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किस गवाही पर दोषियों के डेथ वारंट जारी? निर्भया के दोस्त को क्यों जिंदगी भर मलाल?

Wed, 08 Jan 2020 04:21 PM IST
विजय जैन डिजिटल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर
डिजिटल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर Published by: विजय जैन Updated Wed, 08 Jan 2020 04:21 PM IST
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निर्भया के दोस्त अवनींद्र पांडेय - फोटो : अमर उजाला
दिल्ली के वसंत विहार गैंगरेप के चश्मदीद और निर्भया के दोस्त अवनींद्र पांडेय आज भी उस घटना की याद आने से सिहर जाते हैं। उस घटना पर बात करते हुए उनकी आंखें नम हो जाती हैं।


उन्हें इस बात का मलाल है कि जिसे दोस्त कहा, उसे दरिंदों से बचा नहीं पाया।‘हर पल एक दर्द सताता है कि दोस्ती अधूरी रह गई। दोस्त का हर पल साथ देने का वादा टूट गया। काश, मैं उसे बचा पाता। कहीं न कहीं दिल में हर पल अपराध बोध होता है कि राजधानी पहले जागी होती तो वो हमारे बीच होती।’
 

वारदात वाली रात के करीब एक साल बाद बीबीसी को दिए इंटरव्यू में अवनींद्र ने कहा था कि  हर गुजरते दिन ने उन्हें उस रात की दरिंदगी का एहसास कराया है जो निर्भया ने महसूस किया होगा। वो कहते हैं, "जो मेरी दोस्त के साथ हुआ वो एक बुरे सपने की तरह था। घटना के बाद पुलिस स्टेशन जाना, अभियुक्तों की पहचान करना, अदालत जाना, परिवार का दुख बांटना, मेरे साथ जो कुछ हुआ वो बहुत चुनौतीपूर्ण था।"

वो कहते हैं, "मुझे हमेशा ऐसा लगता था कि मैं कुछ ऐसा नहीं करूं कि मैं कमज़ोर कहा जाऊं। दूसरों को कुछ कहने का मौका नहीं दूं। मैं कुछ ऐसा करके दिखाऊं कि लोगों का मेरे बारे में एक अलग नज़रिया बने।" लेकिन खुद को मज़बूत दिखाने की कोशिश करने वाले इस व्यक्ति के लिए उस रात की घटनाओं को दिमाग से निकाल देना जैसे असंभव है।
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अवनींद्र - फोटो : file
अवनींद्र कहते हैं, "उस रात की बातें हमेशा मेरे दिमाग में घूमती रहती हैं। 16 दिसंबर की रात के बाद जब भी मैं ऐसी किसी घटना के बारे में सुनता हूं तो मैं खुद को अपनी दोस्त से जुड़ा हुआ महसूस करता हूं। मुझे ऐसा लगता है कि जो निर्भया के परिवार के साथ हुआ, वो मेरे परिवार के साथ ही हुआ। इससे मुझे बहुत दुख होता है।"

उनसे बात करते हुए ऐसा प्रतीत होता है कि वो कहना बहुत कुछ चाह रहे हैं लेकिन मुंह से कुछ और निकल रहा हो। "मैंने कभी सोचा नहीं था कि इंसानो के बीच ऐसे लोग छिपे हैं जो इस हद तक जाएंगे, हमारे साथ अपराध कर सकते हैं, हैवानियत कर सकते हैं।"

और शायद यही कारण है कि एमबीए और इंजीनियरिंग की डिग्री लिए हुए निर्भया के इस दोस्त ने अपना ध्यान काम पर बढ़ा दिया है। वो एक ग़ैर-सरकारी संगठन के माध्यम से समाज में बदलाव लाने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन क्या वो मानते हैं कि गुज़रे वक्त में सही मायने में उनकी दोस्त की स्मृति के साथ न्याय हो पाया?

अवनींद्र कहते हैं, "हम ऐसा कभी नहीं कह सकते कि निर्भया के साथ न्याय हुआ। व्यवस्था की गलतियों में हम सभी शामिल थे। उसमें हमारा भी उतना ही योगदान है। जब पहले गलतियां हुईं तो हम जगे नहीं और उसके बाद इतना बड़ा हादसा हो गया। सारी असफलताएं उस रात हुईं। आखिरकार उनकी मौत हो गई। अगर हम ऐसी घटनाओं को दोबारा होने से रोक पाएं तो ये उनको श्रद्धांजलि होगी।"
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निर्भया के चारों दोषी - फोटो : Social Media
क्या हुआ था उस रात
वारदात की रात गैंगरेप से पहले आरोपी बस ड्राइवर राम सिंह ने राम आधार नामक व्यक्ति को अपनी बस में लिफ्ट देकर उसका सारा सामान लूट लिया था। पुलिस की पूछताछ में राम सिंह ने कहा था कि उसे अपने किए पर कोई पछतावा नहीं है। वह मस्ती करने निकले थे और एक दूसरे को अच्छी तरह से जानते थे।

राम सिंह से पूछताछ के दौरान पता चला कि उसको तब गुस्सा ज्यादा आया जब लड़की ने उसके हाथों में अपने दांतों से काट लिया। राम सिंह ने बताया कि लड़की ने अपना बचाव करते हुए राम सिंह के हाथों में काट लिया। जांच रिपोर्ट में यह भी जोड़ा है कि मुख्य आरोपी राम सिंह और अक्षय ठाकुर ने पीड़िता से दो बार दुष्कर्म किया।

इसके बाद राम सिंह को अपने गुस्से पर काबू नहीं रहा और बस में मौजूद अपने साथियों से कहा था, ‘लगता है मर गई है और अब इसे बस से नीचे फेंक दो।’पुलिस अधिकारियों ने यह भी दावा किया है कि आरोपियों ने पहले छात्रा के दोस्त को बस से नीचे फेंका था और इसके बाद छात्रा को।

रिपोर्ट में ये बात भी सामने आई कि आरोपियों ने दोनों पीड़ितों के कपड़े इसलिए उतार दिए थे कि अगर जिंदा रह गए तो सर्दी से मर जाएंगे। युवक के कपडे़ इसलिए उतार दिए थे कि अगर युवक बच गया तो वह पुलिस को जल्दी शिकायत नहीं कर पाएगा। आरोपियों ने दोनों को बस के अगले दरवाजे से फेंका था। जब छात्रा को फेंका गया तो वह पायदान पर अटक गई थी।
 
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निर्भया कांड का दोषी
दोनों को मारना चाहते थे
आरोपी ने बस को इस तरह रोका था कि अगर वह बस चलाए तो दोनों बस के पिछले पहिए के नीचे आ जाएं। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आरोपी जब युवक से ज्यादा मारपीट करने लगे तो वह बस की सीट के नीचे घुस गया था और कुछ समय के लिए उसने अपनी सांस रोक ली थी। इससे उनको लगा कि युवक की हालत मरने जैसी हो गई है।

दूसरी तरफ, पुलिस ने छात्रा को सफदरजंग अस्पताल पहुंचाने वाले पीसीआर कर्मियों को भी गवाह बनाया। ये ही वही पुलिसकर्मी हैं जिन्होंने छात्रा को पहली बार घायलावस्था में देखा था।

'बस से न फेंकते, तो मेरी हत्या तय थी'
वसंत विहार गैंगरेप मामले से जुड़े लूटपाट मामले में गवाह राम अधर ने अदालत को बताया कि यदि आरोपी उसे चलती बस से नहीं फेंकते तो उसकी हत्या भी तय थी।

राम अधर ने अदालत को बताया कि मुकेश, विनय, अक्षय व पवन के अलावा दो अन्य आरोपी भी इनके साथ थे। आरोपियों ने उससे नगदी व मोबाइल लूट लिया था व आटो चालक के फोन से उसने अपने भाई को इस घटना की जानकारी दी थी।
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क्या थे चिकित्सकीय सबूत?
आरोपियों को सजा दिलाने के लिए यूं तो काफी सबूत और गवाह थे लेकिन पहली बार दुष्कर्म के मामले में आरोपियों, पीड़िता व घायल युवक के खून की जांच के लिए डीएनए टेस्ट कराए गए, जो अदालत में बड़े सबूत बने।

आरोपियों के दांतों की जांच भी सफदरजंग अस्पताल में कराई गई, क्योंकि पीड़िता के शरीर पर कई जगह दांत से काटने के निशान थे। फोरेंसिक जांच के अलावा पीड़ित युवती के खून से सने कपड़ों और आरोपियों का मेडिको लीगल केस (एमएलसी) भी सबूत बना।

• चेहरे पर दांत से काटने के निशान
• छाती और गले पर नाखून से काटने के निशान
• पेट पर नुकीली वस्तु से गंभीर चोट
• प्राइवेट पार्ट्स पर तेज चोट के निशान
• लोहे की रॉड शरीर के अंदर डाली
• बच्चेदानी का कुछ हिस्सा प्रभावित हुआ था
• रॉड की वजह से छोटी आंत पूरी तरह से बाहर आ गई थी
• बड़ी आंत का भी काफी हिस्सा प्रभावित हुआ
• कमर के पास धारदार हथियार से कट के निशान
• पीठ और पैर में मामूली चोट के निशान
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