भारत में इच्छामृत्यु से जुड़े कानूनी और नैतिक बहसों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ।
Harish Rana Case
- फोटो : वीडियो ग्रैब
परमपिता अब और नहीं...मुझसे देखा नहीं जा रहा, उससे सहा नहीं जा रहा
परमपिता अब और नहीं....मुझसे देखा नहीं जा रहा और उससे सहा नहीं जा रहा। यह बोल हरीश राणा के पिता अशोक राणा के हैं। उन्होंने यह बात मंगलवार दोपहर सोसायटी के लोगों से तब कही, जब वह दिल्ली एम्स से घर पहुंचे थे। अपने फ्लैट का लॉक लगाकर वह दोपहर करीब एक बजे जैसे ही फिर दिल्ली जाने के लिए नीचे उतरे तो पार्क के पास उनको सचिन शर्मा मिल गए।
परमपिता अब और नहीं....मुझसे देखा नहीं जा रहा और उससे सहा नहीं जा रहा। यह बोल हरीश राणा के पिता अशोक राणा के हैं। उन्होंने यह बात मंगलवार दोपहर सोसायटी के लोगों से तब कही, जब वह दिल्ली एम्स से घर पहुंचे थे। अपने फ्लैट का लॉक लगाकर वह दोपहर करीब एक बजे जैसे ही फिर दिल्ली जाने के लिए नीचे उतरे तो पार्क के पास उनको सचिन शर्मा मिल गए।
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हरीश राणा की फाइल फोटो
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
उदास अशोक राणा से सचिन शर्मा ने नमस्ते की और फिर उन्होंने उनसे हरीश की तबीयत के बारे में पूछा। वह कुछ बोलते...इससे पहले ही सचिन शर्मा ने कहा कि ईश्वर सब ठीक करेंगे, हरीश स्वस्थ होकर घर लौटेंगे।
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बेटे हरीश के साथ माता-पिता
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
सचिन शर्मा ने बताया कि अशोक राणा ने तभी उनकी बात काट दी और उदास मन से बोले कि अब बहुत हो गया। बेटे की पीड़ा देखी नहीं जा रही। उसकी मां भी बहुत दुखी है। सचिन ने बताया कि उनकी यह बात सुनकर मन भर आया। आगे कुछ भी कहने की स्थिति नहीं बची।