गोरखपुर में डेंगू मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। बृहस्पतिवार को हुई जांच में दो मासूमों समेत पांच लोग डेंगू संक्रमित मिले हैं। इसके बाद से कुल मरीजों की संख्या 237 हो गई है। इनमें 150 शहर और 87 ग्रामीण क्षेत्र के रहने वाले हैं।
Dengue Alert: गोरखपुर में डेंगू का कहर जारी, मरीजों की संख्या हुई 237
जिला मलेरिया अधिकारी अगंद सिंह ने बताया कि बेतियाहाता, घोष कंपनी, हुमायुंपुर, डुमरी खास और अहमद नगर में एक-एक मरीज मिले हैं। किट से हुई जांच में रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद एलाइजा जांच कराई गई है। इनकी उम्र क्रमश: 16, 27, चार, पांच और 50 वर्ष है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
डेंगू मरीजों की मदद करेगा कोविड कमांड सेंटर
इंटीग्रेटेड कोविड कमांड सेंटर को डेंगू रोगियों के लिए सक्रिय कर दिया गया है। यह सेंटर अब डेंगू पीड़ितों की मदद करेगा। सेंटर के 9532041882, 9532797104 एवं 0551-2202205 नंबर पर मदद के लिए फोन किया जा सकता है। प्रभारी सुनीता पटेल ने बताया कि कोरोना मरीजों की तर्ज पर डेंगू मरीजों की इलाज में सहायता की जाएगी।
डेडीकेटेड डेंगू अस्पताल में तैनात किए गए कर्मचारी
नंदा नगर स्थिति 100 बेड टीबी अस्पताल को डेंगू मरीजों के लिए डेडीकेटेड अस्पताल बनाया गया है। सभी 100 बेड डेंगू मरीजों के लिए आरक्षित कर दिए गए हैं। 50 बेड पर मच्छरदानी भी लगा दी गई है। मरीजों के बढ़ने पर अन्य बेडों पर भी मच्छरदानी की व्यवस्था की जाएगी। सीएमओ डॉ. आशुतोष कुमार दूबे ने बताया कि अस्पताल में डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टॉफ पहले से हैं। 20 स्टॉफ नर्स व 20 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को वहां तैनात किया गया है।
घर पर ठीक हो गए 57 प्रतिशत मरीज
स्वास्थ्य विभाग की ओर से डेंगू के हर पुष्ट मामले की जांच में यह बात सामने आई है कि जिले में 57 प्रतिशत मरीज बिना किसी अस्पताल में भर्ती हुए ठीक हो गए हैं। जिला मलेरिया अधिकारी अंगद सिंह ने बताया कि टीम के सर्वेक्षण में मरीजों की केस हिस्ट्री लेने पर यह तथ्य सामने आया है कि अस्पताल जाने वाले ज्यादातर मरीज वही हैं जिन्होंने डेंगू के इलाज का प्रोटोकॉल नहीं माना है। इन लोगों ने लक्षण दिखने पर न तो समय से जांच कराई, न प्रशिक्षित चिकित्सक की दवा ली, न बेड रेस्ट किया और न ही खानपान में कोई सुधार किया। कुल 232 मरीजों की केस हिस्ट्री ली गई। इसमें से 133 मरीज इलाज से घर पर ठीक हुए हैं।
अपने मन से ले रहे हैं दवाई
सहायक मलेरिया अधिकारी सीपी मिश्रा ने बताया कि वह टीम के साथ डेंगू के पुष्ट मरीजों के सर्वे के लिए गए तो अस्पताल में भर्ती होने वाले ज्यादातर मरीज ऐसे मिले, जिन्होंने लक्षण आने के बाद दवा ली और फिर लक्षण जाते ही दवा बंद कर दी। उनकी शारीरिक गतिविधियां बंद नहीं हुईं, इससे उनका मर्ज बढ़ता गया।
सीएमओ डॉ. आशुतोष कुमार दूबे ने कहा कि डेंगू के रैपिड जांच की सुविधा सभी सरकारी अस्पतालों में निशुल्क है। रैपिड जांच के अलावा उनकी एलाइजा जांच भी निशुल्क कराई जाती है। विभाग के सर्वे में सामने आया है कि जो लोग प्रोटोकाल का पालन कर रहे हैं, वे घर पर ही ठीक हो गए हैं।