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सहूलियत: अब कमजोर नजर वाले भी आसानी से पढ़ सकेंगे सुंदरकांड, जानिए कैसे

Tue, 13 Jul 2021 06:38 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Tue, 13 Jul 2021 06:38 PM IST
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Gita Press started publication of large Sunderkand in Gorakhpur
गीता प्रेस गोरखपुर। - फोटो : अमर उजाला।
कमजोर नजर वाले भी अब आसानी से सुंदरकांड पढ़ सकेंगे। ऐसे लोगों की सहूलियत के लिए गीता प्रेस की ओर से वृहदाकार सुंदरकांड का प्रकाशन शुरू कर दिया है। इसमें बड़े और रंगीन शब्दों की छपाई की गई है जिससे कमजोर नजर वृद्ध या कोई और इसका पाठ आसानी से कर सकें। पहले सुंदरकांड के अक्षर छोटे होने से कई लोगों को इसे पढ़ने में परेशानी का सामना करना पड़ता था।


धार्मिक एवं आध्यात्मिक पुस्तकों के प्रकाशन में गीता प्रेस नित्य नये प्रयोग करता रहा है। ये प्रयोग शत प्रतिशत सफल भी होते हैं। इसी क्रम में गीताप्रेस ने इस बार कमजोर नजर वालों के लिए वृहदाकार सुंदरकांड का प्रकाशन शुरू किया है। 60 पेज की इस पुस्तक में शब्दों का अंकित करने के लिए लाल, नीला, आसमानी एवं कत्थई रंगों का प्रयोग किया है। साथ ही राम दरबार एवं हुनमान जी के आकर्षक चित्र भी छापे गए हैं। 
Gita Press started publication of large Sunderkand in Gorakhpur
गीता प्रेस गोरखपुर। - फोटो : अमर उजाला।
पुस्तक की छपाई आर्ट पेपर पर की गई है। सुंदरकांड के साथ ही पुस्तक में हनुमान चालीसा, हनुमत स्तवन, श्रीराम स्तुति, हुनमान एवं श्री रामायण आरती है। प्रथम संस्करण में दस हजार पुस्तकों का प्रशासन किया गया है। सफल होने पर और भी पुस्तकों का प्रकाशन किया जाएगा।
Gita Press started publication of large Sunderkand in Gorakhpur
गीता प्रेस गोरखपुर। - फोटो : अमर उजाला।
आठ भाषाओं में होता है सुंदरकांड का प्रकाशन
गीता प्रेस से आठ भाषाओं में सुंदरकांड का प्रकाशन किया जाता है। जिसमें हिंदी, अंग्रजी, गुजराती, नेपाली, तेलगु, कन्नड़, बांग्ला, उड़िया भाषाएं शामिल हैं।
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Gita Press started publication of large Sunderkand in Gorakhpur
गीता प्रेस - फोटो : अमर उजाला।
साढ़े तीन करोड़ के अधिक सुंदरकांड प्रकाशित
गीताप्रेस में अबतक हिंदी में तीन करोड़ 50 लाख से अधिक सुंदरकांड का प्रकाशन हो चुका है। जिसमें हिंदी के सचित्र सटीक सुंदरकांड, सुंदरकांड विशिष्ट, सुंदरकांड मूल एवं सुंदरकांड मूल गुटका शामिल हैं।
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Gita Press started publication of large Sunderkand in Gorakhpur
गीता प्रेस - फोटो : अमर उजाला।
उत्पाद प्रबंधक गीता प्रेस लालमणि त्रिपाठी अक्षर छोटे होने के कारण सुंदरकांड का पाठ न कर पाने की शिकायत पाठकों से मिल रही थी। ऐसे में पाठकों को कोई परेशानी नहीं हो इस लिहाज से वृहदाकार सुंदरकांड का प्रकाशन शुरू किया गया है।
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