फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

डॉक्टर की सलाह: सर्दी के मौसम में रहें सावधान, जुकाम से फट जा रहे कान के पर्दे

Sat, 17 Dec 2022 10:37 AM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Sat, 17 Dec 2022 10:37 AM IST
विज्ञापन
Doctor advice Be careful in winter season
सर्दी जुकाम। - फोटो : Istock

अगर आपको एक सप्ताह से अधिक समय तक जुकाम है तो इसे हल्के में न लें। इसकी वजह से मरीजों के कान के पर्दे फट जा रहे हैं। ऐसे मरीजों के कान में तेजी से मवाद बन रहा है, जो उनके सुनने वाली ग्रंथियों को संक्रमित कर रहा है। बीआरडी मेडिकल कॉलेज के ईएनटी विभाग में 70 फीसदी मरीज इस समस्या से पीड़ित आ रहे हैं। डॉक्टर ऐसे मरीजों को सलाह दे रहे हैं कि अगर ज्यादा दिनों से जुकाम की समस्या है तो तत्काल चिकित्सक से संपर्क करें। वरना यह समस्या हमेशा के लिए उन्हें बहरा बना सकती है।



 

Doctor advice Be careful in winter season
ठंड - फोटो : PTI

बीआरडी मेडिकल कॉलेज के नाक, कान और गला रोग विशेषज्ञ डॉ. आदित्य पाठक ने बताया कि ठंड के मौसम में इस बीमारी से पीड़ित मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है। इस बीमारी में मरीजों की किन पैनिक झिल्ली (कान के पर्दे) में तेजी से छेद हो रहा है, जो धीरे-धीरे बड़ा होता जा रहा है। ऐसे मरीजों की जांच में यह जानकारी मिली है कि इन्हें काफी दिनों से सर्दी और जुकाम था। स्थानीय स्तर पर दवा लेने के बाद भी ठीक नहीं हुआ। इस बीच कान से सुनाई कम देने लगा और कान से मवाद आने लगा।

Doctor advice Be careful in winter season
सर्दी जुकाम

जांच में पता चला कि मरीजों के कान के पर्दे फट गए हैं। ऐसे मरीजों की संख्या 70 फीसदी है। बताया कि नाक के पिछले और गले के ऊपरी हिस्से में यूस्टेकियन ट्यूब होती है। इसमें सर्दी की वजह से अक्सर संक्रमण हो जाता है और इसमें सूजन आ जाती है। इस बीच संक्रमण बढ़ने लगता है और कान के पर्दे तक पहुंच जाता है और पर्दे में छेद हो जाता है। इसके बाद कान बहने लगता है। लेकिन, इस पर मरीज ध्यान नहीं देता है।
 

विज्ञापन
विज्ञापन
Doctor advice Be careful in winter season
सर्दी-जुकाम - फोटो : istock

इस स्थिति में मरीज को लगता है कि सर्दी की वजह से उसे कम सुनाई दे रहा है, जबकि ऐसा बिल्कुल नहीं है। कान के पर्दे में जब छेद छोटा होता है तो दर्द कम होता है। लेकिन, संक्रमण बढ़ने के साथ दर्द भी तेज होता है और असहनीय दर्द होने लगता है। कभी-कभार कान से खून भी आ जाता है। ऐसी स्थिति में जब भी कान भारी लगे और हल्का दर्द हो तो तत्काल डॉक्टर से सलाह लें।
 

विज्ञापन
Doctor advice Be careful in winter season
BRD - फोटो : अमर उजाला।
50 फीसदी मरीजों के कान के पर्दों में हो रहा बड़ा छेद
डॉ आदित्य पाठक ने बताया कि 70 फीसदी मरीजों में 50 फीसदी ऐसे हैं, जिनके कान में पर्दे में बड़ा छेद (बिग सेंट्रल परफोरेशन) हो रहा है। बड़े छेद का अर्थ है कि कान के पर्दे का ज्यादा फट जाना। इसमें मरीजों को ऑपरेशन करने की जरूरत पड़ रही है। जबकि, 20 फीसदी मरीजों के कान के पर्दे में छोटा छेद (स्मॉल सेंट्रल परफोरेशन) हो रहा है, जो दवा से ठीक हो जा रहे हैं।
 
कान के पर्दे फटने के लक्षण
कान के अंदर हवा बहना महसूस होना। कम सुनाई देना। कान में तेज दर्द होना। छींकते समय सीटी सुनाई देना। कान से मवाद और खून आना।
अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed