गोरखपुर गोरखनाथ मंदिर में दिवाली का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। पूरा मंदिर परिसर मिट्टी के दीयों से जगमगाता है। इस साल दिवाली के अवसर पर गोबर व अन्य पदार्थों से बने दीयों से मंदिर परिसर सजाया जाएगा।
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गोबर के दीये।
- फोटो : अमर उजाला।
पांच हजार दिये मंदिर में जलाएं जाएंगे। इसके लिए दियों को मंदिर प्रबंधन ने पहले ही मंगा लिया है। दीपावली के दिन मंदिर का हर कोना गोबर के दियों से सजाया जाएगा।
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गोबर के दीये
- फोटो : अमर उजाला।
इसके बारे में कहा जा रहा है कि जलाने के बाद जब दिये का तेल खत्म होगा तब दिये भी समाप्त हो जाएंगे। इससे प्रदूषण नहीं फैलेगा। हर त्योहारो की तरह से गोरखनाथ मंदिर में दीपावली का पर्व भी भव्य तरीके से मनाया जाता है।
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गोबर के दीये।
- फोटो : अमर उजाला।
इस साल करोना के गाइड लाइन का ध्यान रखते हुए दीपोत्सव का कार्यक्रम मनाया जाएगा। मंदिर के सचिव द्वारिका तिवारी ने बताया कि दीपावली की तैयारी पूरी कर ली गई है। इस बार मिट्टी की जगह गोबर के दिये जलाए जाएंगे। पूरा मंदिर परिसर दियों से सजाया जाएगा। पांच हजार दिये मंदिर के चारो तरफ सजाया जाएगा। उसमें तेल बाती डालकर शाम को जलाया जाएगा।
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गोबर में विभिन्न प्रकार की हवन सामग्री का मिश्रण होने से नहीं होगा प्रदूषण।
- फोटो : अमर उजाला।
यह पहला अवसर है कि गोबर के दियों से दीपावली का त्योहार मनाया जाएगा। गोबर के दियों के संबंध में बताया जा रहा है कि आरएसएस के अनुसांगिक संगठन सहकार भारती द्वारा चेम्बर ऑफ ट्रेडर्स के साथ मिलकर इस तरह के दियों का निर्माण कराया गया है। यह दिये तेल डालकर जलाने के बाद जैसे ही तेल खत्म होगा उसके साथ ही दिये जलकर राख हो जाएंगे।