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गोरखपुर में यहां रखी जाएगी कोरोना वैक्सीन, तैयार किया जा रहा 'ड्राई आइस'
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Fri, 11 Dec 2020 09:27 PM IST
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कोरोना वायरस वैक्सीन
- फोटो : iStock
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कोरोना वायरस के वैक्सीन के रखरखाव के लिए भले ही स्वास्थ्य महकमा ने अपनी तैयारी तेज कर दी है, लेकिन गीडा के एक उद्योग में तैयार होने वाला ड्राइ आइस वैक्सीन के सुरक्षित रखरखाव के लिए बेहतर विकल्प है। क्योंकि इसका तापमान माइनस 78 डिग्री होता है। वहीं वैक्सीन को सुरक्षित रखने के लिए माइनस 20 से 70 डिग्री की आवश्यकता जताई गई है।
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कोरोा वायरस वैक्सीन (फाइल फोटो)
- फोटो : PTI
इसको देखते हुए गीडा की फैक्टरी मोदी केमिकल्स ने इसके उत्पादन की तैयारी तेज कर दी है। फैक्टरी में रोज पांच टन ड्राइ आइस के उत्पादन की तैयारी है। इसकी कीमत 60 से 70 रुपये प्रति किलो तक हो सकती है। फिलहाल ड्राई आइस दिल्ली से आता है।
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भारत में कोरोना वैक्सीन
- फोटो : iStock
ड्राई आइस कार्बन डाइऑक्साइड का ठोस रूप होता है। जब यह गैस ठोस होती हैं तो बर्फ की तरह दिखाई देती हैं। यह कुलिंग एजेंट की तरह प्रयोग होती है। शुष्क बर्फ या ड्राई आइस को पहली बार 1835 में फ्रांसीसी आविष्कारक एड्रियन-जीन-पियर थिलोरियर ने अनुसरण किया था।
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कोरोना वायरस वैक्सीन
- फोटो : iStock
मोदी केमिकल्स के प्रवीण मोदी ने कहा कि फैक्टरी में फिलहाल पांच टन ड्राई आइस का प्रतिदिन उत्पादन का लक्ष्य है। इसकी जरूरत इस वजह से पड़ेगी क्योंकि ग्रामीण इलाकों में इतनी क्षमता वाले फ्रिज नहीं होंगे। अगर थर्मोकोल के बॉक्स में ड्राई आइस रखकर उसमें वैक्सीन रखा जाता है तो यह चार दिन तक सुरक्षित रखा जा सकता है।
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भारत में कोरोना वैक्सीन
- फोटो : Pixabay
बता दें कि कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए भारत बॉयोटेक कंपनी की वैक्सीन के सबसे पहले आने की उम्मीद है। गोरखपुर में पहले चरण में 25 हजार लोगों को वैक्सीन लगाने की तैयारी है। इसमें 12,100 सरकारी व 12 हजार निजी क्षेत्र में कार्यरत स्वास्थ्यकर्मी शामिल हैं। इस वैक्सीन को लगाने के लिए स्वास्थ्य विभाग 1400 लोगों को तैयार कर रहा है। इसमें स्वास्थ्य विभाग फार्मेसी व नर्सिंग कॉलेज के छात्र-छात्राओं की भी मदद लेगा।
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