उत्तर प्रदेश के देवरिया विधानसभा उपचुनाव में मतदान शांतिपूर्ण तो संपन्न हो गया, लेकिन मतदाताओं की खामोशी ने राजनीतिक दलों को बेचैन कर दिया है। मतदान के दिन भी चुनावी तस्वीर साफ नहीं हो सकी। ऐसे में प्रश्न यह है कि जीतेगा कौन, बूथ पर तो मतदाता मौन ही रहा। गौरतलब है कि सदर विधानसभा चुनाव के सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के प्रत्याशी ब्राह्मण हैं। यह सीट ब्राह्मण बहुल मानी जाती है। वहीं देवरिया को ब्राह्मण मतदाता के प्रभाव का इलाका कहा जाता है। ऐसे में यहां की जीत इस बात का रुझान दिखा सकती है कि यूपी में ब्राह्मण किसके साथ हैं?
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देवरिया उपचुनाव।
- फोटो : अमर उजाला।
बता दें कि उपचुनाव में मतदाता विकास का मुद्दा भूल गया। वभनी द्वितीय, महुआबारी सहित कई गांवों में लोगों ने 'सड़क नहीं तो वोट नहीं' का नारा दिया तो था, लेकिन चुनाव के लिए उनका मुद्दा गायब हो गया। बूथ पर ऐसे लोगों ने बताया कि चुनाव में उनकी मांगे पूरी नहीं होने वाली थीं। ऐसे में उन्होंने विकास का मुद्दा छोड़ दिया।
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ग्राम प्रधान प्रेम यादव ने बताया कि लोग दल और जाति के आधार पर मतदान कर रहे हैं। न्यू कालोनी के पूर्व सभासद जय प्रकाश सिंह का कहना है कि वह अपने व्यक्तिगत संबंधों के आधार पर एक प्रत्याशी का समर्थन कर रहे हैं। चुनाव में बिरादरी कहां जा रही, इससे हमें कुछ भी लेना देना नहीं है। साकेत नगर के पूर्व सभासद अवधेश यादव ने कहा कि बेरोजगारी, उत्पीड़न, भ्रष्टाचार के मुद्दे पर वह इस बार मतदान कर रहे हैं।
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कारोबारी संजय जायसवाल का कहना है कि विकास कोई नहीं देख रहा। हमने तो देश के मुद्दे पर मतदान किया और परिवार के लोगों से भी करने को कहा। कारोबारी एवं कोटेदार सुरेश जायसवाल का कहना है कि विकास के मुद्दे पर हमारे परिवार ने रामनाथ देवरिया बूथ पर मतदान किया है। लकड़ी हट्टा के दुकानदार महासागर पांडेय का कहना है कि देश, प्रदेश के विकास के मुद्दे पर हमारे मोहल्ले के लोगों ने मतदान किया है।
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सिविल लाइन की रेनू श्रीवास्तव का कहना है कि हमने तो प्रत्याशी के व्यवहार एवं आचरण को देखकर वोट दिया। हमें ऐसा विधायक चाहिए जो महिला हित की बात करें। गायत्रीपुरम की रीता श्रीवास्तव का कहना है कि इस बार के उपचुनाव में न कोई मुद्दा हावी रहा और न ही दल। उम्मीदवारों के समर्थक तो मुखर रहे, लेकिन वोटर खामोश दिखे।