अगर आपको एक सप्ताह से अधिक समय तक जुकाम है तो इसे हल्के में न लें। इसकी वजह से मरीजों के कान के पर्दे फट जा रहे हैं। ऐसे मरीजों के कान में तेजी से मवाद बन रहा है, जो उनके सुनने वाली ग्रंथियों को संक्रमित कर रहा है। बीआरडी मेडिकल कॉलेज के ईएनटी विभाग में 70 फीसदी मरीज इस समस्या से पीड़ित आ रहे हैं। डॉक्टर ऐसे मरीजों को सलाह दे रहे हैं कि अगर ज्यादा दिनों से जुकाम की समस्या है तो तत्काल चिकित्सक से संपर्क करें। वरना यह समस्या हमेशा के लिए उन्हें बहरा बना सकती है।
डॉक्टर की सलाह: सर्दी के मौसम में रहें सावधान, जुकाम से फट जा रहे कान के पर्दे
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बीआरडी मेडिकल कॉलेज के नाक, कान और गला रोग विशेषज्ञ डॉ. आदित्य पाठक ने बताया कि ठंड के मौसम में इस बीमारी से पीड़ित मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है। इस बीमारी में मरीजों की किन पैनिक झिल्ली (कान के पर्दे) में तेजी से छेद हो रहा है, जो धीरे-धीरे बड़ा होता जा रहा है। ऐसे मरीजों की जांच में यह जानकारी मिली है कि इन्हें काफी दिनों से सर्दी और जुकाम था। स्थानीय स्तर पर दवा लेने के बाद भी ठीक नहीं हुआ। इस बीच कान से सुनाई कम देने लगा और कान से मवाद आने लगा।
जांच में पता चला कि मरीजों के कान के पर्दे फट गए हैं। ऐसे मरीजों की संख्या 70 फीसदी है। बताया कि नाक के पिछले और गले के ऊपरी हिस्से में यूस्टेकियन ट्यूब होती है। इसमें सर्दी की वजह से अक्सर संक्रमण हो जाता है और इसमें सूजन आ जाती है। इस बीच संक्रमण बढ़ने लगता है और कान के पर्दे तक पहुंच जाता है और पर्दे में छेद हो जाता है। इसके बाद कान बहने लगता है। लेकिन, इस पर मरीज ध्यान नहीं देता है।
इस स्थिति में मरीज को लगता है कि सर्दी की वजह से उसे कम सुनाई दे रहा है, जबकि ऐसा बिल्कुल नहीं है। कान के पर्दे में जब छेद छोटा होता है तो दर्द कम होता है। लेकिन, संक्रमण बढ़ने के साथ दर्द भी तेज होता है और असहनीय दर्द होने लगता है। कभी-कभार कान से खून भी आ जाता है। ऐसी स्थिति में जब भी कान भारी लगे और हल्का दर्द हो तो तत्काल डॉक्टर से सलाह लें।
डॉ आदित्य पाठक ने बताया कि 70 फीसदी मरीजों में 50 फीसदी ऐसे हैं, जिनके कान में पर्दे में बड़ा छेद (बिग सेंट्रल परफोरेशन) हो रहा है। बड़े छेद का अर्थ है कि कान के पर्दे का ज्यादा फट जाना। इसमें मरीजों को ऑपरेशन करने की जरूरत पड़ रही है। जबकि, 20 फीसदी मरीजों के कान के पर्दे में छोटा छेद (स्मॉल सेंट्रल परफोरेशन) हो रहा है, जो दवा से ठीक हो जा रहे हैं।
कान के पर्दे फटने के लक्षण
कान के अंदर हवा बहना महसूस होना। कम सुनाई देना। कान में तेज दर्द होना। छींकते समय सीटी सुनाई देना। कान से मवाद और खून आना।