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फादर्स डे 2021: पिता ने बेटी की कमजोरी को बनाया हथियार, इस तरह लिख डाली उसकी सफलता की कहानी
Sun, 20 Jun 2021 03:39 PM IST
vivek shukla
विवेक सिंह, गोरखपुर।
विवेक सिंह, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Sun, 20 Jun 2021 03:39 PM IST
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बैडमिंटन खिलाड़ी आदित्या अपने पिता और भाई के साथ।
- फोटो : अमर उजाला।
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उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले की केवल 12 वर्ष की आदित्या पर आज हर कोई गर्व कर रहा है। जन्म से मूक-बधिर होने के कारण सब उसके भविष्य को लेकर चिंतित थे। ऐसे में आदित्या की कमजोरी को चैलेंज के रूप में लिया उनके पिता दिग्विजय यादव ने। उसके बाद उन्होंने आदित्या को ख्याति के क्षितिज पर चमकने के लिए जो कुछ किया आज उसका नतीजा है कि छोटी उम्र में आदित्या राष्ट्रीय चैंपियनशिप में दो स्वर्ण और एक रजत जीत चुकी है। इसके अलावा विश्व चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व भी किया है। आदित्या अपनी सफलता का श्रेय अपनी भाषा में पिता दिग्विजय यादव और मां अंकुर यादव के त्याग और प्रेरणा को देती है।
बैडमिंटन खिलाड़ी आदित्या।
- फोटो : अमर उजाला।
गेम के साथ शारीरिक अभ्यास पर फोकस किया। पिता से कोच की भूमिका में आकर फटकार भी लगाई और अनुशासन में रहना सिखाया। चाट, फुलकी, आइसक्रीम और मिठाई से दूरी बनावा दी। थोड़े समय में ही आदित्या को कोर्ट में खेलने लगी। अंकुर बताती है कि शुरूआत में लोगों से अपेक्षा के अनुरूप सहयोग नहीं मिला, मगर बेटी के प्रदर्शन ने सबके मुंह बंद कर दिए। अब उनका सपना है कि आदित्या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश के लिए बैडमिंटन में पदक हासिल करे।
बैडमिंटन खिलाड़ी आदित्या।
- फोटो : अमर उजाला।
बिछिया जंगल तुलसीराम में रहने वाले पिता दिग्विजय यादव ने बताया कि थोड़ी सी कोशिश में बैडमिंटन में आदित्या ने इतनी महारत हासिल कर ली कि स्थानीय या स्कूल स्तर पर आयोजित होने वाली विभिन्न प्रतियोगिताओं को हल्के- फुल्के अंदाज में ही जीत लिया। पहली बार आदित्या का चयन मूक- बधिर टूर्नामेंट खेलने के लिए उत्तर प्रदेश की टीम में हुआ। इसके बाद राष्ट्रीय चैंपियनशिप के लिए 2019 के जनवरी में चेन्नई गई।
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बैडमिंटन खिलाड़ी आदित्या।
- फोटो : अमर उजाला।
चेन्नई में एक गोल्ड मेडल जीता। उसी साल दिसंबर में केरल गई और एक गोल्ड व एक सिल्वर मेडल जीत कर परचम लहराया। इसके बाद आदित्या ने चीन के ताइपेई शहर में 2019 में 13 से 22 जुलाई तक चली सेकेंड वर्ल्ड डेफ यूथ बैडमिंटन चैंपियनशिप में भी देश का प्रतिनिधित्व किया, जिसमें वह क्वार्टर फाइनल तक पहुंची।
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बैडमिंटन खिलाड़ी आदित्या।
- फोटो : अमर उजाला।
पेटिंग व पढ़ाई में भी अव्वल
खेल के साथ ही आदित्या कक्षा छह में श्री विक्रम चंद मूक बधिर विद्यालय राजेंद्रनगर में पढ़ाई भी करती हैं। खेल की तरह वह पढ़ाई व पेंटिंग में भी अव्वल हैं। यदि उनके सामने कोई बैठ जाए तो वह उसकी तस्वीर हूबहू पन्ने पर उतार देती हैं। आदित्या के बड़े भाई अविरल यादव भी बैडमिंटन के खिलाड़ी हैं।
खेल के साथ ही आदित्या कक्षा छह में श्री विक्रम चंद मूक बधिर विद्यालय राजेंद्रनगर में पढ़ाई भी करती हैं। खेल की तरह वह पढ़ाई व पेंटिंग में भी अव्वल हैं। यदि उनके सामने कोई बैठ जाए तो वह उसकी तस्वीर हूबहू पन्ने पर उतार देती हैं। आदित्या के बड़े भाई अविरल यादव भी बैडमिंटन के खिलाड़ी हैं।