फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

27 साल पहले यूपी के इस जिले में भी हुई थी कासगंज जैसी घटना, छह पुलिसकर्मी हुए थे शहीद

Wed, 10 Feb 2021 05:51 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, कुशीनगर।
अमर उजाला नेटवर्क, कुशीनगर। Published by: vivek shukla Updated Wed, 10 Feb 2021 05:51 PM IST
विज्ञापन
Kasganj incident related news in kushinagar police encounter story
पुलिसकर्मियों की याद में बना शहीद द्वार व शहीद कांस्टेबल की फाइल फोटो। - फोटो : अमर उजाला।

उत्तर प्रदेश के कासगंज जिले में हुई घटना से 27 साल पहले कुशीनगर जिले में हुई डकैतों से मुठभेड़ की याद ताजा हो गई। इस घटना में एसओ समेत छह पुलिसकर्मियों शहीद हो गए थे। पडरौना कोतवाली का गेट आज भी दुर्दांत अपराधियों के लिए खौफ का पर्याय रहे एसओ अनिल पांडेय समेत शहीद पुलिस कर्मियों की याद दिलाता है। आगे की स्लाइड्स में पढ़ें पूरी कहानी...

Kasganj incident related news in kushinagar police encounter story
पुलिसकर्मियों की याद में बने शहीद द्वार पर लगा स्मारक। - फोटो : अमर उजाला।

नब्बे के दशक में बिहार से सटे गंडक नदी के किनारे का इलाका जंगल डकैतों की वजह से चर्चा में रहता था। अपहरण, लूट, हत्या जैसी वारदातों को रोकने के लिए शासन ने सीमावर्ती क्षेत्र में हनुमानगंज, जटहां बाजार व बरवापट्टी थाना खोला। इसी दौरान सब इंस्पेक्टर अनिल कुमार पांडेय की जिले में तैनाती हुई। मुठभेड़ में माहिर अनिल कुमार पांडेय ने गंडक के दियारा क्षेत्र में समानांतर सरकार चलाने वाले जंगल डकैतों को चुन-चुनकर मारना शुरू किया।

Kasganj incident related news in kushinagar police encounter story
शहीद कांस्टेबल विश्वनाथ यादव। - फोटो : अमर उजाला।

13 मई 1994 को देवरिया से अलग होकर कुशीनगर जिला अस्तित्व में आया तो अनिल पांडेय को बिहार बार्डर से सटे तरयासुजान थाने पर तैनाती मिली। 30 अगस्त 1994 की रात में खबर मिली कि कुबेरस्थान थाना क्षेत्र के पचरुखिया घाट के दूसरी तरफ बांसी नदी के किनारे डकैत मौजूद हैं। एसपी ने एसओ अनिल कुमार पांडेय के नेतृत्व में पुलिस टीम को भेज दिया। परंतु पुलिस टीम के आने की भनक डकैतों को लग गई।

विज्ञापन
विज्ञापन
Kasganj incident related news in kushinagar police encounter story
शहीद पुलिसकर्मियों की याद में पडरौना कोतवाली में बना शहीद द्वार। - फोटो : अमर उजाला।

एनकाउंटर स्पेशलिस्ट एसओ अनिल कुमार पांडेय, एसआई राजेंद्र यादव और सिपाही नागेंद्र पांडेय, खेदन सिंह, परशुराम गुप्ता व विश्वनाथ यादव शहीद हो गए। पुलिस की अन्य टीमें जब तक पहुंचीं डकैत अंधेरे का फायदा उठाकर भाग निकले थे। अगले दिन डीजीपी समेत तमाम पुलिस अफसर मौके पर पहुंचे और रणनीति बनाकर गंडक नदी के दियारा में रहने वाले जंगल डकैतों का सफाया शुरू हुआ था।

विज्ञापन
Kasganj incident related news in kushinagar police encounter story
शहीद पुलिस कर्मियों की याद में बनाया गया प्रवेश द्वार। - फोटो : अमर उजाला।
पुलिस लाइन में नहीं मनाई जाती जन्माष्टमी
जिले में जन्माष्टमी व डोल का मेला बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। मेला खत्म होने के बाद पुलिस लाइन में भी कार्यक्रम होता था। 30 अगस्त 1994 की रात में भी पुलिस लाइन में जन्माष्टमी का उत्सव मनाया जा रहा था जिसमें जिले भर के पुलिसकर्मी मौजूद थे। इसी कार्यक्रम के दौरान सूचना मिलने पर पुलिस कर्मी उत्सव छोड़कर मुठभेड़ करने गए थे। इस मुठभेड़ में शहीद हुए पुलिस कर्मियों की याद में कुशीनगर की पुलिस लाइन में अब भी जन्माष्टमी का उत्सव नहीं मनाया जाता है।
अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें हर राज्य और शहर से जुड़ी क्राइम समाचार की
ब्रेकिंग अपडेट।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed